सुरभि न्यूज़
ख़ुशी राम ठाकुर, बरोट
आजतक सता में रहने वाली किसी भी प्रदेश सरकार ने दुर्गम छोटाभंगाल तथा चौहार घाटी में समग्र विकास करवाने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है। जिस कारण दोनों घाटियों के लोग अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। आजादी के लगभग आठ दशक बीत जाने के बाद भी दोनों घाटियों के लोगों को कई समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। इन दोनों घाटियों के अधिकांश गाँवों में सड़क सुविधा नहीं है। जहां भी सरकार
द्वारा सड़क सुविधा प्रदान की गई है वे भी वर्तमान में उबड – खाबड़ और कच्ची ही पड़ी हुई है।
यहां पर प्राथमिक से लेकर जमा दो तक की पाठशालाएं तो खोल रखी है मगर उनमें से कई पाठशालाओं में वर्षों से अध्यापकों व विभिन्न पद खाली चले हुए हैं। यहां पर आयुर्वैदिक, प्राथमिक स्वास्थय केन्द्र, उप स्वास्थय केन्द्र तथा वेटनरी डिस्पेंसरी तो खोल रखी है मगर उनमें भी वर्षों से ही कई पद खाली चले हुए हैं।
छोटाभंगाल घाटी के शिक्षित व समाजसेवी धर्म चंद ठाकुर ने बताया कि दोनों घाटीवासियों की बेहतर व घर द्वार में ही स्वास्थय सुविधा प्रदान करने के लिए केन्द्र स्थल बरोट में भले ही सरकार ने सामुदायिक स्वास्थय केन्द्र को स्थापित कर रखा है मगर उसमें भी सामुदायिक स्वास्थय केन्द्र की तर्ज़ पर स्वास्थय सुविधा नहीं मिल पा रही है। एक ओर इस सामुदायिक स्वास्थय केन्द्र में आजतक सरकार अल्ट्रासाउंड तथा एक्सरे मशीन उपलब्ध नहीं करवा पाई हैं।
वहीँ दूसरी ओर वहीँ छोटाभंगाल घाटी में स्थित राजकीय महाविद्यालय मुल्थान का भी यही हाल है। इस महाविद्यालय में प्राचार्य का पद तथा विभिन्न विषयों के प्रवक्ताओं के पद लगभग दो वर्ष से खाली चलने के कारण गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष बच्चों की संख्या घटकर पच्चास ही रह गई थी। प्रतिनिधियों सहित कई बुद्धिजीवियों ने बच्चों तथा उनके अविभावकों को जैसे-तैसे मनाकर हाल ही अपनी
धनराशि से सहयोग कर लगभग एक सौ से अधिक और बच्चों का प्रवेश दिलवाया है। सरकार द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुसार कि इस महाविद्यालय में खाली पड़े विभिन्न पदों को तुरंत ही भर दिया जाएगा। जिसके चलते घाटीवासियों ने बच्चों की संख्या बढ़ाकर अपना फर्ज तो पूरा कर दिया है मगर उसके बावजूद भी लगभग तीन माह का समय बीत जाने के बाद सराकार द्वारा न तो प्राचार्य का पद भरा जा रहा है
और न ही खाली पड़े पदों को भरने की जहमत उठाई जा रही है।
प्रदेश सरकार की नाकामियों की वजह से प्रवेश लेने वाले लगभग चालीस बच्चों ने अपनी पढ़ाई को सुचारू रूप से चलाने के लिए इस महाविद्यालय से पलायन कर दूरदराज़ में स्थित महाविद्यालय में दाखिला ले लिया है। जिसके चलते अब इस महाविद्यालय में मात्र 59
बच्चे ही शेष रह गए हैं। धर्मचन्द ठाकुर ने घाटीवासियों की और से एक बार फिर से प्रदेश सरकार से मांग की है कि इन दुर्गम घाटियों के साथ सौतेला व्यवहार न करते हुए इन घाटियों में सम्पूर्ण सुविधा प्रदान करें।










