प्रतिभा : साम्फिया की संस्थापक एवं कार्यकारी निदेशक डॉ. श्रुति मोरे भारद्वाज का भारत सरकार के सर्वोच्च राष्ट्रीय पुरस्कार – 2025  के लिए हुआ चयन 

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सुरभि न्यूज़, कुल्लू : साम्फिया फाउंडेशन के लिए यह गर्व और सम्मान का अवसर है कि संस्था की संस्थापक एवं कार्यकारी निदेशक डॉ. श्रुति मोरे भारद्वाज का चयन भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा वर्ष 2025 के राष्ट्रीय पुरस्कार हेतु चयन किया गया है।

डॉ. भारद्वाज का चयन “दिव्यांगता के क्षेत्र में कार्यरत सर्वश्रेष्ठ पुनर्वास पेशेवर (Best Rehabilitation Professional Working in the Field of Disability)” श्रेणी में किया गया है।

यह पुरस्कार देश में दिव्यांगजन सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को प्रदान किया जाने वाला सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान है।

उल्लेखनीय  है कि साम्फिया फाउंडेशन की संस्थापक एवं कार्यकारी निदेशक डॉ. श्रुति मोरे भारद्वाज पिछले एक दशक से हिमाचल प्रदेश में दिव्यांग बच्चों और उनके परिवारों के पुनर्वास, सशक्तिकरण एवं सामाजिक समावेशन के लिए निरंतर कार्यरत हैं।

अपने समर्पण, संवेदनशीलता और नेतृत्व के माध्यम से उन्होंने अनेक परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाया है तथा समाज में समानता और समावेशन की भावना को सशक्त किया है।

उनके नेतृत्व में साम्फिया फाउंडेशन ने अनेक नवोन्मेषी और प्रभावशाली कार्यक्रम प्रारंभ किए हैं, जिनमें प्रमुख हैं आश बाल विकास केंद्र (Aash Child Development Center) है जिसके माध्यम से दिव्यांग बच्चों को प्रारंभिक हस्तक्षेप, थेरेपी और विशेष शिक्षा की समेकित सेवाएँ प्रदान की जाती हैं।

थैरेपी ऑन व्हील्स (Therapy on Wheels) यह एक अभिनव परियोजना है जिसके माध्यम से पहाड़ी एवं दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले दिव्यांग बच्चों तक पुनर्वास और उपचार सेवाएँ उनके घर-द्वार तक पहुँचाई जा रही हैं।

समावेशन जागरूकता अभियान के तहत समाज में दिव्यांगजनों के अधिकारों, समान अवसरों और सम्मानजनक भागीदारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु निरंतर अभियान चला रही है।

प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम के तहत दिव्यांगता क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण सेवाएँ सुनिश्चित करने हेतु अभिभावकों, शिक्षकों और थेरेपिस्टों को नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जाता है।

डॉ. श्रुति मोरे भारद्वाज ने जानकारी देते हुए बताया कि जबसे मैंने दिव्यांगता के क्षेत्र में कार्य प्रारंभ किया है, मुझे हमेशा समाज के विभिन्न समुदायों, संगठनों और सहयोगी संस्थाओं का अपार समर्थन मिला है। साम्फिया की पहली पहल आश बाल विकास केंद्र ए.डी. हाइड्रो पावर लिमिटेड द्वारा प्रायोजित है। हमारी थैरेपी ऑन व्हील्स परियोजना दिल्ली स्थित इंडियन रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपमेंट एजेंसी लिमिटेड (IREDA) द्वारा प्रायोजित है और चंबा में इसे एनएचपीसी (NHPC) के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, डीईआईसी (DEIC), क्षेत्रीय अस्पताल कुल्लू और साम्फिया का एक संयुक्त उपक्रम है, जिसे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत चलाया जा रहा है।

डॉ. श्रुति मोरे भारद्वाज का कहना है कि मैं इस उपलब्धि का पहला श्रेय अपने माता-पिता और भाई को देना चाहूँगी, जिन्होंने मुंबई से कुल्लू स्थानांतरित होने के मेरे निर्णय में पूरा समर्थन दिया। इसके बाद मैं अपने पति, परिवार और साम्फिया के प्रत्येक स्टाफ सदस्य की आभारी हूँ, जिनके समर्पण और सहयोग के बिना यह यात्रा संभव नहीं थी। मैं उन सभी संस्थाओं और व्यक्तियों का हृदय से आभार व्यक्त करती हूँ जिन्होंने साम्फिया पर विश्वास जताया और इस मिशन को आगे बढ़ाने में सहयोग दिया है।

साम्फिया की टीम ने इस उपलब्धि पर अपार गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि यह चयन संस्था की वर्षों की मेहनत, संवेदनशीलता और समानता के साथ सशक्त भारत के संकल्प का परिणाम है। संस्था ने यह भी संकल्प लिया है कि आने बाले समय में साम्फिया पूर्ण रूप से एक समावेशी केंद्र का निर्माण करना चाहती है जो पुरे देश के लिए एक बेहतर थैरेपी केंद्र के रूप में अपनी सेवाएँ देगा।

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