सुरभि न्यूज़
ख़ुशी राम ठाकुर, बरोट
जिला कांगड़ा के छोटाभंगाल तथा जिला मंडी चौहार घाटी को जोड़ने वाला उहल नदी में बनाया गया पैदल चलने योग्य मुल्थान – बरोट पुल पर वर्षा होने पर जगह – जगह पानी इकत्रित होने तथा सर्दी के मौसम में पानी बर्फ की शीशे जैसी कठोर पतली परत जम जाने से फिसलन के कारण आवाजाही करने में स्थानीय राहगीरों सहित बाहरी पर्यटकों को भारी परेशानी तथा दुर्घटना होने का अंदेशा बना रहता है।
स्थानीय निवासी पूर्ण चंद, अमीं चंद, दौलत नेगी, कमलेश नेगी, बलवीर ठाकुर, पवन कुमार, रुमाल चंद व मनोज कुमार दि ने मांग की है कि पुल पर जमा हो रहे पानी की निकासी के लिए कोई भी ठोस उपाय किए जाएं ताकि किसी भी अनहोनी दुर्घटना से बचा जा सके। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुल के ऊपर कंक्रीट बिछाई जाए ताकि लोगों को आवाजाही करने में आसानी हो सके।
गौरतलब है कि मुल्थान – बरोट पुल वर्ष 1995 उहल नदी में आई भयंकर बढ़ के कारण बह गया था जिसके चलते स्थानीय लोगों की मांग पर पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की बदौलत तथा द्रंग के पूर्व विधायक जवाहर ठाकुर के अथक प्रयासों से इस पुल का पुनर्निर्माण हुआ था। जिसका शुभारम्भ 15 अप्रेल 2021 को द्रंग के पूर्व विधायक जवाहर ठाकुर की उपस्थिति में पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा 26 साल बाद किया गया।
उनका कहना है कि लोक निर्माण विभाग द्वारा पुल का निर्माण तो पूरा कर दिया है मगर बारिश के कारण पुल में डाली गई लोहे की चादरों में जगह – जगह अक्सर पानी एकत्रित हो जाता है वहीँ शर्दियों में पानी जम कर बर्फ की शीशे जैसी कठोर परत के कारण आने – जाने वाले राहगीरो को आवाजाही करने में भारी मुशिकलों का समाना करना पड़ता है।
इस संबंध में द्रंग के पूर्व विधायक जवाहर ठाकुर को इस समस्या को सुलझाने के लिए एक प्रस्ताव भी पारित किया गया था मगर उस दौरान इस समस्या का कोई भी हल नहीं हुआ मगर अब उन्होंने द्रंग के विधायक पूर्ण ठाकुर से मांग की है कि लोहे की चादरों के ऊपर कंक्रीट बिछाई जाए।










