जिला लाहुल स्पीती के काजा में बिजली संशोधन विधेयक-2025 के खिलाफ बिजली कर्मचारियों द्वारा पेन एवं टूल डाउन धरना-प्रदर्शन  

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सुरभि न्यूज़

काजा, 13 फरवरी

जिला लाहुल स्पीती के काज़ा में बिजली कर्मचारियों व अभियंताओं की राष्ट्रीय समिति (NCCOEEE) के राष्ट्रीय आह्वान पर प्रदेश भर में बिजली कर्मचारी, अभियंता और आउटसोर्स कर्मचारी सामूहिक रूप से पेन डाउन एवं टूल डाउन आंदोलन पर रहे।

काजा में जॉइंट एक्शन कमेटी हिमाचल स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड के कर्मचारी, अभियंता और पेंशनर्ज ने भोजनावकाश के दौरान बिजली बोर्ड कार्यालयों के बाहर पेंशनरों और उपभोक्ताओं के साथ मिलकर बिजली बोर्ड के निजीकरण तथा प्रस्तावित बिजली संशोधन विधेयक-2025 के विरोध में धरना-प्रदर्शन किया।

प्रदर्शनकारियों ने अतिरिक्त उपायुक्त काजा के माध्यम से हिमाचल सरकार और केंद्र की भाजपा मोदी सरकार को ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि बिजली संशोधन विधेयक-2025 को तत्काल वापस लिया जाए। कर्मचारियों का आरोप है कि केंद्र सरकार इस विधेयक के जरिए बिजली कंपनियों के निजीकरण का रास्ता खोल रही है और इसे आगामी बजट सत्र में संसद में पेश किए जाने की संभावना है।

प्रतिनिधियों ने कहा कि प्रतिस्पर्धा और सशर्त व्यवस्था के नाम पर राज्य के बिजली वितरण कार्य को निजी कंपनियों को सौंपने की तैयारी की जा रही है। इससे एक राज्य में एक से अधिक वितरण कंपनियों के संचालन का प्रावधान होगा तथा क्रॉस-सब्सिडी समाप्त करने जैसे प्रावधान लागू हो सकते हैं, जिनका सीधा असर आम उपभोक्ताओं और राज्य की ऊर्जा व्यवस्था पर पड़ेगा।

कर्मचारियों ने संभावित दुष्परिणाम से अवगत करवाते हुए बताया कि निजी कंपनियां केवल लाभ वाले क्षेत्रों में काम करेंगी, जबकि घाटे वाले ग्रामीण क्षेत्रों की जिम्मेदारी सरकारी बोर्ड पर ही रहेगी।

बड़े उपभोक्ताओं को प्राथमिकता मिलने से सामान्य उपभोक्ताओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है तथा लाभकारी क्षेत्रों के निजीकरण से बिजली बोर्ड की वित्तीय स्थिति कमजोर होगी, जिससे नेटवर्क सुधार और सेवा गुणवत्ता प्रभावित होगी।

क्रॉस-सब्सिडी समाप्त होने पर घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली दरों में भारी वृद्धि की आशंका है।
निजी कंपनियां बिना निवेश के मौजूदा सरकारी नेटवर्क का उपयोग करेंगी, जिससे वितरण लागत और अंततः उपभोक्ता बिल बढ़ सकते हैं।

ऊर्जा क्षेत्र के लाभकारी हिस्से निजी हाथों में जाने से कर्मचारियों की सेवा शर्तें प्रभावित होंगी और अस्थायी कर्मचारियों की नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं। बोर्ड के राजस्व में कमी आने से लगभग 29,000 पेंशनरों की पेंशन व्यवस्था पर संकट खड़ा हो सकता है।

प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने विधेयक वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक तथा तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि यह संघर्ष केवल कर्मचारियों का नहीं बल्कि आम उपभोक्ताओं, किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के हितों की रक्षा का आंदोलन है।साभार 

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