सुरभि न्यूज़
कुल्लू, 23 मई
देवभूमि कुल्लू में भारतीय शास्त्रीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सूत्रधार कला संगम द्वारा सात दिवसीय कथक नृत्य कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथक गुरु तपिश देवनाथ विशेष रूप से मौजूद रहे।
कार्यशाला के शुभारंभ अवसर पर आयोजित मीडिया कर्मियों से बातचीत करते हुए कथक गुरु तपिश देवनाथ ने कहा कि वे पिछले 40 वर्षों से देश-विदेश में कथक नृत्य के माध्यम से भारतीय संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कथक केवल एक नृत्य शैली नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, भावनाओं, आध्यात्मिकता को अभिव्यक्त करने का सशक्त माध्यम है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल, विशेषकर देवभूमि कुल्लू की सांस्कृतिक विरासत बेहद समृद्ध है और यहां के युवाओं में कला के प्रति गहरी रुचि देखने को मिलती है। ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को भारतीय शास्त्रीय कलाओं से जोड़ने का अवसर मिलता है।
सात दिनों तक चलने वाली इस कार्यशाला में स्थानीय कलाकारों और युवाओं को कथक नृत्य की बारीकियों, ताल, भाव और अभिनय शैली का प्रशिक्षण दिया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि कार्यशाला का उद्देश्य युवाओं में भारतीय शास्त्रीय कला के प्रति जागरूकता और रुचि बढ़ाना है।
कथक गुरु तपिश देवनाथ ने कहा कि आधुनिकता के दौर में भारतीय संस्कृति और पारंपरिक कलाओं को बचाए रखना बेहद आवश्यक है। उन्होंने युवाओं से अपनी संस्कृति और जड़ों से जुड़े रहने का आह्वान किया।
कुल्लू में आयोजित यह कार्यशाला कला प्रेमियों और युवा कलाकारों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। इस मौके पर सूत्रधार कला संगम के अध्यक्ष दिनेश सेन व अन्य पदाधिकारी भी खास तौर पर उपस्थित रहे।












