हिमाचली लेखक जयदेव विद्रोही की कहानी यथार्थ से रूबरू पर आधारित नाट्य बेचारा बाँकू का किया सफल मंचन  

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सुरभि न्यूज़ कुल्लू। रंगमंच में सक्रिय कुल्लू स्थित संस्था ऐक्टिव मोनाल कल्चरल ऐसोसिएशन ने कुछ महीनों के विराम के बाद एक बार फिर से एकल अभिनय के माध्यम से कहानियों की प्रस्तुतियों की श्रृंखला संस्था के टिकरा बावली स्थित ऐक्टिंग स्टुडियो में आरम्भ कर दी है। इसकी पहली कड़ी में रविवार को हिमाचली लेखक जयदेव विद्रोही की कहानी यथार्थ से रूबरू पर आधारित नाट्य पस्तुति बेचारा बाँकू सीमित दर्शकों के लिए आफलाइन तथा अधिक दर्शकों के लिए संस्था के फेसबुक पेज पर आनलाइन सफलतापूर्वक प्रस्तुत की गई। केहर सिंह ठाकुर के निर्देशन में संस्था के कलाकार रेवत राम विक्की ने इसे अपने सधे हुए अभिनय से सजाया। कहानी एक पेंटर बांकू की है जो बेहद गरीब है और बेनर बनाता है। चुनाब आते हैं तो एक नेता उसे बहुत से बेनर बनाने को ठेका देता है और कहता है कि पैसे चुनाब के बाद इक्ट्ठे मिल जाएंगे।

बांकू भी खुश होता है, सोचता है कि पैसे इक्ट्ठे मिल जाएंगे तो मेरी सारी गरीबी मिट जाएगी। इसके लिए बांकू कपड़ा बगैरा बाज़ार से उधार भी लेता है लेकिन जब चुनाब होते हैं और वह नेता जीत भी जाता है पर पैसे लेने लिए उसे नेता और उसके चमचों के चक्कर काटने पड़ते हैं। नेता अब मंत्री भी बन चुका होता है और बांकू को उस तक पहुंचने ही नहीं दिया जाता। एक दिन वह भूखा प्यासा क्लब हाॅउस में पहुंच जाता है जहाँ नेता जी कुछ अफसरों और ठेकेदार साथियों के साथ जाम छलका रहे थे। जैसे कैसे वह अंदर पहुँचता है तो एक आदमी उसे धक्का मारता है और बेचारा कई दिनों का भूखा बांकू लड़खड़ाते हुए नेता जी के चरणों में गिर पड़ता है और नेता जी का जाम का गिलास गिर जाता है। नेता जी उसे खूब डांटते हैं कि ‘बांकू शराब पीकर यह खर मस्ती मुझ से ही करनी थी’। बांकू कहता है कि हुजूर मैंने शराब नहीं पी है मैं तो आप से बेनर के पैसे मांगने आया हूं। मैंने कई दिनों से खाना नहीं खाया है और घर पर भी राशन नहीं है। इतने में एक ठेकदार सौ का नोट बांकू पर फेंकता है और कहता है कि पता नहीं कहाँ कहाँ से चले आते हैं। मंत्री जी आप भी कैसे कैसे भिखमंगों से संपर्क रखते हैं’। इससे आगे कि बांकू या ठेकेदार और कुछ कहते नेता  बांकू को पुलिस के हवाले कर देते हैं। सुबह जब बांकू को होश आता है तो वह घर पर चारपाई पर पड़ा था माँ बाप और बीबी चुपचाप और रसोई में खाली पतीलियां थी। दरवाज़े पर खटखटाहट हुई तो दजरवाज़ा खोलते ही सामने लाल रंग का बही खाता लिए बनियां खड़ा था। प्रस्तुति की वस्त्र व आलोक परिकल्पना मीनाक्षी की और आनलाईन स्ट्रीमिंग का कार्य वैभव ठाकुर ने किया। इस कड़ी में अगली प्रस्तुति डाॅ देवकन्या ठाकुर की चर्चित कहानी मोहरा की होगी।

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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