पावर ट्रांसमिशन टॉवरलाइन के निर्माण से सभी हितधारक जनता को भूअधिग्रहण का दंस झेलना पड़ेगा – खुशहाल ठाकुर

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सुरभि न्यूज़

पी डी लाल, कुल्लू : 06 दिसंबर

पिछले कुछ दिनों से आप सोशल मिडिया में लगातार बढ़ रहे प्राकृतिक आपदाओं के बारे में मेरे जन जागरूकता से जुड़े लेख पढ़ते आ रहे हैं। और उन्हें पढ़ कर आप सभी अपने अपने विचार और सुझाव साँझा करते आ रहे हैं। इस बात से प्रेरित हो कर में आज आपके सामने एक बर फिर से मुख़ातिव हो रहा हूं।

पिछले तीन महीनों से वर्ष 2023 व 2024 की ही तरह लगातार बादल फटने, बाढ़, भूसखलन, बेमौसमी वर्फबारी, बिन बारिश दरकते पहाड़ों जैसी भयानक प्राकृतिक आपदाओं में टूटते बहते घरों व आशियानों के इलावा टूटते धसते पुलों और दैत्यकार बिजली के पावर ट्रांसमिशन टॉवरों ने हम सभी को बुरी तरह प्रभावित किया है। इन सबसे हमने, हमारी सरकारों व नितिकारों ने क्या सबक सीखा है, यह जानना ज़रूरी है।

इधर इन आपदाओं के बीच जो नई खबर विचलित करने वाली है, वोह है उत्तरी बॉर्डर पर स्थित लदाख के पांग और न्योमा के शीत् मरुस्थलीय पठार में लगभग 20 हज़ार मेगावाट सोलर पावर प्रोजेक्ट बनने जा रहा है। इस प्रोजेक्ट से उत्पादित बिजली को हिमाचल प्रदेश और पंजाब से होते हुए लगभग एक हज़ार किलोमीटर दूर राजस्थान के नज़दीक हरियाणा के कैथल स्थित राष्ट्रीय पॉवरग्रिड कोरपोरेशन तक पहुँचाया जाएगा।

इस प्रोजेक्ट के लिए 21 हज़ार करोड़ रूपए बजट स्वीकृत हुआ है। इस दैत्यकार पावर ट्रांसमिशन टॉवरलाइन के निर्माण के लिए इसी साल के अंत तक ट्रांसमिशन रूट लाइन की सर्वे पूरा करके DPR और टेंडर की प्रक्रिया को पूरी करने के भारत सरकार के आदेश जारी कर दिए जायएंगे।

इस प्रोजेक्ट को मद्देनज़र रखते हुए हम सभी हितधारक जनता को एक और अप्रत्याशित भूअधिग्रहण प्रक्रिया का दंस झेलना पड़ेगा। हम सब अच्छी तरह जानते हैं कि मनाली, कुल्लू, मंडी, बिलासपुर व चंडीगढ़ गालियारा और मंडी काँगड़ा गलियारा पिछले सालों से लगातार भयंकर त्रासदी को झेलता आ रहा है।

चुंकि इस एकमात्र गलियारे से ही देश के उत्तरी बॉर्डर की सुरक्षा के लिए सामरिक दृष्टि से अति संवेदनशील सड़क मार्ग का चौड़ीकरण होना है और बिलासपुर से मंडी मनाली होते हुए लेह लदाख् तक रेलवे लाइन के लिए भी भू अधिग्रहण कि प्रक्रिया ज़ोरों शोरों से चली हुई है। हमें देश कि सुरक्षा से जुड़े इन विकास के कार्यकर्मों को जल्दी से जल्दी सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए अपना योगदान देना है।

लेकिन सुदूर पहाड़ों में दैत्यकार सोलर बिजली प्रोजेक्ट बना कर उसे हज़ार मील लम्बे ट्रांसमिशन टावर लाइन द्वारा राष्ट्र की बिजली की ज़रूरत को पूरा करने के लिए पूरे गलियारे की बली नहीं दी जानी चाहिए। विशेषज्ञों के मुताविक ये प्रोजेक्ट न तो तकनीकी दृष्टि से उचित हैं और न ही ब्यवहारिक और व्यवसायिक दृष्टि से निवेशकों के लिए लाभकारी।

इस लिए इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए ठोस सुझावों की आवश्यकता है, विशेषकर जहां नितिकारों और सरकारों को नीतिगत फैसले लेने होंगे वहीं समाज, हितधारकों व उनके द्वारा चुन कर आगे भेजे गये हर सत्र के जनप्रतिनिधियों को जन जागरूकता अभियानों के माध्यम से सक्रिय भूमिका निभानी होगी। साभार

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