सुरभि न्यूज़
कुल्लू, 26 अक्तूबर
लेखक से आग्रह
मैं देश का मजदूर कामगार हूँ
देश के प्रबुद्ध लेखकों से मुखातिब हूँ
कुछ पल मेरे लिए निकालो
एक कविता कहानी नाटक
ग़ज़ल नज़्म बज़्म
जो भी लिख सकते हो लिख डालो
मेरी दो वक़्त की सूखी रोटी लिखो
मेरे दिन रात की मेहनत लिखो
लिखो मेरे पसीने का समन्दर
ज्वाला दहकती सीने के अन्दर
हड्डी का ढांचा लिख दो आज
शोषण में गुजरता कल और आज
मेरा मरता हुआ भविष्य औऱ ख़ाब
लिखो कम मजदूरी ,कम खाना
कम विजली , पानी ,फटी कमीज ,टूटी खाट, टपकती छत
विना कुंडी दरवाजा, टूटी फूटी झोंपड़ी गंदा किचन,
बास मरता टॉयलेट
सब कुछ तफसील से लिखना
फटे पाँव सूखे होंठ भींचे हुए पेट
कमजोर आँखे, कांपता शरीर
वेशक लिख देना
दान में मिलने बाले कम्बल ,
राशन , दूध लेते
मेरे कांपते हुए हाथ
फल सब्जी तरकारी क्या होती
लिख नहीँ सकते
ये मेरे जीवन का हिस्सा नहीँ है
बस लिखना नहीँ कुछ तो
यह कभी मत लिखना
मेरे आत्म सम्मान का मरना
क्योंकि हर रोज़ सुबह
इसको ज़िन्दा करता हूँ
रात होते तक
सैंकड़ो। सैंकड़ो बार मारना पड़ता है
और कभी मार दिया जाता है
प्रिय लेखक वृन्द
बस थोड़ा सा वक़्त मेरे लिए रखना
इतना ध्यान रखना
मेरा आत्मसम्मान बचाए रखना ।
@ Shyam Lal Handa









