मानवता सेवा के लिए सम्मान : कुल्लू के हरिराम चौधरी 5 फरवरी को शिमला में राज्य पुरस्कार से होंगे सम्मानित

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सुरभि न्यूज़

शारदा देवी अरनोट, कुल्लू : 03 फरवरी

जिला कुल्लू की शांत वादियों में जब कुदरत ने अपना रौद्र रूप दिखाया, तो सैंज व बंजार घाटी भी इस दर्द से चीख उठी। सैंज की उफनती लहरों और दरकते पहाड़ों के बीच जहां रास्ते दम तोड़ चुके थे और उम्मीदें धुंधली पड़ रही थीं, वहां एक नाम फरिश्ता बनकर सामने आया, वह नाम है हरिराम चौधरी।

जिन्हें आज घाटी के लोग श्रद्धा से ‘आपदा का हीरो’ पुकार रहे हैं। चौधरी की समाज के प्रति जागरूकता को देखते हुए उन्हें 5 फरवरी को शिमला में राज्य पुरस्कार से सम्मानित किया जा रहा है। प्रदेश सरकार में लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह उन्हें सम्मानित करेंगे।

पैरों में छाले, पर इरादे अडिग

जब कुदरत के कहर ने सड़कों का नामो-निशां मिटा दिया था और प्रशासन की मदद भी दुर्गम रास्तों के आगे बेबस नजर आ रही थी, तब हरिराम ने घर पर बैठना स्वीकार नहीं किया। दो महीनों तक बिना थके, बिना रुके, उन्होंने 20 पंचायतों के 36 से अधिक गाँवों की खाक छानी। जहां कई मीलों तक पहुंचने के लिए सड़कें नहीं थीं, वहां हरिराम के कदमों ने रास्ता बनाया। वे केवल एक पत्रकार की हैसियत से नहीं, बल्कि एक बेटे और भाई की तरह हर उस आंगन में पहुंचे जहां मातम पसरा था।

रीयल जर्नलिज्म : स्याही से ज्यादा आंसुओं की कीमत समझी

अक्सर पत्रकारिता केवल खबरों तक सीमित रह जाती है, लेकिन हरिराम ने इसे ‘सेवा धर्म’ बना दिया। उन्होंने केवल कैमरे पर लोगों का दर्द दर्ज नहीं किया, बल्कि उस दर्द को बांटने का बीड़ा उठाया। हर उस दरवाजे पर पहुंचे जहां चूल्हा बुझ चुका था। प्रभावितों की समस्याओं को न केवल मीडिया के माध्यम से सरकार के कानों तक पहुंचाया, बल्कि समाधान होने तक उनके साथ चट्टान की तरह डटे रहे।

अपनी साख और संपर्क का उपयोग कर उन्होंने समाजसेवी संस्थाओं को जोड़ा और बंद रास्तों के बावजूद मीलों पैदल चलकर प्रभावितों तक राशन, राहत सामग्री और आर्थिक सहायता पहुंचाई।

मानवता की मिसाल

आज जब घाटी धीरे-धीरे इस जख्म से उबर रही है, लोगों के दिलों में हरिराम चौधरी के लिए प्रशंसा के शब्द कम पड़ रहे हैं। सच्चा नायक वही है जो तब दिखे जब चारों तरफ अंधेरा हो। उन्होंने साबित कर दिया कि आपदाएं भले ही कितनी भी बड़ी क्यों न हों, इंसानी जज्बे और निस्वार्थ सेवा के सामने उन्हें हारना ही पड़ता है। सैंज और बंजार घाटी के कोने-कोने में आज हरिराम चौधरी के सेवा भाव की गाथाएं गूंज रही हैं।

 परिचय : हरिराम चौधरी

हरिराम चौधरी जनसेवा और पत्रकारिता का एक समर्पित नाम है। सैंज घाटी की मिट्टी में 1977 को जाने माने व्यायवसायी, समाजसेवी, नम्बरदार पिता थोलूराम और माता नरोतमु देवी के घर जन्में हरिराम चौधरी एक ऐसी शख्सियत हैं, जिन्होंने छात्र राजनीति के संघर्ष से निकलकर समाज के उत्थान को ही अपना जीवन लक्ष्य बनाया है। वे सैंज घाटी के प्रतिष्ठित ‘चौधरी परिवार’ के सबसे छोटे पुत्र हैं और उनकी पहचान एक निर्भीक पत्रकार व संवेदनशील समाजसेवी के रूप में होती है।

पिछले 24 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उन्होंने हमेशा जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। वे केवल समाचार ही नहीं देते, बल्कि धरातल पर समस्याओं के समाधान के लिए भी जाने जाते हैं। उनकी धर्मपत्नी, रोहिणी चौधरी, जिला परिषद कुल्लू की अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। परिवार की यह राजनीतिक पृष्ठभूमि उनके सेवा भाव को और अधिक मजबूती प्रदान करती है।

समाज के लिए एक स्तंभ, मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म : चौधरी

हरिराम चौधरी  का कहना है कि “मानवता की सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। इस मूल मंत्र को जीने वाले हरिराम जाने माने समाजसेवी सरबजीत सिंह बॉबी को अपना आदर्श मानते हैं। उन्हीं के पदचिन्हों पर चलते हुए वे सदैव समाज सेवा के लिए तत्पर रहते हैं। आज हरिराम चौधरी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि उस उम्मीद का नाम हैं जिसने आपदा की मार झेल रहे परिवारों को फिर से जीने का हौसला दिया। हरिराम चौधरी जैसे लोग समाज के लिए वो स्तंभ होते हैं जो बिना किसी स्वार्थ के, केवल संवेदना के सहारे खड़े रहते हैं।

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