बिलासपुर की लोक कलाओं व लोक संस्कृति का किया जाएगा संवर्धन – सुरेन्द्र सिंह मिन्हास 

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सुरभि न्यूज़ बिलासपुर। बिलासपुर हिम कल्याण लोक कला मंच बिलासपुर की मासिक संगोष्ठी का आयोजन काले बाबा कुटिया  हनुमान टिल्ला दनोह के प्रांगण में किया गया। सर्वप्रथम सभी सदस्यों द्वारा काले बाबा कल्याण दास के पावन चरणों में पुष्प अर्पित किए । कार्यक्रम में दर्शकों के लिए पुुरातन वस्तुओं की प्रदर्शनी का आयोजन भी किया। संगोष्ठी का आयोजन दो सत्रों में किया । प्रथम सत्र की अध्यक्षता मंच के अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह मिन्हास ने की उन्होंने मंच के सभी सदस्यों का संगोष्ठी में पधारने पर स्वागत किया व कहा कि बिलासपुर की लोक कलाओं व लोक संस्कृति का संवर्धन करना मंच का ध्येय है साथ ही उन्होंने मंच की गतिविधियों के बारे में भी जानकारी दी जिसमें निम्नलिखित प्रस्तावों के ऊपर चर्चा की व निर्णय लिया कि सभी सदस्य मंच की गतिविधियों को गम्भीरता से लें, छ: बैठको के बाद मंच में बैठकों का पुनर्मूल्यांकन करके नई कार्यकारिणी का गठन किया जाएगा, हास्य काव्य लेेखन के बारे में भी चर्चा की  और भविष्य में हास्य कविताओं के लेेखन और व्यंग्य पर भी जोर देने के बारे में ध्यान केंद्रित करने पर विचार किया, संस्था के पंजीकरण बारे पंजीकरण उपसमिति ने ब्यौरा मंच पर रखा बैठक में उपसमिति से अनुरोध किया कि पंजीकरण की औपचारिकताएं पूरी करके मंच को अवगत करावाया जाएं, संस्था द्वारा हैड न्यूज़ हिमाचल समाचार पत्र बारे चर्चा की  और एडिटोरियल बोर्ड से समाचार पत्र को चलाने बारे जो भी खर्चा आएगा वह भी सदस्यों के सहयोग से सुचारू रूप से तय किया जाएगा, समाज सेवी व संस्कृत के आचार्य जगदीश सहोता को  दलित उत्थान के लिए संस्था के द्वारा काले बाबा श्रेष्ठ  दलित उत्थान सम्मान् 2022 से सम्मानित किया। द्वितीय सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन किया जिसकी अध्यक्षता कविता सिसोदिया ने की उन्होंने संगोष्ठी में भाग लेने वाले कवियों, कवयित्रियों को शुभकामनाएं दी। मंच संचालन रविन्द्र चंदेल कमल ने किया। सर्वप्रथम तृप्ता देवी ने नौकरी का सफ़र आख़िरी सलाम हो चला आखिरी कलाम हो चला, वीना वर्धन ने जब तक सांस है जीवन की गाड़ी चलाएंगे ऐसे ही थोड़ा मर जाएंगे, आचार्य जगदीश सहोता ने नाम जपया कर परमात्मा दा इत्थे कि तेरा कि मेरा, सुरेन्द्र सिंह मिन्हास ने खू कविता में सुनाया स्याणे ऐ ग्लांदे म्हारे, नोटा रे खू खाल्ली हुन्दे देख्खे, कांगड़े रा भूकंप देख्खया मरदे माणु ज्हारा बी देख्खे, राजपूत देवेन्द्र ठाकुर ने संगमरमर की मीनारों में परियों के घोंसले कहां बना करते हैं चलते बाजारों में सुकून भरे एहसास कहां मिलते हैं, रविन्द्र चंदेल कमल ने अम्मा पगवाना रा दूजा रूप ममता रही ईक्क प्यारी मूरत, बालकां री प्यारी अम्मा सबणी रा रखदी ख्याल, कविता सिसोदिया ने सुनसान सी अकेली सी , पगडंडियां ये होती धुंधली सी कभी भूले भटकते पड़ते इन पर पांव तो भूली बिसरी यादों में मन खो जायें, जगदीश शर्मा, गौरव, पंचम कुमार, विकास शर्मा, गायत्री देवी, अशोक चौधरी, ओंकार सिंह, रंजना देवी, मीनू कुमारी, मनीष कुमार, लेखराम बंसल, सुख राम, जीवन देई, निर्मला धीमान ने गोष्ठी में अपने विचार व्यक्त किए। अंत में राजपूत देवेन्द्र ठाकुर ने कार्यक्रम में शामिल सभी साहित्यकारों / कवियों  का आभार व्यक्त किया।

 

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