सुरभि न्यूज़
हरिपुर, कुल्लू
जवाहर लाल नेहरू महाविद्यालय में वाणिज्य विभाग के द्वारा “बौद्धिक संपदा” के विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। विभागाध्यक्ष प्रो दिनेश ने विद्यार्थियों को जीवन में बौद्धिक संपदा का महत्व बताया साथ ही उसकी आवश्यकता पर प्रकाश डाला। प्रो दिनेश ने सेमिनार के मुख्य वक्ता आलोक मिश्रा जो राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा के अधिकारी है उनका परिचय करवाया। उसके पश्चात कॉलेज प्राचार्य डॉ मनदीप शर्मा ने आज के मुख्य वक्ता आलोक मिश्रा जी का स्वागत किया।
आलोक मिश्रा ने बौद्धिक संपदा के विषय में समझाया की किसी के द्वारा विशेष रूप से बनाई गई वस्तु को आप अपने नाम से नहीं बेच सकते है यदि आपने उसका पेटेंट ले लिया हो।उन्होंने बताया 1970 से इसका आरंभ हुआ है पहले ये नहीं था।
बौद्धिक सम्पदा (Intellectual property) किसी व्यक्ति या संस्था द्वारा सृजित कोई संगीत, साहित्यिक कृति, कला, खोज, प्रतीक, नाम, चित्र, डिजाइन, कापीराइट, ट्रेडमार्क व पेटेन्ट को कहते हैं। इसके माध्यम से किसी के द्वारा बनाई गई कोई भी वस्तु विशेष को कोई अन्य व्यक्ति अपने नाम से नहीं बना या नहीं बेच सकता है।
ट्रेड मार्क के विषय में उन्होंने कहा कि मूल रूप से ट्रेडमार्क वो “ब्रांड” या “लोगो(logo)” है जिसका उपयोग आप अपने उत्पाद को अपने प्रतिस्पर्धियों(competitors) से अलग पहचान करने के लिए किया जाता है।
ट्रेडमार्क का आप पंजीकरण भी करवा सकते हैं जिसके माध्यम से आप अन्य लोगों को अपने पंजीकृत ट्रेडमार्क के उपयोग न करने के लिए प्रतिबंधित कर अपने ब्रांड या लोगो को सुरक्षित कर सकते हैं।
पटेंट एक्सव अधिकार है जो कि नए अविष्कार के लिए राज्य प्रदान करता है। अविष्कार की प्रथम पूर्ण एवम सही घोषणा करने के एवज में राज्य निश्चित अवधि के लिए पेटेंट देते हैं। राज्य(सरकार) को नए अविष्कार की जानकारी मिल जाती है व पेटेंट धारक को निश्चित अवधि के लिए एक्सव अधिकार।
अंत में वाणिज्य विभाग से प्रो मोनिका ने आलोक मिश्रा का धन्यवाद किया जिन्होंने महाविद्यालय के विद्यार्थियों को बौद्धिक संपदा और कापीराइट, ट्रेडमार्क व पेटेन्ट के विषय में जागरूक किया।









