छविन्द्र शर्मा, आनी
आनी के रानी बेहडा मेला मैदान में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन कथाबाचक व्यास ठाकुर जी महाराज भास्कर कृष्ण चंद्र शास्त्री ठाकुर भक्तों को श्रीमद्भागवत कथा का वृतान्त सुनाते हुए बताया कि जीव और ईश्वर का विशुद्ध मिलन ही रास है। शरद पूर्णिमा की रात्री में जब भगवान् ने मुरली बजाई, तब सारी गोपियाँ घर के सारे कार्य छोड़ कर भगवान् के पास आ गईं। तब भगवान् श्री कृष्ण ने लाखों गोपियों के साथ रास विहार करते हैं। जितनी गोपीयां हैं, उतने श्री कृष्ण हैं, सबके साथ रास विहार कर रहे हैं । व्यास आचार्य जी ने आगे कहा कि गोपियाँ साधारण गोपी नहीं हैं।
मर्त्य कन्या दंडकारण्य के सभी ऋषि गोपी बन कर आये हैं। भगवान् श्री कृष्ण जी के विवाह प्रसँग की चर्चा करते हुए कथा बाचक ने कहा कि जब माता रुकमणि ने भगवान् को पत्र लिखा। हे प्रभु मैं आपको जानती नहीं हूँ। मैंने आपके गुणों को सुना है और जबसे आपके गुणों को सुना हैं तबसे मैं आप की हो गई हूँ। तब भगवान् श्री कृष्ण ने रुकमणि का हरण कर के उनके साथ विवाह किया । रुकमणि विवाह के साथ कथा का विश्राम किया।अंत में श्री हरि की आरती में हजारों श्रद्धालू उपस्थित रहे। कार्यक्रम में आयोजक हेम राज शर्मा, टिकमा देवी के साथ श्यामा परिवार कुमारसैन तथा अब भक्त मौजूद रहे।










