अंग्रेजों के जमाने में बना ऐतिहासिक विश्राम गृह  बहा रहा अपनी बदहाली के आंसू 

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सुरभि न्यूज़ (परस राम भारती) गुशैनी बंजार। जिला कुल्लू उपमंडल बंजार की तीर्थन घाटी के बठाहड़ में अंग्रेजों के जमाने का बना ऐतिहासिक विश्राम गृह अपने अस्तित्व की जंग लड़ रहा है। यह विश्राम गृह वर्षों से शासन प्रशासन की अनदेखी का शिकार बना हुआ है। आलम यह है कि मौजूदा हालात में इस विश्राम गृह की दीवारों में से मिट्टी भरभरा कर गिर रही है और लकड़ियों में भी सड़न शुरू हो गई है तथा इसके सीवरेज टैंक भी क्षतिग्रस्त हो चुके है। बठाहड़ स्थित इस विश्राम गृह की वाहरी और भीतरी दीवारें अपनी बदहाली की कहानी खुद बयां करती हैं। इस विश्राम गृह का एक कमरा जैसे कवाड़ का भंडार दिखता है, वहीं दूसरा कमरा टूटे-फूटेे फर्नीचर का स्टोर लगता है। गंदे शौचालयों और गंदे विस्तरों को देख कर कोई भी यहां रुकना नहीं चाहेगा। पर्यटक यहां पर आते तो है पर फोटो खींच कर चल देते है। कोई भी यहां रुकने की जहमत नहीं उठाता है। विश्राम गृह का यह भवन रखरखाव और मुरमत के विना बदहाल स्थिती में अपनी आखिरी सांसे गिनता प्रतीत हो रहा है। बठाहड़ स्थित दो कमरों वाले लोक निर्माण विभाग के इस विश्राम गृह में एक भी कमरा ठहरने लायक नहीं दिखता। विश्राम गृह की भीतरी और वाहरी दीवारों को देख कर लगता है कि यदि इसे बक्त रहते नहीं सुधारा गया तो एक दिन यह ऐतिहासिक विश्राम गृह नेस्तनावूद हो जाएगा।

गौरतलब है कि यह विश्राम गृह अंग्रेजों के जमाने में बनाया गया था। कभी शिकार के शौकीन अग्रेजों नें बशलेऊ के उस पार सराहन और इनर सराज के बठाहड़ में विश्राम गृह का निर्माण किया था। अतिसुंदर प्राकृतिक नजारों से घिरा हुआ यह विश्राम गृह कई अंग्रेज अधिकारियों, देश विदेश के सैलानियों और अनुसंधानकर्ताओं के कदमों का गवाह रहा है। यही नहीं आठवें दशक में ग्रेट हिमालयन नैशनल पार्क की परिकल्पना को साकार करने और खोजने वाले वन्यप्राणी विशेषज्ञ डा गाटसन और गारसन ने भी इस परियोजना का खाका यहीं रह कर खींचा था। जैसे जैसे घाटी में पयर्टकों की आवक बढ़ रही है वैसे वैसे यह ऐतिहासिक विश्रामगृह आखिरी सांसे गिनता दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कभी यह विश्राम गृह बहुत खूबसूरत दिखता था लेकिन विभाग की अनदेखी और उपेक्षा के चलते यह बदहाल हो गया है। हालांकि यहां बिजली की नई फिंटिंग की जा रही है और दिन रात के लिए दो कर्मचारी भी नियुक्त है फिर भी इसकी खस्ताहाल स्थिती को देखते हुए इसके सरंक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता है।

लोगों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि इस विश्राम गृह की पुरानी इमारत को उखाड़ कर यहां पर एक नए आलीशान विश्राम गृह का निर्माण किया जाना चाहिए और इसके लिए शीघ्र ही बजट का प्रावधान किया जाए। वरिष्ठ पत्रकार एवं पर्यावरण प्रेमी दौलत भारती का कहना है कि घाटी में पर्यटकों की बढ़ती आमद को देखते हुए बंजार क्षेत्र के सभी सरकारी विश्राम गृहों की दशा सुधारी जानी आवश्यक है। सरकार पर्यटन के क्षेत्र में करोड़ों रुपए खर्च कर रही है लेकिन विश्राम गृहों के संरक्षण एवं संवर्धन की ओर कोई भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इन्होंने कहा कि बंजार क्षेत्र के सभी विश्राम गृह पर्यटन का एक अच्छा विकल्प बन सकते है जिससे सरकार को अच्छी आमदानी हासिल हो सकती है। तुंग वार्ड की पंचायत समिति सदस्य कमला देवी ने कहा कि विश्राम गृह सरकारी संपत्ति का इस कदर दुरुपयोग होना दुर्भाग्यपूर्ण है। इन्होंने कहा कि यह समुची घाटी की प्रथम सरकारी संपत्ति तथा धरोहर इमारत है जिसका जीर्णोद्वार या पुनर्निर्माण होना जरुरी है ताकि इसका सदुपयोग हो सके। ग्राम पंचायत तुंग के प्रधान घनशयाम सिंह का कहना है इस विश्राम गृह का भवन काफी क्षतिग्रस्त हो चुका है। लोगों की मांग है कि इस भवन को उखाड़ कर यहां पर एक नए आलीशान विश्राम गृह का निर्माण किया जाए। इन्होंने कहा कि इस बारे में ग्राम पंचायत की ओर से पत्राचार किया जाएगा और शीघ्र ही लोग इस सम्बंध में लोक निर्माण विभाग के उच्चाधिकारियों और विधायक सुरेन्द्र शौरी से मिलेंगे। लोक निर्माण विभाग उपमंडल बंजार के सहायक अभियंता रोशन लाल ठाकुर ने बताया कि फिलहाल इस विश्राम गृह की मुरम्मत की जा रही है जिसका कार्य चालू है। इस विश्राम गृह को नए सिरे से बनाने के लिए अभी तक बजट का कोई भी प्रावधान नहीं है।

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