कुल्लू रंग मेला की चैथी संध्या में केहर सिंह ठाकुर के निर्देशन में नाटक काक चरित्र का किया मंचन  

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सुरभि न्यूज़ कुल्लू। ऐक्टिव मोनाल कल्चरल ऐसोसिएशन कुल्लू द्वारा संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से तथा आज़ादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य पर भाषा एवं संस्कृति विभाग, कुल्लू के संयुक्त तत्वावधान में कलाकेन्द्र कुल्लू में आयोजित किए जा रहे नाट्योत्सव ‘कुल्लू रंग मेला’की चैथी संध्या में संस्था के कलाकारो ने मनोज मित्र द्वारा लिखित तथा नूर ज़हीर द्वारा हिन्दी में रूपान्तरित केहर सिंह ठाकुर के निर्देशन में नाटक ‘काक चरित्र’ प्रस्तुत कर दर्शकों को खूब हंसाया।

नाटक काक चरित्र एक ऐसे लेखक हरी सिंह आज़ाद की कहानी है जो हिल स्टेशन पर रहता है और अपने आप को यथार्थवादी लेखक कहता है। उसे नाट्य लेखन के क्षेत्र में कई पुरस्कारों के अलावा राश्ट्रपति पुरस्कार भी प्राप्त हुआ है। उसके घर के आंगन में एक कौआ पेड़ पर अपना घोंसला जमाए हुए है। हरी सिंह इस वक्त घर घर जाकर मुफ्त में दीमक और जाले साफ करने वाले एक आदमी दीजू बाबू को हीरो बनाकर नाटक लिख रहा है। लेकिन कौआ बताता है कि यह कोई महान नहीं है बल्कि घरों में जाकर जाले और दीमक साफ करने के बहाने वहां से सामान उठा कर चल देता है और बाज़ार में जाकर उन्हें बेच देता है। अब हरी सिंह लिखे हुए कागजों को फाड़ कर एक डाक्टर से प्रभावित होकर नाटक लिखना शुरू करता है। क्योंकि हरी बाबू को पता चलता है कि उसने एक गरीब मिस्त्री के नाम पर श्रुति स्तम्भ बनाया है जो डाक्टर के छज्जे से सीढ़ी पलट जाने से गिर कर मर गया होता है। लेकिन कौआ उसे बताता है कि सीढ़ी पलटी नहीं थी बल्कि डाक्टर ने खुद ही ठेल कर फेंक दी थी। इस तरह से हरी बाबू की सारी हेकड़ी निकल जाती है। अब एक साधु आता है जो अपने आप को हरी सिंह का मामा बताता है जो बीस साल पहले हिमालय में गया था। तो वह प्रभावित होकर उस पर लिखने लगता है। लेकिन शिघ्र ही कौआ हरी बाबू के सामने उसकी सच्चाई भी लाता है।

वह साधु तो गहनों का चोर है। वेश बदल कर घूम रहा है। अब हरी सिंह कहता है कि काक तू मुझे सच्चाई बता दिया कर न मुझसे तो ठीक से दिखाई नहीं पड़ रही पर तुम्हारी नज़रों से कोई नहीं बच सकता। तो काक कहता है कि निचले कमरे में तुम्हारी बीबी के साथ कोई आदमी है ! जो रोज़ दोपहर को जब तुम यहां बैठे लिखते रहते हो और वो आपस में प्रेम करते हैं। चलो देखें अभी भी है ! यह सुन कर हरी सिंह सन्न रह जाता है। नाटक में हरि सिंह की भूमिका केहर सिंह ने काक की भूमिका देस राज ने, डा दास की भूमिका रेवत राम विक्की ने जबकि साधू और चेले की भूमिका क्रमषः जीवानन्द और श्याम लाल ने की। आलोक व वस्त्र परिकल्पना मीनाक्षी, पाष्व ध्वनि संचालन आरती ठाकुर, केमरा पर भरत सिंह और सुमित ठाकुर तथा आनलाईन स्ट्रीमिंग वैभव ठाकुर ने की।

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