सुरभि न्यूज़
नरेंद्र भारती, भंगरोटू/मंडी
हिमाचल लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित अलाइड सर्विस की प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता प्राप्त कर हिमाचल के जिला बिलासपुर के गलयाना गाँव की रहने वाली प्रियदर्शनी ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा कर एक मिसाल पेश की है। मंगलवार को अलाइड सेवा परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ। प्रियदर्शनी ने प्रथम प्रयास में ही सहायक कर एवं आबकारी अधिकारी की परीक्षा पास कर ली। प्रियदर्शिनी के पिता राकेश धर्मानी 1998 बैच के अलाइड टॉपर रह चुके हैं। वर्तमान में डिप्टी डायरेक्टर ट्रेजरी के पद पर कोष एवं लेखा मुख्यालय शिमला में कार्यरत हैं। प्रियदर्शनी को इनका भी प्रशासनिक सेवाओं में मार्गदर्शन रहा और बेटी ने सफलता हासिल की।
प्रारंभिक शिक्षा हिम सर्वोदय स्कूल घुमारवीं, सेकेंडरी व सीनियर सेकेंडरी डी ए वी घुमारवीं और डी.ए.वी. बिलासपुर से की। बी.ए. ऑनर्स इकोनॉमिक्स एमसीएम कॉलेज चंडीगढ़ से करने के बाद कला स्नातकोत्तर पंजाब यूनिवर्सिटी से इकोनोमिक्स विषय में की। अभी हिमाचल प्रशासनिक सेवा परीक्षा के लिए प्रयासरत है। पिछले साल जोक्टा अकैडमी चंडीगढ़ से कोचिंग लेकर 8 से 10 घंटे पढ़ाई कर यह मुकाम हासिल किया और अलाइड सर्विसेज में सहायक कर एवं आबकारी अधिकारी के पद इनका पर चयन हुआ है। समय का प्रबंधन, निष्ठापूर्ण व योंजनाबद्ध तरीके से तैयारी उनकी सफलता का मूलमंत्र है। उनकी सफलता की कहानी एक प्रेरणा बनकर उभरी है कि मजबूत इरादे कड़ी मेहनत व आत्मविश्वास से मंजिल को जरुर हासिल किया जा सकता है।
उन्होने चंडीगढ़ जोकटा अकादमी से कोचिंग ली है और इस परीक्षा की तैयारी की और लगातार प्रयास कर रही थी आखिरकार पहले ही प्रयास में उन्होने सफलता हासिल की।वह पिछले तीन सालो से तैयारी कर रहे थी। हिमाचल प्रशासनिक सेवा परीक्षा के लिए उन्हाने विभिन्न लेखकों की पुस्तकों का गहन अध्ययन किया और तमाम राष्ट्रीय समाचार पत्रों का अध्ययन किया तथा हिमाचल से निकलने वाले दैनिक पत्रों व अन्य की काफी सहायता ली। उनके पिता ट्रेज़री में उपनिदेशक के पद पर कार्यरत है तथा उनकी माता वसुंधरा प्रख्यात लेखिका व साहित्यकार है। एक छोटी बहन व भाई है। परीक्षा की तैयारी में परिवार जनों का काफी सहयोग मिला। वह अपने माता-पिता को आदर्श मानती है।उन्होने अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार व गुरुजनों को दिया है। गुरुजनों व माता पिता के निरंतर मार्गदशर्न से ही यह मुकाम हासिल किया हैै। गुरुजनों का हमेशा आर्शिवाद मिलता रहा और हर परीक्षा में सफलता मिलती गई। अगर आापके इरादे अटल है तो कोई भी सफल होने से नहीं रोक सकता। दिन -रात पढाई करनी चाहिए तभी सफलता हासिल होती है। प्रियदर्शीनी काफी मिलनसार है और जरुरतमंदो की सहायता के लिए हर समय तत्पर रहती है। प्रियदर्शीनी बचपन से ही होनहार रही है उनकी उपलब्धी से हर हिमाचली व बिलासपुर व गलयाना के लोगों को गर्व है। उन्होने परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं को संदेश दिया कि असफलताओं से घबराएं नहीं बल्कि इससे सीख लेते हुए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करे और भगवान पर भरोसा रखें। सच्ची लगन से परीक्षा की तैयारी करोगे तो सफलता जरुर कदम चुमेगी।









