60 किमी पैदल सफर करने के बाद डीसी आशुतोष गर्ग ने बताया प्लान

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सुरभि न्यूज़ कुल्लू।। जिला के बंजार उपमण्डल की ग्राम पंचायत गाड़ापारली के अति दुर्गम व दूरस्थ क्षेत्र शाक्टी, मरौड़ व शुगाड़ के बहुत से लोगों ने मोबाईल, टैलीविजन, कम्प्युटर जैसे महत्वपूर्ण उपकरणों को अभी देखा तक नहीं है। आज भी जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके ऐसे साधनों के उपयोग की सोच तक लोगों के जहन में नहीं दिखती। इन गांवों तक पहुंचने के लिए आज भी 22 से 30 किलोमीटर लंबी व कठिन दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। जिलाधीश आशुतोष गर्ग को जब ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क में बसे शाक्टी, मरौड़ व शुगाड़ गांवों के लोगों की वेदना का एहसास हुआ, तो उन्होंने ठान लिया चाहे कितनी भी बाधाएं रास्ते में आएं वह इन गांवों तक जरूर पहुंचेंगे और स्वयं वस्तुस्थिति का जायजा लेकर लोगों के लिए सुविधाएं जुटाने का पुरजोर प्रयास करेंगे। आशुतोष गर्ग ने बिजली, लोक निर्माण, ग्रामीण विकास विभागों के अधिकारियों के अलावा शिमला से हिमऊर्जा विभाग के अधिकारियों की टीम को बुलाकर उन्हें अपने साथ लेकर 5 अक्तूबर को सुवह-सवेरे शाक्टी-मरौड़ के लिए रवाना हुए।
डीसी के जज्बे को सलाम, कठिन यात्रा के बीच अधिकारियों को देते रहे निर्देश
आशुतोष गर्ग शाक्टी-मरौड़ के लिए दुर्गम पैदल रास्ते में कभी चलते-चलते तो कभी रूककर अधिकारियों के साथ बिजली व सड़क की सुविधा के सृजन को लेकर विचार-विमर्श करने के उपरांत उन्हें आवश्यक निर्देश देते रहे। रास्ते में उन्होंने हर बारीक पहलू पर गौर किया कि किस प्रकार से इन दूरस्थ गांवों के लोगों को सुविधाएं मुहैया करवाई जा सकती हैं। उन्होंने ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क व वनभूमि की मौजूदगी में लोगों के लिए सुविधाएं जुटाने के बारे में बारीकी से विभागीय अधिकारियों से चर्चा की। अधिकारियों की टीम ने पहले दिन शाक्टी गांव में रात्रि ठहराव किया। वहां पंचायती राज संस्थानों के प्रतिनिधियों तथा गांव के बुजुर्ग लोगों से मिले और उनके साथ गांव के विकास को लेकर लंबा संवाद किया। लोगों की अपेक्षाओं व समस्याओं को जाना और समझा तथा उनके समाधान का तुरंत कोई न कोई रास्ता निकालने के लिए कार्ययोजना तैयार करने को संबंधित विभागों को कहा। प्रवास के दूसरे दिन उपायुक्त व उनकी टीम शुगाड़ गांव में गई और वहां पर ग्रामीणों की समस्याओं को सुना।

