विधानसभा चुनाव में पुरानी पेंशन बहाली और बेरोजगारी बनेगा मुख्य चुनावी मुद्दा

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सुरभि न्यूज़ ब्यूरो 

कुल्लू 
हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव में कर्मचारियों का पुरानी पेंशन स्किम और युवायों की बेरोजगारी का मुद्दा प्रमुख सामने आ रहा है। जहां कर्मचारी पुरानी पेंशन वहाली के लिए प्रदेश सरकार से खपा हैं वहीं युवा वर्ग भी बेरोजगारी के चलते खासे नाराज नजर आ रहे हैं। प्रदेश में इस समय लगभग 1.10 लाख कर्मचारी पुरानी पेंशन वहाली की मांग काफी समय से कर रहें हैं परन्तु प्रदेश सरकार ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति कमजोर होने का हवाला देकर पुरानी पेंशन बहाल नहीं कर पाई। उल्लेखनीय है कि 2003 के बाद सरकारी नौकरी पर नियुक्त कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बंद करके नई पेंशन स्किम लागु की गई। 2003 के बाद नियुक्त कर्मचारियों को कुछ साल तो नई पेंशन स्किम पाॅलिसी पता ही नही लगा कि सेवानिवृति के बाद उन्हे कितनी पेंशन कर्मचारी को लगेगी। जब कर्मचारियों ने मिलने वाली पेंशन की गणना की तो सेवानिवृत कर्मचारी को नामात्र फायदा हो रहा था तब जाकर प्रदेश भर के कर्मचारी जागरूक हुए और पुरानी पेंशन वहाली की मांग करने सड़को पर उतरने पर मजबूर हो गए। कर्मचारियों का आरोप है कि 2003 के बाद सरकारी कर्मचारियों की पेंशन तो बंद कर दी परन्तु नेताओें ने अपनी पेंशन बरकरार रखी जो कि कर्मचारियों के साथ बहुत बड़ा धोखा है। जो नेता पांच साल पद पर रह कर पेंशन का हकदार बन जाता है परन्तु एक कर्मचारी सारी उम्र 58 से 60 साल उम्र तक अपनी सेवा विभाग को देता वह खाली हाथ घर आता है। ढलती उम्र में वह कर्मचारी अपना और परिवार का गुजारा किस तरह करेगा।
वहीं प्रदेश में बेरोजगारी का सबसे बडा मुद्दा सामने आ रहा है जिसे विपक्षी दल विधान सभा चुनावों में भूना सकते हैं। भाजपा सरकार पर पांच साल तक बेरोजगारों की उपेक्षा करने के आरोप विपक्षी दल कांग्रेस लगा रही है। चुनाव में जाने से पहले कांग्रेस नेता पहले ही साफ शब्दों में कह चुके हैं कि बेरोजगारी प्रमुख मुद्दा रहेगा और बेरोजगारों को रोजगार देने की गारंटी कांग्रेस ने दी है। विधानसभा चुनाव में कांग्रेस, आप और माकपा प्रदेश के बेरोजगारों के वोट बैंक पर अपनी निगाहें लगाए हुए है। इस कारण विपक्ष दल बेरोजगार युवा वोट बैंक को भुनााने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। प्रदेश कांग्रेस के सचिव हरि कृष्ण हिमराल ने कहा कि भाजपा सरकार ने पिछले पांच साल में चहेतों को ही नौकरी दी है। रोजगार दफ्तरों में पंजीकृत युवाओं को रोजगार देने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाया और आज बेरोेजगारों की संख्या लगभग 8.5 लाख पार हो चुकी है। यह शिक्षित युवा बेरोजगारों के साथ एक मजाक है। माकपा के मजदूर संगठन सीटू के प्रदेश अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि भाजपा सरकार ने प्रदेश के युवा बेरोजगारों को रोजगार नहीं देकर अपने चहेतों को रोजगार देकर प्रदेश के बेरोजगारों के साथ धोखा किया है। इस विधानसभा चुनावों में कर्मचारियों की पुरानी पेंशन स्किम की बहाली तथा प्रदेश में बढती बेरोजगारी विपक्षी दलों का प्रमुख मुद्दा रहेगा जिसे भुनाने के लिए विपक्षी दल भरपुर जोर लगाएगें।

 

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