जिला मंडी की चौहर घाटी तथा जिला कांगड़ा की छोटाभंगाल घाटी को पर्यटन के लिहाज़ से विकसित करने की मांग ने पकड़ा जोर

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सुरभि न्यूज़ (खुशी राम ठाकुर) बरोट।  जिला मंडी की चौहर घाटी तथा जिला कांगड़ा की छोटाभंगाल घाटी को पर्यटन के लिहाज़ से विकसित करने के लिए घाटी के लोगों ने एक बार फिर से अपनी आवाज़ को उठा दी है। घाटी के लोगों में श्रीपत, महेश्वर, धर्मेन्द्र कुमार, सरीना, बीना ममता, गोपाल, रोशन लाल, राजा कुमार व प्रकाश का कहना है कि जिला मंडी जहां छोटी काशी के नाम से प्रसिद्द है वहीं जिला मंडी तथा जिला कांगड़ा के कई स्थल अद्भुत नैसर्गिक सौंदर्य से लबालव है।  इनमें से जिला की चौहार घटी तथा जिला कांगड़ा की छोटाभंगाल घाटी भी अछूती नहीं रही है। गोरतलव है कि इन घाटियों को कुदरत ने बेपन्नाह सुंदरता से बख्श रखा है मगर फिर भी आजतक इन दोनों घाटियों को सरकार द्वारा पर्यटन की दृष्टि से विकसित ही नहीं किया गया है।  बरोट पंचायत के प्रधान डाक्टर रमेश कुमार तथा खलैहल तथा पंचायत के प्रधान भागमल का कहना है कि प्रदेश में कई बार सरकारें आई भी और कई बार चली भी गई।  मगर किसी भी सरकार द्वारा इन दोनों घाटियों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित ही नहीं किया है। उनका कहना है कि प्रदेश में आजतक राज करने वाले स्थानीय विधायक से मंत्रियों ने इन घाटियों का दौरा करने के दौरान इन घाटियों को पर्यटन के लिहाज़ से विकसित करने की कई बार घोषणाएं भी की मगर आजतक समस्या का कोई भी हल नहीं हो पाया है। जिस कारण इन दोनों घाटियों के लोग अपना आप को ठगा–ठगा सा महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि घाटियों में झटिंगरी, फुलाधार, नालडेहरा, बरोट, टिक्कन, थलटूखोड, सुधार, मियोट, राजगुन्धा, प्लाचक, पनिहारटू व घोड़लेटणू आदि घाटियों के बेहद सुंदरा स्थल है। |इन स्थलों पर पर्यटक तो हर वर्ष आकर कई–कई दिनों तक डेरा जमाकर खूब मौज मस्ती करते हैं मगर पर्यटन से जुड़ी तमाम सुविधा न मिलने के कारण यहाँ से पर्यटक निराश होकर लौट जाते हैं।  इसलिए चौहार घाटी तथा छोटाभंगाल घाटी में पर्यटन के लिहाज़ से विकसित करना अति अनिवार्य हो गया है। प्रधान डाक्टर रमेश कुमार तथा भागमल ने सरकार से मांग करते हुए कहा कि घाटियों में पर्यटन विकसित होने से यहाँ के बेरोजगारों को रोज़गार के अवसर तो मिलेंगे ही साथ में पर्यटन विकसित होने से घाटियों में विकास को भी नई दिशा भी मिलेगी। इस बारे में द्रंग के विधायक जवाहर ठाकुर का कहना है कि घाटीवासियों की यह मांग बिल्कुल जायज़ है इस समस्या को विधान सभा सत्र के दौरान मुख्यमंत्री के समक्ष एक बार फिर से उठाया जाएगा।

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