साहित्य : अखिल भारतीय साहित्य परिषद के 17वें राष्ट्रीय अधिवेशन में मध्य प्रदेश के रीवा में जुटे देशभर के साहित्यकार

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सुरभि न्यूज़

रीवा (मध्य प्रदेश)

भारतीय भाषाओं के देशव्यापी संगठन अखिल भारतीय साहित्य परिषद का 17वां राष्ट्रीय अधिवेशन मध्य प्रदेश के रीवा में हो रहा है। तीन दिवसीय अधिवेशन का शुभारंभ 7 नवम्बर को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा किया गया।

इस दौरान मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल भी मौजूद रहे। कृष्णा राजकपूर आडिटोरियम में आयोजित अधिवेशन के दूसरे दिन यानी शनिवार को निर्धारित चार सारों के उपरांत रात्रिकालीन सर्वभाषा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। साहित्यकारों के इस कुंभ में विभित्र विषाओं में पद्मश्री विभूषित शख्सियत एवं रचनाकारों के प्रेरक प्रबोधन-उद्‌बोधन सुनने का अवसर विध्यवासियों को मिला है।

विचारों, रचनाओं एवं संस्कृति का अदान-प्रदान देश-प्रदेश के जुटे साहित्य साधक कर रहे हैं। अर्थात् साहित्य साधक एकत्र होकर शब्दों के माध्यम से विचार, अनुभव और सृजन की गंगा में स्नान कर रहे हैं। साहित्य के माध्यम से देश की एकता का निर्माण, मानवीय संवेदनाओं का सृजन, जीवन के सारभूत रसतत्व के आस्वाद को समाज के समक्ष प्रस्तुत करना, भारत की सभी भाषाओं के बीच तालमेल बैठाने के लिए गोष्ठियां, कवि सम्मेलन, साहित्यिक विवेचन, विचार-विमर्श एवं भाषा मालाओं का आयोजन, कार्यशालाओं एवं अभ्यास वर्ग  आयोजित करना, आधुनिक व प्राचीन साहित्य के शोध के लिए शोध केन्द्रों का निर्माण करना, पुस्तक-शोधग्रन्थ एवं पत्रिक का प्रकाशन करना, साहित्यकारों को पुरस्कृत करना आदि के उद्देश्य से गठित संगठन अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन के दूसरे दिन कुमुद शर्मा, आशीष कुमार गुप्ता, डॉ. पाण्डेय, एमसीयू के कुलगुरू विजय मनोहर तिवारी, अमित कुशवाहा, पद्मश्री जगदीश जोशीला के प्रेरक उद्‌बोधन हुए।

मध्य प्रदेश के रीवा में हो रहे साहित्यकारों के राष्ट्रीय अधिवेशन में तीन पद‌मश्री विभूतियों जगदीश जोशीला, उमाशंकर पाण्डेय एवं विद्याबिंदु सिंह की उपस्थिति उलेखनीय रहीं। प्रथम सत्र को संबोधित करते हुए कुमुद शर्मा ने कहा कि भारतीय रसाहित्य में वैदिक काल की बहुत प्रभुता रही है। हमने वेद और वेदांशों से लिए हुए ज्ञान को साहित्य के द्वारा जनमानस तक पहुंचाया है। आशीष कुमार गुप्ता ने कुटुम्ब प्रबोधन पर बोलते हुए कहा कि भारत की संस्कृति, सभ्यता और त्यौहार कुटुम्ब की वजह से बचा है। आज के युवा कुटुम्ब से परिवार, परिवार से हम और हम से मैं हो चुके हैं, जबकि हमारी भारतीय संस्कृति में 24 घंटे में 8 घंटे सोने में, 8 घंटे काम करने तथा शेष वक्त परिवार एवं समाज के लिए होता है। कुटुम्ब में स्मृति जागरण का संदेश दिया जाता था।

द्वितीय सत्र की शुरूआत डॉ. करीना सक्सेना के गीत के साथ हुई। पद‌मश्री उमाशंकर पाण्डेय ने पर्यावरण और जल संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि भारत समेत पूरी दुनिया में जल का संकट है। पानी को बचाने के लिए न तो कोई विश्वविद्यालय है, न कोई किताब और न कोई लाइब्रेरी हैं। दुनिया में जनसंख्या बढ़ रही है और पानी की जरुरत भी बढ़ रही है।

एमसीए भोपाल के कुलगुरू विजय मनोहर तिवारी ने पत्रकारिता और साहित्य पर उद्बोधन देते हुए मानवीय विस्थापन पर अपनी कृति के बारे में बात कही। उन्होंने कहा कि रिवर्स माईग्रेट से गांवों में बेहतर स्थिति निर्मित होगी।

तृतीय सत्र में अमित कुशवाहा ने स्वजागरण की राष्ट्र जागरण तथा पद्‌मश्री जगदीश जोशीला ने निमाड़ी भाषा के लिए किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला। अंतिम सत्र में साहित्यकार श्रीधर पराड़कर की साहित्य कृतियों पर परिचर्चा की गई। सवाल-जबाव के क्रम में कुलगुरू विजय मनोहर तिवारी, डॉ. नुसत्त महदी व दिनेश प्रताप सिंह ने परिचर्चा की। आज के सभी सत्रों का संयोजन अखिल भारतीय साहित्य परिषद की राष्ट्रीय मंत्री डॉ. नीलम राठी, जिलाध्यक्ष शिवानंद तिवारी एवं जिला महामंत्री रीवा डॉ. रजना मिश्रा ने किया। कार्यक्रम के संयोजक चन्द्रकान्त तिवारी ने चार सत्रों में विभाजित कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए मीडिया को बताया कि अधिदेशन का समापन 9 नवम्बर को होगा। साभार – स्वदेश संवाददाता

 

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