हिमाचली संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन के लिए हिमाचली प्रसिद्ध लोक गायक इंद्रजीत का रहा है बहुत बड़ा योगदान

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सुरभि न्यूज़ (निखिल कौशल) कुल्लू। हिमाचली संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन और हिमाचली संस्कृति को देश-विदेश में लाने में हिमाचली प्रसिद्ध युवा लोक गायक इंद्रजीत का बहुत बड़ा योगदान है। कुल्लू के पांरपारिक लोक गीतों और यहां के पुरातन परिधानों को देsश-विदेश में पहचाान दिलाने में अहम भूमिका रही है। हिमाचल की संस्कृति को यूट्यूब पर चार चांद लगाने वाले युवा लोक गायक इंद्रजीत को हिमाचली लोक गायक, अभिनेता, गीतकार और संगीतकार के रूप में भी जाना जाता है। इंद्रजीत का जन्म 12 मार्च 1992 को पिता नोखु राम व माता लीला देवी के घर कुल्लू जिला के लगधाटी के दुर्गम गांव डोघरी में हुआ। इंद्रजीत  के एक बडा भाई व एक छोटी बहन है। बचपन गांव के माहौल में लोक संस्कृति में गुजरा जहां साल भर मेले, त्यौहार, विवाह व अन्य समारोह होते रहते है जिससे उन्हें बचपन से ही गाने गाने का शौक रहा है। उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा  सीनियर सेकेंडरी स्कूल शालंग से की और गीत संगीत में अपने करियर की शुरुआत 2010 में वीडियो एल्बम दिल का क्या कसूर से की जो लोगों को बहुत पसंद आई। उसके बाद इंद्रजीत ने 2012 में अपना दूसरा एल्बम दिल परदेसी हो गया रिलीज़ किया जिसे लोगों ने खूब पसंद किया। इस एलबम से उन्हें काफी पहचान मिली। कुछ व्यक्तिगत कारणों से इंद्रजीत की अच्छी पहचान होने के बावजूद गायन के क्षेत्र में करियर बनाने का कोई रास्ता नहीं था। इंद्रजीत मध्यम वर्गीय परिवार से होने के कारण आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण गायन क्षेत्र में करियर बनाने में बडी मेहनत करनी पड़ी। इस स्थिति में इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए किसी ने भी साथ नहीं दिया। परन्तु उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी मंजिल को पाने के लिए संघर्ष करते रहे। हिमाचल प्रदेश में गायन के क्षेत्र में करियर बनाना बहुत मुश्किल था क्योंकि हिमाचल में हर दौ किमी के बाद भाषा बदल जाती है। उस समय हिमाचल प्रदेश में हिमाचली गानों का चलन खत्म हो गया था। कोई भी हिमाचली गाने सुनना और देखना नहीं चाहता था। क्योंकि वीडियो पर आधुनिकता पर कोई काम नहीं कर रहा था। कोई भी कलाकार जोखिम नहीं उठाना चाहता था क्योंकि हिमाचली गीतों में आय का स्रोत बहुत कम थे। इंद्रजीत हमेशा अपनी विशिष्ट हिमाचली लोक संस्कृति के प्रति समर्पित थे। वह अपनी हिमाचली लोक संस्कृति पर ऊंचे स्तर पर काम करना चाहते थे और हिमाचली लोक गीतो व संस्कृति को देश-विदेश में अलग पहचान दिलाना चाहते थे। यह काम इतना आसान नहीं था लेकिन इंद्रजीत ने हार नहीं मानी और उन्होंने सोच लिय था कि मंजिल मिले या न मिले वह अपनी हिमाचली लोक संस्कृति को एक पहचान दिलाकर ही दम लेगें। लोक गायक इंद्रजीत ने बताया कि तीन साल का ब्रेक लेने के बाद उन्होंने अपना व्यवसाय स्थापित किया और कुल्लू के पांरपरिक गाने बनाने लगे। उन्होंने आई सुर स्टूडियो के निदेशक सुरेश सूर से मिलकर ठेठ हिमाचली लोक संस्कृति पर काम करना शुरू किया। कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा लेकिन इंद्रजीत ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वह ज्यादातर अपने वीडियो में हिमाचली लोक संस्कृति को दर्शकों दिखाते रहे। वह अपने लोक गीतों के एलबम में पुस्तैनी घर, रीति-रिवाज, खूबसूरत जगहें, हिमाचल के हार-सिंगार, लोक पहनावे में कपड़े, कुल्वी टोपी, ऊनी कोट तथा पुराने जमाने के कपड़े दर्षकों को दर्षाते रहे। उन्होंने अपने वीडियो में गांव के लोगों को पांरपारिक वेषभूषा में शामिल किया। उन्होंने देश-विदेश में कुल्वी टोपी की पहचान बनाने के लिए  विभिन्न प्रकार की हिमाचली टोपियां डिजाइन की गईं और उन्हें अपनी एलबम में प्रदर्षित किया। इंद्रजीत ने हिमाचली लोक गीतों को संपादित कर उन्हे अपनी एलबम प्रदर्षित करने लगे और उन्होंने यह सिलसिला बरकरार रखा। धीरे-धीरे इंद्रजीत ने एक के बाद एक गाने बनाना शुरू किये। लोगं  उन्हके लोक गीतों को खूब पसंद करने लगे और लोक गीत यूट्यूब ट्रेंड में आने लगे। उनके लोक गीतों को देख कर यूट्यूब पर लाखों व्यूज मिलने लगे। उन्होंने बताया कि लाडी शाउँनी लोक गीत में अभी तक 11 मिलियन मिलियन व्यूज मिल चुके हैं। जिन लोगों को हिमाचली गाने देखना पसंद नहीं था, उन्हें अब इंदरजीत के नए गाने रिलीज होने का बेसब्री से इंतजार रहनेे लगा। इंद्रजीत के लोक गीतों को देश-विदेश में देखने और सुने जाने लगा जो इंद्रजीत के लिए गायन क्षेेत्र में बहुत बड़ी उपलब्धि थी। इंद्रजीत ने हिमाचली लोगों गीतों के माध्यम से गानों का चलन बदल दिया और लोग उन्हके लोक गीतों के कायल हो गए। वह अपने लोक गीतों के माध्यम से समाज को कई प्रेरणा दायक संदेश देते रहते हैं। अब तक लोक गीतों के लगभग 50 एलबम यूट्यूब में आ चूके है और हाल ही में जुवा री डाली लोक गीत रिलीज हुआ है जिसे दर्षको ने बेहद पसंद किया है। लोक गायक इंद्रजीत अब युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हैं और लाखों दिलों की धड़कन में राज करते हैं। लोक गायक इंद्रजीत को कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है जिनमें दिव्य हिमाचल समाचार पत्र द्वारा उत्कृष्टता पुरस्कार 2017 में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश धर्म चंद चैधरी द्वारा सम्मानित किया है। उन्हे बेस्ट लोक गायक, साल का बेस्ट लोक गायक, संस्कृति को बढ़ावा देने वाला, बेस्ट अचीवर तथा और हिमाचल कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर द्वारा 2021 में हिमाचली लोक सितारा पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होने अपने संदेष कहा कि हम आधुनिकता की दौड़ अपनी लोक संस्कृति तथा संस्कारों को भुलते जा रहे है। हमें देव संस्कृति का पालन करते हुए लोक संस्कृति तथा संस्कारों के संरक्षण व संवर्धन के लिए आगे आना चाहिए।

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