मनाली में स्नो मैराथन लीग पर सवाल, रनर्स ने लगाए कुप्रबंधन के आरोप, रद्द करनी पड़ी अल्ट्रा रन – संदीप रावत

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सुरभि न्यूज़

मनाली, 22 मार्च

मनाली में आयोजित स्नो मैराथन लीग के दौरान उस समय अप्रिय स्थिति पैदा हो गई जब देश-विदेश से अल्ट्रा रन और वॉकाथन में भाग लेने आए कई रनर्स ने आयोजन में कुप्रबंधन, अधिक शुल्क वसूली और अंतिम समय में जानकारी देने को लेकर आयोजकों पर गंभीर आरोप लगाए।

दुबई, मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता और अहमदाबाद सहित कई शहरों से आए प्रतिभागी इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेने मनाली पहुंचे थे, जिसे सबसे कठिन स्नो रन में से एक बताया गया था। लेकिन कई रनर्स का आरोप है कि उनसे होटल आवास के लिए अधिक पैसे वसूले गए और अटल टनल बंद होने के बाद अंतिम आयोजन स्थल की जानकारी समय पर नहीं दी गई। यह आयोजन पहले लाहौल के सिस्सू में होना था, जिसे बाद में मनाली के पास सेथन में शिफ्ट कर दिया गया।

दुबई से आए एक रनर ने आरोप लगाया कि मध्य पूर्व में युद्ध जैसे हालात का सामना करने के बाद वह इस प्रतियोगिता में भाग लेने भारत पहुंचे, लेकिन भुगतान में बदलाव के कारण उनकी कैटेगरी मैराथन से वॉकाथन कर दी गई, जबकि होटल के शुल्क स्पष्ट नहीं किए गए और अधिक ही रहे। उन्होंने यह भी कहा कि आयोजन स्थल बदलने की सूचना भी अंतिम समय में दी गई।

एक अन्य प्रतिभागी के अनुसार 21 मार्च की रात को रनर्स को देर रात खाना खाने के बाद नए स्थल सेथन जाने के लिए कहा गया। कई रनर्स ने रात लगभग 10 बजे खराब मौसम और कठिन पहाड़ी रास्तों में यात्रा करने को लेकर असहजता जताई। कुछ रनर्स ने बताया कि आयोजकों और टैक्सी चालकों के बीच भुगतान को लेकर विवाद के कारण उन्हें वाहन उपलब्ध नहीं कराए गए, जिसके चलते कई प्रतिभागियों को 21 मार्च की रात अपने रहने की व्यवस्था स्वयं करनी पड़ी, जबकि वे पहले ही आयोजकों को भुगतान कर चुके थे।

फोर्टिस मोहाली से आई मेडिकल टीम ने भी सुबह 5 बजे होने वाली दौड़ से पहले रात में यात्रा न करने की सलाह दी और बताया जाता है कि टीम उसी रात कार्यक्रम स्थल छोड़कर वापस चली गई।

हैदराबाद, कोलकाता और मुंबई से आए रनर्स ने भी व्यवस्थाओं पर असंतोष जताया और कहा कि वे अल्ट्रा इवेंट में भाग नहीं ले सके तथा खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। कुछ प्रतिभागी अब आयोजकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पर भी विचार कर रहे हैं।

इस बीच, लेह से आए भारतीय सेना की लद्दाख स्काउट्स के केवल चार रनर्स ही किसी तरह आयोजन स्थल तक पहुंच पाए और उन्होंने ही प्रतियोगिता में भाग लिया।

दिल्ली और अन्य स्थानों से आए स्वयंसेवकों को भी अचानक हुए बदलाव और असुविधाजनक परिस्थितियों के कारण काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। कुछ स्वयंसेवकों ने भी आयोजन प्रबंधन पर सवाल उठाए।

कार्यक्रम के दिन 50 किलोमीटर अल्ट्रा रन और वॉकाथन को आखिरकार रद्द करना पड़ा क्योंकि कई रनर्स ने लीग का बहिष्कार कर दिया। केवल भारतीय सेना के चार प्रतिभागी ही स्थल तक पहुंचे, बताया जाता है कि वे आधिकारिक कारणों से वहां पहुंचे थे।

इसी आयोजन के दौरान आयोजित स्नो ट्रेल डॉग रेस को लेकर भी आलोचना हुई। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि मुंबई जैसे शहरों से लाए गए कुत्तों को लगभग 9000 फीट की ऊंचाई और 2–3 फीट गहरी बर्फ में दौड़ने में कठिनाई हुई, जिससे पशु कल्याण को लेकर भी सवाल उठे।

इस पूरे घटनाक्रम ने हाई-एल्टीट्यूड खेल आयोजनों में प्रबंधन, प्रतिभागियों की सुरक्षा, शुल्क में पारदर्शिता और समुचित योजना को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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