शिक्षा में वो शक्ति है जो राष्ट्र को बदल सकती है-गोविंद ठाकुर

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सुरभि न्यूज़ कुल्लू। अटल सदन कुल्लू के सभागार में समग्र शिक्षा अभियान के तहत जिला स्तरीय सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रम शिक्षा व कला, भाषा एवं संस्कृति मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। गोविंद ठाकुर ने संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा में वो शक्ति है जो किसी भी राष्ट्र में बदलाव ला सकती है। इसलिये जरूरी है कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति अच्छी से अच्छी शिक्षा ग्रहण करके अपना वह समाज का अच्छा निर्माण कर सकें। समाज में परिवर्तन लाने के लिये जरूरी है कि सबसे पहले अपने आप में परिवर्त लाया जाए। उन्होंने कहा कि अध्यापन कार्य से जुडें़ लोगों को ईश्वर ने विशेष कृपा की है इसलिये अध्यापन कार्य के लिये शिक्षण संस्थानों में तथा समाज में एक सकारात्मक माहौल का निर्माण किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दशकों से हमारी शिक्षा पद्वति में खामियां थी। व्यक्ति को स्वार्थी बनाने का काम भी त्रुटिपूर्ण शिक्षा का ही नतीजा है। उन्होंने कहा कि समाज को मजबूत बनाना है तो व्यक्ति को निजी योगदान का आंकलन करना होगा। समाज में डिमाण्डिग होने की प्रवृति को रोकना होगा और कर्तव्यों के प्रति सजग बनाना होगा।

उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों से बहुत से बच्चे समाज में उच्च पदों पर आसीन हुए हैं, लेकिन अभिभावकों व बच्चों में इन स्कूलों के प्रति सोच की खाई को पाटने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मुख्य उद्देश्य भारतीय शिक्षा प्रणाली को बेहतर बनाना है और विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास करना है। इस नीति में 10 $ 2 का फार्मुला समाप्त करके  5 $ 3 $ 3 $ 4 का फार्मूला दिया गया है। न्यू एजुकेशन पॉलिसी को तैयार करने के दौरान हर छोटी-छोटी बातों को ध्यान में रखा गया है। नए नियम के लाभ और नुकसान पर चर्चा की गई है। इसे तैयार किया जाने के दौरान गांवों और छोटे कस्बों पर भी मुख्य जोर दिया गया है।

नई शिक्षा नीति समाज में बड़ा बदलाव लाने में कारगर साबित होगी। विद्यार्थियों का बोझ इसमें कम करने पर जोर दिया गया है। नये फार्मूले की बात करें तो इसके अंतर्गत 5 में से पहले 3 वर्ष खेलकूद व बाकी 2 वर्ष पहली व दूसरी कक्षा से संबंधित है। अगले 3 वर्ष पांचवी तक फिर अगले 3 वर्ष आठवीं तक और अगले 4 वर्ष आठवीं से बारहवीं तक संबंधित है। विद्यार्थियों के लिए अब दसवीं कक्षा पश्चात चुनी जाने वाली स्ट्रीम को खत्म कर दिया गया है। अब आने वाले समय से छात्र अपना मनपसंद विषय चुन सकते हैं और अपने अनुसार उन विषयों का चुनाव कर सकते हैं जिन्हें वे पढ़ना पसंद करते हो। कॉलेज स्तर पर स्नातक प्रणाली में बड़ा बदलाव किया गया है। अब हर साल का अलग-अलग प्रमाण पत्र छात्रों को दिया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने इस अवसर पर उत्कृष्ट आंकी गई स्कूल प्रबंधन समितियों के अलावा स्वयं सेवी संस्थाओं, स्कूली बच्चों व अध्यापकों को पुरस्कार भी वितरित किये।

इससे पूर्व उन्होंने शिक्षा से जुड़ी प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। डाईट के प्रशिक्षुओं ने इस अवसर पर नुक्कड़, नाटक, गिद्दा तथा मारूणी नृत्य जैसी शानदार प्रस्तुतियों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उप निदेशक प्रारम्भिक शिक्षा सुरजीत राव ने स्वागत किया तथा समग्र शिक्षा के उद्देश्यों की जानकारी दी। उपनिदेशक उच्च शिक्षा शांति लाल शर्मा, उपनिदेशक निरीक्षण महेन्द्र ठाकुर, अरूण कम्बोज, नयना कम्बोज, श्याम कुल्लवी, जिला के विभिन्न भागों से एसएमसी प्रतिनिधि, प्रधानाचार्य, बीआरसी, अध्यापकगण तथा छात्र-छात्राएं कार्यक्रम में मौजूद रहे। शिक्षा मंत्री ने जिला स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिये  पाठशालायों, संस्थायों, अधयापकों व छात्रों को सम्मानित किया।

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