सुरभि न्यूज़
कुल्लू, 18 फरवरी
सूत्रधार कला संगम कुल्लू में आजकल 28वीं सूत्रधार होली संध्या को लेकर जोर-शोर से तैयारियाँ चल रही हैं। कार्यक्रम की रूपरेखा को अंतिम रूप देने एवं तैयारियों का जायजा लेने हेतु सूत्रधार भवन के कार्यालय में संस्था अध्यक्ष दिनेश सेन की अध्यक्षता में कार्यकारिणी की विशेष बैठक आयोजित की गई ।बैठक में कार्यक्रम के विभिन्न पहलुओं पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई।
संस्था अध्यक्ष दिनेश सेन ने जानकारी देते हुए बताया कि संस्था द्वारा “28वीं सूत्रधार होली संध्या” का भव्य आयोजन देव सदन कुल्लू के सभागार में 22 फ़रवरी, रविवार को सायं 6:30 बजे से रात्रि 10:00 बजे तक बड़ी धूमधाम के साथ किया जाएगा। इस कार्यक्रम में कुल्लू जनपद में पीढ़ियों से गाई जा रही लोकप्रचलित एवं पारंपरिक होली गीतों सहित सुप्रसिद्ध लेखक, गायक एवं संगीतकार स्वर्गीय राम कुमार कपूर द्वारा रचित होलियों की मधुर प्रस्तुतियाँ दी जाएंगी तथा कार्यक्रम को और अधिक आकर्षक बनाने के उद्देश्य से होली से संबंधित नृत्य प्रस्तुतियाँ भी दी जाएंगी।
कार्यक्रम में प्राचार्य संगीत अकादमी पं० विद्या सागर की रहनुमाई में सूत्रधार के कलाकार तथा सूत्रधार संगीत अकादमी के प्रशिक्षुओं द्वारा होली गीतों की रंगारंग प्रस्तुतियां दी जाएगी, जिसमें निशांत गौतम, जीवन बुडाल, संजय पुजारी, सनी ठाकुर, रोजी, ट्विंकल, धनवंती, करिश्मा, तारा शर्मा, रेखा, चंचल, दुर्गा, रिया, क्षितिज, विजय, दीप इत्यादि कलाकार आपने गायन, वादन व नृत्य का उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे।
कार्यक्रम का सम्पूर्ण मंच संचालन संस्था के वरिष्ठ सदस्य सुंदर श्याम द्वारा किया जाएगा। यह सम्पूर्ण कार्यक्रम सभी कला प्रेमियों के लिए निशुल्क रहेगा। बैठक में संस्था के संरक्षक मण्डल सदस्य राजेन्द्र सूद व युवराज बौध सहित अध्यक्ष दिनेश सेन, उपाध्यक्ष कंवर वीरेंद्र सिंह, महासचिव अतुल गुप्ता, वित्त सचिव जोगेंद्र ठाकुर, सचिव मंजू शर्मा, यशोदा शर्मा व हितेश कुमार गोगी, प्रचार-प्रसार प्रभारी सुंदर श्याम, सह-प्रचार प्रभारी धर्मेन्द्र शर्मा, लोकनृत्य प्रभारी सीमा शर्मा, कार्यकारिणी सदस्य सुबोध सूद व कैप्टन रणधीर सिंह सल्हुरिया, प्राचार्य संगीत अकादमी पं. विद्या सागर, आमंत्रित सदस्य जीवन बुडाल, सनी व संजय तथा प्रबंधक उत्तम चन्द उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि मथुरा एवं वृज की तर्ज पर रघुनाथ जी की नगरी कुल्लू में वैराग्य समुदाय के साथ-साथ आम जनमानस द्वारा होली गायन एवं होली उत्सव मनाने की परम्परा 17वीं शताब्दी से चली आ रही है। समय परिवर्तन के साथ ये समृद्ध परम्पराएँ धीरे-धीरे क्षीण होती जा रही हैं। ऐसे में सूत्रधार कला संगम कुल्लू द्वारा “होली संध्या” के माध्यम से पारम्परिक होली गायन एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन का महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है।










