सरकारी योजनाओं और मेहनत से बदल रही कुल्लू के किसानों की तकदीर

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सुरभि न्यूज़

कुल्लू, 13 नवम्बर
कुल्लू  जिले की खूबसूरत खोखन गांव के किसान मदन लाल ने अपनी मेहनत, दूरदृष्टि और वैज्ञानिक खेती के जरिये सफलता की नई मिसाल कायम की है। उन्होंने परंपरागत खेती से आगे बढ़कर अपने खेतों में जापानी फल (Persimmon) की खेती शुरू की और आज वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुके हैं।
मदन लाल बताते हैं कि सरकार की सहायता और उन्नत पौध किस्मों की बदौलत आज उनकी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। सरकार द्वारा प्रति हेक्टेयर 62,500 रुपये का अनुदान जापानी फल की खेती के लिए दिया जाता है। इसके अलावा किसानों को पावर टिलर और पावर स्प्रेयर पर 50 प्रतिशत, तथा पक्षियों और ओलावृष्टि से बचाव के लिए नेट पर भी 80 प्रतिशत तक का अनुदान भी प्रदान किया जाता है।
ज़िला कुल्लू आज प्रदेश में जापानी फल उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन चुका है। यहां लगभग 404 हेक्टेयर क्षेत्र में इसकी खेती की जा रही है, जिससे इस वर्ष 1406 मीट्रिक टन उत्पादन का अनुमान है।
मदन लाल का कहना है, “कुल्लू जिला सेब, नाशपाती, प्लम, अनार और अखरोट जैसे अनेक फलों का और सब्जियों का उत्पादक क्षेत्र है। सरकार के वैज्ञानिक और आर्थिक सहयोग से हर वर्ष फल उत्पादन में बढ़ोतरी हो रही है। अगर युवा वर्ग इस दिशा में कदम बढ़ाए तो स्वरोजगार के रूप में कृषि एक सशक्त साधन बन सकती है।”
उन्होंने बताया कि इस वर्ष प्राकृतिक आपदाओं से सड़क मार्ग बुरी तरह से प्रभावित होने के बावजूद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के दिशा-निर्देशों पर सड़कों को युद्ध स्तर पर बहाल किया गया, जिससे किसानों के उत्पाद समय पर मंडियों तक पहुंच सके। कुल्लू के जापानी फल की गुणवत्ता और औषधीय गुणों के चलते बाजार में अच्छी मांग होने से किसानों को भी बेहतर दाम मिल रहे हैं।
जापानी फल एक अत्यंत पौष्टिक, स्वादिष्ट और औषधीय गुणों से भरपूर फल है, जो स्वास्थ्य के साथ-साथ किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने में भी सहायक सिद्ध हो रहा है। इसमें विटामिन A, C, फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट और खनिज प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो हृदय, पाचन, त्वचा, आंखों और रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए लाभकारी हैं। नियमित रूप से पका हुआ जापानी फल खाने से शरीर को ऊर्जा, रोगों से सुरक्षा और सौंदर्य दोनों मिलते हैं। इस प्रकार, यह फल न केवल स्वास्थ्यवर्धक है बल्कि पर्वतीय कृषि में समृद्धि का प्रतीक भी बनता जा रहा है।

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