डीसी को देखकर ग्रामीणों में दिखी आशा की किरण
उपायुक्त आशुतोष गर्ग को देखकर इन दूरस्थ गांवों के लोगों में काफी उत्साह दिखाई दिया। लोगों ने गर्मजोशी के साथ डीसी का स्वागत किया। ग्रामीणों को उनसे बहुत सी उम्मीदें थी जो उन्हें भविष्य में पूरी होती दिखाई दी। गौरतलब है कि कई साल पहले आशुतोष गर्ग से पूर्व केवल एक ही डीसी राकेश कंवर इन दूरस्थ गांवों तक पहुंचे हैं। इसी प्रकार, आशुतोष गर्ग पैदल चलकर ऐतिहासिक गांव मलाणा में स्वयं पहुंचे थे, जहां लोगों को कोरोना वैक्सीन लगवाने के लिए प्रेरित किया था और साथ ही क्षेत्र के विकास पर लोगों से खुली चर्चा की थी।
डीसी और उनकी टीम ने गाड़ापारली पंचायत के अपने प्रवास के दूसरे दिन मरौड़ व शुगाड़ गांवों का दौरा किया। जाहिर है कि इन सभी गांवों की एक सी समस्याएं हैं जिनके लिये वह दशकों से आस लगाए बैठे हैं। ऐसा नहीं है कि इन गांवों को सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए किसी प्रकार की राजनैतिक इच्छाशक्ति न रही हो, लेकिन कुछ तकनीकी बाधाएं हैं जिनके चलते विकास की लौ इन गांवों तक पहुंचाना टेढी खीर रहा है। इन गांवों की तलहटी से बहती नदी सैंज घाटी को विद्युत नगरी बनाती है, लेकिन ये गांव स्वयं अंधेरे में हैं। कुछ जगहों पर सौर लाईटें अवश्य दिखाई देती हैं और स्थानीय लोग इसे एक बहुत बड़ी उपलब्धि और सौगात मानते हैं। नेशनल पार्क के चलते बिजली पहुंचाने के लिए वनों के कटान की मंजूरी मिलना व्यवहारिक नहीं रहा है, लेकिन उपायुक्त का कहना है कि गांवों के लिए बिजली पहुंचाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और वे दिन दूर नहीं जब लोगों को बिजली की सुविधा मिल जाएगी। उन्होंने विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता को निर्देश दिए कि निजी तौर पर जल्द से शेष प्रक्रिया को पूरा करें, ताकि इन गांवों के लोग दूरदर्शन देख सकें, हीटर व गीजर का उपयोग कर सकें। हालांकि अनाप्पति प्रमाण पत्र के लिए मामला वाईल्डलाइफ बोर्ड को भेजा है और इसकी स्वीकृति मिलते ही कार्य आरंभ कर दिया जाएगा।
हिमऊर्जा करेगा वैकल्पिक बिजली की व्यवस्था
आशुतोष गर्ग ने पंचायती राज संस्थानों के प्रतिनिधियों व ग्रामीणों तथा हिमऊर्जा विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान कहा कि जब तक बिजली नहीं पहुंचती तब तक शाक्टी-मरौड़ में ऑफ ग्रिड समाधान से गांव को बिजली प्रदान की जा सकती है। उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि इस ग्रिड की स्थापना के लिए दो-अढ़ाई बीघा जमीन की व्यवस्था करें तो हिमऊर्जा विभाग बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था करने के लिए सक्षम है।
आशुतोष गर्ग ने क्षेत्र में नेटवर्क की सुविधा प्रदान करने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से बात की जाएगी और जल्द ही कार्य आरंभ किया जाएगा। हालांकि लपाह में कुछ समय पहले एक टावर स्थापित किया गया था जो अब खराब पड़ा है। उपायुक्त ने कहा कि वह इस संबंध में संबंधित कंपनी के साथ बात करेंगे और टावर का संचालन आरंभ करवाएंगे।
लोक निर्माण विभाग के अधिशाषी अभियंता चमन ठाकुर व नीरज शर्मा ने उपायुक्त को अवगत करवाया कि गाड़ापारली ग्राम पंचायत के पांच गांवों को सड़क से जोड़ने के लिए निहारनी से मझाण, मैल 23.300 किलोमीटर लंबी सड़क का सर्वेक्षण किया गया है। हालांकि यह सड़क शाक्टी, मरोड़ गांवों से अलग है। उपायुक्त ने शाक्टी-मरौड़ के लिए पुनः सर्वेक्षण करने के लिए लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह कार्य युद्ध स्तर पर किया जाना चाहिए। जैसे ही वन्य प्राणी बोर्ड से स्वीकृति मिलती है, कार्य आरंभ कर दिया जाएगा।

पैदल रास्ते का सुधार किया जाएगा
उपायुक्त ने कहा कि शाक्टी-मरौड़ के लिए मौजूदा पैदल रास्ते की हालत भी ठीक नहीं है। उन्होंने इस रास्ते को दुरूस्त करने के लिए वन विभाग व खण्ड विकास अधिकारी को निर्देश दिए। इसी प्रकार, उपायुक्त को ग्रामीणों ने बताया कि इन गांवों में केवल एक ही स्कूल है और बच्चों को खराब रास्ते से स्कूल जाना पड़ता है जहां नीचे बह रही नदी से हमेशा खतरा बना रहता है। उपायुक्त ने स्वयं इस स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि स्कूल खोलने के संबंध में शिक्षा विभाग से बात की जाएगी और संभवत यह सुविधा प्रदान हो जाएगी। उन्होंने स्कूल तक के रास्ते का जल्द सुधार करने के लिए खण्ड विकास अधिकारी को कहा। उन्होंने कहा कि यह कार्य मनरेगा में किया जा सकता है। उपायुक्त ने गांव वासियों से कहा कि गांव में अधिकांश कार्यों को मनरेगा के अंतर्गत किया जा सकता है। इसके लिए उन्होंने चुने हुए पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधियों को अपने स्तर पर प्रयास करने का अनुरोध किया।

शत-प्रतिशत लोगों को उपलब्ध करवाएंगे दूसरी डोज
आशुतोष गर्ग ने शाक्टी-मरौड़ के लोगों का कोरोना वैक्सीन की पहली डोज लगवाने के लिए आभार जताया। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि जैसे ही पहली डोज को 84 दिन की अवधि पूरी होती है, तुरंत से दूसरी डोज लगवाएं। उन्होंने कहा कि जो लोग निजी कार्यों से बंजार की ओर जाते हैं, वे बंजार में दूसरी डोज 30 नवम्बर से पहले लगवा लें और शेष लोगों के लिए वैक्सीन गांव में घर-द्वार पर पहुंचाने के लिए जिला प्रशासन पुनः व्यवस्था करेगा। अधीक्षण अभियंता विद्युत संजय कौशल, वन मण्डलाधिकारी बंजार, परियोजना अधिकारी डीआरडीए सुरजीत ठाकुर, लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता नीरज शर्मा, खण्ड विकास अधिकारी बंजार के अलावा शिमला से हिमऊर्जा विभाग के विनीत सूद व अन्य अधिकारी, बिजली विभाग के सहायक अभियंता, कनिष्ठ अभियंता, लाईनमैन उपायुक्त के साथ मौजूद रहे। इनके अलावा स्थानीय ग्राम पंचायत के प्रधान, पंचायत समिति के सदस्य, वार्ड मैम्बर व गांवों के अन्य लोग भी उपायुक्त के साथ रहे।

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