सुरभि न्यूज़ ब्यूरो
कुल्लू
स्थानीय संस्था ऐक्टिव मोनाल कल्चरल ऐसोसिएशन कुल्लू द्वारा भाषा एवं संस्कृति विभाग कुल्लू के संयुक्त तत्वावधान मे आयोजित किए जा रहे नाटकों के राज्य स्तरीय ‘हिमाचल नाट्य महोत्सव’ का आग़ाज़ भुन्तर स्थित नाट्य संस्था नाट्यश्रेष्ट के नाटक दुविधा के कुशल
मंचन से किया गया।
भारी संख्या में दर्शकों ने अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई और नाटक का भरपूर आनंद लिया। विजयदान देथा की कहानी पर आधारित इस नाटक का निर्देशन रेवत राम विक्की ने किया।
नाटक की कहानी में एक व्यापारी के बेटे की शादी होती है। जब बारात वापिस जा रही होती है तो एक जगह एक पेड़ के पास आराम करने रूक जाते हैं। उस पेड़ पर एक भूत का निवास होता है। भूत जब दुल्हन को देखता है तो वह उसके प्यार में पड़ जाता है। अगले ही दिन व्यापारी अपने बेटे को व्यापार के लिए भेजता है जिसकी कल ही शादी हुई है। जब दुल्हा उसी पेड़ के पास से गज़रता है तो भूत उसे देखकर हैरान हो जाता है कि कल ही तो इसकी शादी हुई थी और आज ही यह कहाँ चल दिया। भूत रूप बदल कर उससे पूछता है तो दुल्हा उसे बताता है कि अगले सात सालों तक इतना अच्छा शुभ मुहूर्त व्यापार के लिए नहीं आएगा इसलिए जा रहा हूँ। भूत को एक युक्ति सूझीती है और वह दुल्हे का रूप धरकर हवेली जाता है और व्यापारी से कहता है कि उसे एक महात्मा ने वरदान दिया है कि रोज़ सुबह उठते ही उसे पांच सोने की मुहरें मिलेंगी। व्यापारी सुनकर खुश होता है और उस भूत को जो उसके बेटे का रूप धर कर आया है उसे बेटा समझ कर घर पर ही बैठने के लिए कहता है। वह उस नई नवेली दुल्हन के प्यार में इस कदर डूब गया था कि उसे सब सच बता देता है। लेकिन चार साल बाद असली दुल्हे को पता चलता है कि उसके घर पर उसका रूप धर कर कोई रह रहा है। अब जब वह वापिस आता है तो आपस में कौन असली कौन नकली का झगड़ा आरम्भ हो जाता है। अन्त में सभी फैसला करते हैं कि इन दोनों को राजा के पास ले जाएंगे और वही फैसला करेंगे कि कौन असली और कौन नकली है। परन्तु रास्ते में उन्हें एक गडरिया मिलता है जो अपनी चालाकी से असली भूत को अपनी मशक में बन्द कर देता है।
नाटक में शिवांगी, अंचल, ईशा, पायल, हंसराज, दिनेश, रितिक, नितिन, देशराज, वंशिका, भास्कर, दीपांशु, सिमरन, जानवी, सूरज, दिनेश कुमार, परमानन्द, ममता, रूकमणि, आयुश, अंजना, रिंकू तथा रेवत राम विक्की कलाकारों ने उम्दा अभिनय किया। पाश्र्व ध्वनि संचालन ओजस शर्मा तथा आलोक ने दी जबकि प्रबन्धन जीवानन्द चैहान ने किया।








