प्रदेश में बढ़ रहे दलित उत्पीड़न, भेदभाव और अधिकारों पर हो रहे हमलों के खिलाफ शोषण मुक्ति मंच जोगिंदर नगर ने मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन 

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सुरभि न्यूज़

जोगिंदर नगर, 17 नवंबर

प्रदेश में बढ़ रहे दलित उत्पीड़न, भेदभाव और अधिकारों पर लगातार हो रहे हमलों के खिलाफ आज शोषण मुक्ति मंच की जोगिंदर नगर इकाई द्वारा रविन्द्र कुमार की अध्यक्षता में एस डी एम से मिला तथा उनके माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।

इस अवसर पर सुदर्शन वालिया, विद्या देवी, ब्रम्ही देवी, भगत राम के अलावा माकपा नेता कुशल भारद्वाज व संजय जमवाल भी उपस्थित थे। आज का आह्वान शोषण मुक्ति मंच – हिमाचल प्रदेश एवं प्रदेश के विभिन्न समानता-समर्थक संगठनों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था।

कुछ महीने पहले रोहड़ू में दलित बच्चे सिकंदर की संदिग्ध मृत्यु और कुल्लू–सैंज में दलित महिला पर हुए हमले तथा उसकी मौत जैसी घटनाओं ने पूरे राज्य में गहरी चिंता और आक्रोश पैदा किया है। दलित समाज के खिलाफ बढ़ती हिंसा, भेदभाव, भूमि-अधिकारों से वंचित करना, असुरक्षित परिस्थितियाँ और सफाई कर्मियों की अस्थिर सेवा शर्तों ने इस आंदोलन को और व्यापक बनाया है।

इसी लिए जोगिंदर नगर में भी लोगों ने न्याय और समानता के लिए अपनी आवाज़ बुलंद की। प्रदर्शनकारियों ने सरकार से मांग की कि अनुसूचित जाति / अनुसूचित जानजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत लंबित मामलों की समयबद्ध और निष्पक्ष जांच की जाए, दोषियों की तत्काल गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए तथा तेलंगाना की तर्ज पर अनुसूचित जाति / अनुसूचित  जानजाति  (SC/ST ) विकास निधि कानून हिमाचल में लागू किया जाए।

साथ ही 85वें संविधान संशोधन को पूर्ण रूप से लागू करने, पीड़ित परिवारों को तत्काल आर्थिक सहायता व सुरक्षा प्रदान करने,    अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जानजाति विद्यार्थियों को समय पर छात्रवृत्ति देने, सभी नई भर्तियों में आरक्षण रोस्टर लागू करने, सरकारी व शैक्षणिक संस्थानों में भेदभाव के मामलों की जांच हेतु राज्य स्तरीय निगरानी समिति गठित करने और अनुसूचित जाति / अनुसूचित जानजाति कल्याण योजनाओं के बजट का 100% उपयोग सुनिश्चित कर उसकी सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करने की मांग भी उठाई गई।

प्रदेश भर में सफाई कर्मियों के नियमितीकरण, ठेका प्रथा समाप्त करने तथा दिल्ली, पंजाब और कर्नाटक की तर्ज पर हिमाचल सफाई आयोग गठित करने की माँग भी जोर-शोर से उठाई गई। संगठनों ने यह भी मांग की कि भूमिहीन दलित परिवारों, विशेषकर बाल्मीकि समाज को आवास योग्य भूमि प्रदान कर मालिकाना हक़ दिया जाए और शहरी ढारों को नियमित करने के लिए नीति बनाई जाए। साथ ही अल्पसंख्यक समुदायों पर धर्म के आधार पर हो रहे भेदभाव और हमलों पर तत्काल रोक लगाने तथा साम्प्रदायिकता फैलाने वाले व्यक्तियों व संगठनों पर कड़ी कार्रवाई करने की भी अपील की गई।

प्रदेश के सभी जिलों में बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता ने यह स्पष्ट कर दिया कि हिमाचल का आम नागरिक न्याय, समानता और संविधानिक अधिकारों की गारंटी चाहता है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि हिमाचल को प्रगतिशील राज्य कहा जाता है, पर दलित समाज की सुरक्षा अब भी सुनिश्चित नहीं है। यदि सरकार ने इस माँग-पत्र पर जल्द कार्रवाई नहीं की, तो आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक व तीव्र रूप लेगा।

शोषण मुक्ति मंच की तरफ से रविंदर कुमार व कुशाल भारद्वाज ने कहा कि यह संघर्ष सिर्फ दलित समुदाय का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का संघर्ष है। शोषण मुक्ति मंच ने चेतावनी दी कि सरकार यदि तुरंत ठोस कदम नहीं उठाती, तो संयुक्त आंदोलन को तेज़ किया जाएगा।

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