हास्य व्यंग्य नाटक एक था गधा उर्फ अलादाद खां से 13 दिवसीय हिमाचल नाट्य महोत्सव का किया आगाज़

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सुरभि न्यूज़

कुल्लू

ऐक्टिव मोनाल कल्चरल ऐसोसिएशन कुल्लू द्वारा भाषा एवं संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश एवं हिमाचल कला भाषा एवं संस्कृति अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में कलाकेन्द्र कुल्लू में आयोजित किए जा रहे 13 दिवसीय हिमाचल नाट्य महोत्सव का आगाज़ हास्य व्यंग्य से भरपूर नाटक एक था गधा उर्फ अलादाद खां से हुआ। ऐक्टिव मोनाल कुल्लू के कलाकारों ने शरद जोशी द्वारा लिखित व केहर सिंह ठाकुर द्वारा निर्देशित इस नाट्य प्रस्तुति से उपस्थित दर्शकों को हंसा हंसा कर लोट पोट कर दिया। व्यवस्था पर चोट करते इस नाटक की कहानी एक ऐसे नबाव से शुरू होती है जो हर जगह अपनी ही तारीफ चाहता है कि जनता उसकी ही तारीफ करती रहे।

इसीलिए वह एक गरीब अलादाद खां के जनाज़े में शरीक होने की घोषणा करता है और सारे मीडिया को भी शब यात्रा की लाईव कबरेज के लिए आमंत्रित करता है। ऐन मौके पर पता चलता है कि अलादाद नाम का कोई आदमी नहीं मरा है बल्कि अलादाद एक धोबी के गधे का नाम था जो मर गया। शहर कोतवाल को कहीं से यह गलत खबर मिली थी और उसने नबाव साहब तक पहुंचाई थी। अन्ततः नबाव, उसके चिन्तक और कोतवाल अपनी इज़्ज़त बचाने के लिए एक गरीब साधारण ईमानदार आदमी अलादाद खां को पकड़ कर मार देते हैं और उसका जनाज़ा निकालते हैं। नबाव के रूप में केहर और चिन्तकों के रूप में आरती ठाकुर और रेवत राम विक्की ने अपने मंझे हुए अभिनय से दर्शकों को पहले खूब हंसाया और नाटक के अंतिम भाग में स्तब्ध कर दिया।

जबकि कोतवाल और उसकी प्रेमिका रामकली के रूप में वेद प्रकाश और तमन्ना ने दर्शकों का खूब मनोरंजन किया। गधे के मालिक धोबी जुग्गन की भूमिका में श्याम लाल ने भी दर्शकों को खूब हंसाया। सूत्रधार के रूप में कल्पना ने, देवीलाल पान वाले के रूप में सूरज ने, लफंगे युवा के रूप में गौरव ने जिसने कोतवाल को मज़ाक में कह दिया था कि अलादाद खां साहब मर गए, दर्ज़ी के रूप में पूजा ने और नागरिक रूप में लक्ष्मी ने अपने किरदारों को बखूबी अंजाम दिया। पार्ष्व ध्वनि संचालन वैभव ठाकुर और वस्त्र परिकल्पना और आलोक परिकल्पना मीनाक्षी की रही जब कि मेक अप का कार्य आरती ठाकुर, रेवत राम विक्की व मीनाक्षी ने संयुक्त रूप से किया।

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