रंगमंच : कुल्लू दशहरा में ‘एक था गधा उर्फ अलादाद खान’ का मंचन, व्यंग्य के जरिए सत्ता और व्यवस्था पर किया प्रहार

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सुरभि न्यूज़

कुल्लू, 27 अक्टूबर

अटल सदन में एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन की प्रस्तुति ने दर्शकों को कभी गुदगुदाया तो कभी सोचने पर किया मजबूर
कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा के अवसर पर कुल्लू दशहरा कमेटी की ओर से आयोजित नाट्य प्रस्तुतियों के तीसरे दिन अटल सदन, कुल्लू में एक्टिव मोनाल कल्चरल एसोसिएशन ने प्रसिद्ध रंगकर्मी केहर सिंह ठाकुर के निर्देशन में शरद जोशी द्वारा लिखित व्यंग्य नाटक ‘एक था गधा उर्फ अलादाद खान’ का शानदार मंचन किया। नाटक ने अपनी व्यंग्यात्मक शैली के माध्यम से सत्ता के अहंकार, चाटुकारिता और व्यवस्था की विसंगतियों को उजागर करते हुए दर्शकों को कभी गुदगुदाया तो कभी गंभीर चिंतन करने पर मजबूर कर दिया।

नाटक की कहानी एक ऐसे नवाब के इर्द-गिर्द घूमती है, जो हर समय अपनी प्रशंसा सुनना चाहता है। अपनी वाहवाही और लोकप्रियता बढ़ाने के लिए वह लगातार नए-नए पैंतरे आजमाता रहता है। इसी बीच उसे पता चलता है कि अलादाद खान नामक एक आम आदमी की मृत्यु हो गई है। नवाब इसे अपनी लोकप्रियता चमकाने का अवसर मानते हुए उसके जनाजे में शामिल होने की योजना बनाता है। इसके साथ ही जनाजे के सीधे प्रसारण के लिए मीडिया प्रबंधन सहित तमाम तैयारियां की जाती हैं, ताकि नवाब की छवि को जनता के बीच और बेहतर बनाया जा सके।

लेकिन ऐन मौके पर कहानी में अप्रत्याशित मोड़ आता है। पता चलता है कि अलादाद खान नाम का कोई व्यक्ति नहीं, बल्कि एक धोबी का गधा मरा है। इस खुलासे से शासन और प्रशासन में हड़कंप मच जाता है। अपनी प्रतिष्ठा बचाने के लिए व्यवस्था के जिम्मेदार लोग एक गरीब और ईमानदार व्यक्ति को पकड़कर उसकी हत्या कर देते हैं और उसके जनाजे को नवाब की प्रतिष्ठा से जोड़कर अपनी योजना पूरी करते हैं।

नाटक की घटनाएं हास्य और व्यंग्य के माध्यम से उस व्यवस्था पर सवाल उठाती हैं, जिसमें आम आदमी की जिंदगी और सच्चाई से अधिक महत्व सत्ता की छवि तथा झूठी वाहवाही को दिया जाता है। कलाकारों ने अपने अभिनय के जरिए कहानी के विभिन्न प्रसंगों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया और दर्शकों को सामाजिक एवं राजनीतिक व्यवस्था की विसंगतियों पर विचार करने का संदेश दिया।

नाटक में केहर सिंह ठाकुर सहित रेवत राम, परमानंद, शिवांगनी, सेजल, गीतांजलि, सोनिया, अनन्या, गौरव, आशु शर्मा, हनी नेगी, समृद्धि, आराध्या और सानवी ने अभिनय किया। मंचन के दौरान मीनाक्षी ने प्रकाश व्यवस्था संभाली, जबकि जिया ने पार्श्व ध्वनि संचालन की जिम्मेदारी निभाई।

अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा के सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अंतर्गत आयोजित इस नाट्य प्रस्तुति ने दर्शकों के सामने रंगमंच की प्रभावशाली अभिव्यक्ति के साथ समाज और व्यवस्था पर व्यंग्य करने वाली एक सशक्त कहानी प्रस्तुत की।

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