सुरभि न्यूज़
खुशी राम ठाकुर, बरोट
प्रदेश भर के सभी क्षेत्रों सहित छोटाभंगाल तथा चौहार घाटी में गत लगभग चार माह से बारिश न होने से किसान अपने-अपने आराध्य देवी-देवताओं की शरण में जाकर बारिश होने की गुहार लगा रहे है। प्रतिदिन वर्षा के लिए इन्द्र देव से प्रार्थना कर बारिश की गुहार रहे हैं, मगर आराध्य देवी-देवता उनकी न तो गुहार सुन रहे हैं और न ही इंद्र देव उनपर मेहरवान हो रहे हैं। वर्षा के लिए मंगलवार को छोटाभंगाल घाटी के बड़ा ग्रां, कोठी कोहड़, धरमाण तथा मुल्थान पंचायतों के चार-चार चुनिंदा लोग सयुंक्त रूप से घाटी के चैना नामक स्थान में वर्षा की देवी सतवादनी की शरण में गुहार लगाने के लिए मंदिर के पुजारी प्रीतम चंद के पास पहुंचे।
माता के पुजारी सुरजीत सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि माता के मंदिर को किसी व्यक्ति अपवित्र कर दिया है और क्षेत्र में बुरी आत्माओं का वर्चस्व अधिक बढ़ गया है जिस कारण माता पूरी तरह से नाराज़ हो गई है। उन्होंने कहा कि घाटी में अवश्य ही बहुत जल्द बारिश होगी मगर इसके लिए हम सभी को सबसे पहले एक जुट होकर माता के मंदिर में की गई अपवित्रता को दूर करने के साथ अन्य सभी बुराइयों को दूर करना पड़ेगा।
मंदिर में पहुंचे विभिन्न पंचायतों के लोगों ने पुजारी की बात को सही मानते हुए माता सतवादनी मंदिर की शुद्धि करने तथा अन्य बुराइयों को दूर करने की हामी भरी है। घाटियों के बिधू राम, चमन लाल, जसवंत सिंह, जगवीर सिंह, सुरजीत सिंह, रत्तन चंद तथा अजीत सिंह किसानों का कहना है कि उन्हें लोहड़ी पर्व के आसपास बारिश होने की पूरी उम्मीद थी मगर उनकी आस पूरी नहीं हो सकी। मगर अब 26 जनवरी को बारिश होने की पूरी उम्मीद बनी हुई है। उनका कहना है कि बारिश न होने के कारण सूखे के हालात बनने के कारण किसानों की फसलें सुखने की कगार पर आ गई है।
बारिश तथा हिमपात न होने कारण ऊहल व लंबाडग नदियों का जलस्तर बहुत कम हो गया है तथा पानी के प्राकृतिक जल स्त्रोत भी सुखाने की कगार पर हैं। सर्दी के मौसम के पौष तथा माघ माह में बारिश तथा हिमपात होना बेहद जरूरी रहता है क्योंकि इन दोनों माह में वर्षा व हिमपात फसलों के लिए संजीवनी होता है। इन माह में होने वाले हिमपात से ऊंची-ऊंची पर्वतमालाओं में बर्फ के ढेर कई माह तक जमें रहने से प्राकृतिक जल स्त्रोतों में पानी की कमी नहीं रहती है।








