सुरभि न्यूज़
डॉ अशोक कुमार सोमल
हिमाचल प्रदेश में इस तबाही के लिए केवल सड़कों का धड़ल्ले से सभी कानूनों और नियमों सिद्धांतों को दर किनार कर बनाया जाना है। फोरलेन बनाए जाने से बहुत बड़ी अनदेखी की जा रही है और यह तकनीकी खामियों और भ्रष्टाचार की वजह से है। हम लगभग पूरे प्रदेश का दौरा कर रहे हैं और समय समय पर इसके लिए आवाज उठाते हैं। कुल्लू मनाली यानी व्यास नदी की सारी कैचमेंट को तहस नहस किया गया है। कागजों में इसके मक के निपटारे के बारे सारे कायदे कानून हैं पर इसकी बिल्कुल अनदेखी हो रही है।
अकेले अटल टनल को ही लें तो इससे निकला मक अभी तक सेटल नहीं हुआ है। इसके बनाने से जो पहाड़ियां दरकी हैं अभी भी सेटल नहीं हुई हैं। अभी मणिकर्ण की सड़क चौड़ी होनी है इसी तरह अनी बंजार आउट सड़क के लिए जालोरी पास के नीचे सुरंग प्रस्तावित है बननी है इससे कितनी बरबादी होगी अंदाजा लगाया जा सकता है।
सड़कें किसी भी इलाके की उन्नति प्रगति के लिए जरूरी हैं, पर पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यावरण और वन के साथ पहाड़ियों का सुरक्षित रहना बहुत जरूरी है, नहीं तो जिस तरह की वारदातें हो रही हैं इससे पूरे निचले क्षेत्रों में तबाही ही तबाही होगी, जैसे 2023 में हुआ और इस बार भी पिछले 15 दिनों में ही त्राहिमाम त्राहिमाम शुरू है।
हम पीछे शिमला में 3 दिन की आपदा ट्रेनिंग में थे तो वहां भी इसके बारे बड़े कड़े शब्दों से इसका जिक्र हुआ था। शिमला में ही सड़कें सभी नियमावलियां को दरकिनार कर बनाई जा रही हैं। ठेकेदारों को हिदायत होने चाहिए कि बरसात में काम न हों पर ठेकेदार बिना किसी खौफ के धड़ाधड़ काम किए जा रहे हैं। बरसात में यदि बड़ी बड़ी मशीनों से काम होगा तो फिर कोई भी त्रासदी को रोक नहीं पाएगा। यहां हम ठहरे थे HIPA में उसके सामने ही रोड बड़ी स्लोप पर बनाया जा रहा है बिल्कुल इसे तकनीकी कायदे से नहीं बनाया जाना चाहिए। इसका सारा का सारा मलबा नाले में जाएगा और नीचे तबाही लाएगा। पठानकोट मंडी फोरलेन में भी बहुत बड़े स्तर पर मलबा नालों में फेंका गया है अभी तक की बरसात में लगभग आधा पौंग डैम झील में पहुंच गया होगा।
हमने 2023 में आई बाढ़ में झील में अंदाजा लगाया कि लगभग डेढ़ मीटर गाद झील में जमा हुई है। जिस रफ्तार से यह गाद पौंग झील में जमा हो रही है इससे डैम की झील 10 साल में ही भर जाएगी। इससे फिर से पूरे पंजाब में बाढ़ के हालात बरसात में बना करेंगे जैसे 2023 में भी अचानक पानी छोड़ने से हिमाचल के मंड क्षेत्र डूब गया था और भारी नुकसान हुआ था।
हमने पूर्व मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर के विधानसभा क्षेत्र का दो बार दौरा किया था। एक बार 2022 में जून महीने में और हमने वहां की हालात को देख कर लिखा था कि जितनी सड़कें बनाने और दूसरे इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए वनों की तवाही की है इससे सारा सराज क्षेत्र में उथल पुथल होगी और व्यास नदी में बाढ़ आएगी। थुनाग में ऐसा ही हुआ। जय राम ठाकुर के घर से ऊपर की तरफ सड़क बनाने से लकड़ियां जो नाले में पेड़ उखाड़ कर डाले थे साथ में ऊपर से मिट्टी डाली थी सारी की सारी बरसात के पानी में बह कर नीचे संकड़े नाले में बरबादी का कारण बनी और सबसे पहले पूर्व मुख्यमंत्री दौड़े दौड़े वहां गए और हाय तोबा करने लगे।
सुक्खू सरकार पर दबाव बनाया गया की वहां राहत पहुंचाई जाए। छोटी सी जगह थुनाग में प्रदेश की राजधानी जैसी भवन इमारतें बनाई गई और इसका नतीजा निकला कि इसी जगह से बहने वाले नाले में बनी प्राइवेट पीटीकरी जल विद्युत प्रोजेक्ट का इस वर्ष नामों निशान ही मिट गया है ऐसी खबर है।
शिमला में एक पांच मंजिला बिल्डिंग NHAI द्वारा बनाई जा रही सड़क की जद में आकर जमींदोज हो गई जिसकी गूंज केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री गडकरी को भी सुनाई पड़ी।
पिछले 11 वर्षों में जितनी देश के पर्यावरण की तवाही सड़कों को बनाने में और अडानी की कोल माइनिंग की वजह से हुई है शायद ही पिछले 67 सालों में इतनी बरबादी हुई हो। और जितना भ्रष्टाचार इसमें हुआ है इतना पिछले 67 सालों में भी नहीं हुआ होगा।
इसलिए जनता को जागरूक होना है और प्रदेश को होने वाली तवाही को बचाने के लिए इस अंधाधुंध विकास यानी बरबादी की दौड़ पर अंकुश लगाना होगा। तभी हिमाचल प्रदेश सुरक्षित बचेगा। वर्षा का ज्यादा बरसना धरती के बढ़ते तापमान का नतीजा है इसे समझने की जरूरत है और धरती के बढ़ते तापमान को नियंत्रण करने के लिए शीघ्र उपाय करने होंगे।
लेखक स्वराज सत्याग्रही व पर्यावरण प्रेमीहै जो लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण अभियान से जुड़े है










