सुरभि न्यूज़
डॉ प्रियंका सौरभ, चंडीगढ़
काव्य कदम साहित्यिक संस्था हरियाणा द्वारा मासिक कवि सम्मेलन प्रदेशाध्यक्ष बलवान सिंह ‘मानव’ की अध्यक्षता में टी. एस. सेंट्रल स्टेट लाइब्रेरी सेक्टर-17 चंडीगढ़ में आयोजित किया गया।
कवि सम्मेलन में मुख्य अतिथि कवयित्री अनीता नरवाल और सिरसा से विशेष आमंत्रित अतिथि कोमल स्वामी ने शिरकत की। मंच संचालन सीमा चहल ‘पुष्प’ द्वारा किया गया। मशहूर ग़ज़लकार राजन तेजी ‘सुदामा’ ने अपनी खूबसूरत ग़ज़ल ‘बाद तेरे आज मेरी ज़िन्दगी को क्या हुआ है, तमस अब हर जगह ये रोशनी को क्या हुआ है’ प्रस्तुत कर भावविभोर किया जबकि अध्यक्ष बलवान सिंह ‘मानव’ ने ‘अपने में ही बह गया हूँ मै, आधा था आधा ही रह गया हूँ मैं’ सुनाकर सबको भावुक कर दिया।
मुख्य अतिथि अनीता नरवाल ने अपनी ग़ज़ल ‘खुद ही महफिल वो सजा लेंगे हमारा क्या है, लाज अपनी वो बचा लेंगे हमारा क्या है’ पेश कर सबका मन मोह लिया जबकि कवि वीरेंद्र राय ने ‘बरसों बाद की वह बरसात’ सुनाकर पुरानी यादों को ताज़ा किया। ममता ग्रोवर ने ‘पतझड़ चली गई आकर बहार अभी बाक़ी है, मकाँ को घर बनाने का ख़ुमार अभी बाक़ी है’ सुनाकर खूब तालियां बटोरीं जबकि हास्य कवि अश्वनी मल्होत्रा ‘भीम’ ने ‘सुबह सवेरे एक दिन मैं गली में जा रहा था, दूर खड़ा एक कुत्ता मुझे ही देखे जा रहा था’ हास्य कविता सुनाकर श्रोताओं को लोटपोट किया।
स्मृति शर्मा ने अपनी ओजस्वी रचना ‘ये नन्हा दीपक जो जल रहा है घने अँधेरे को खल रहा है’ सुनाकर श्रोताओं में जोश भर दिया जबकि युवा कवयित्री करिश्मा वर्मा ‘किट्टू’ ने मां पर सुंदर रचना ‘वो एक हस्ती भगवान से कम नहीं है, उनका आँचल आसमान से कम नहीं है’ मां याद करते हुए सबको मंत्रमुग्ध कर दिया।
देवयानी पुरी ने ‘यूँ तो आज बहुत आधुनिक हो गए हैं हम, लेकिन इस आधुनिक समाज से पूछती हूँ कि मेरा अस्तित्व क्या है’ आधुनिक पाश्चात्य संस्कृति पर तंज कसा जबकि संदीप भगवाड़िया ने दर्दभरी ग़ज़ल ‘मेरे जख्मों की तरफ तू भी नजर करके तो देख, है गुजरता किस तरह तन्हा सफर करके तो देख’ दर्दभरी ग़ज़ल प्रस्तुत कर हाल में खामोशी छा गई।
शशि जरोड़िया ने खूबसूरत ग़ज़ल ‘तुझे क्या ख़बर मेरे हमसफ़र मेरा मरहला कोई और है’ कहकर वाहवाही लूटी, वहीं प्रभात पांडेय ने मुक्तक ‘धीरे-धीरे सही चल रही ज़िंदगी, तेरे अभाव में जल रही ज़िंदगी’ सुनाकर सोचने पर मजबूर किया। कुमार शशि ‘गुरु’ ने अधूरे प्रेम पर ‘एक कहानी ऐसी भी…जो शुरु तो हुई थी मुस्कुराहटों से’ सुनाकर प्रेम रस की बौछार कर दी। विश्वजीत सिंह शब्द ने समय के दो राहों पर खड़ा हूं, एक ओर जाऊं तो दर्शन छूटे, दूसरी ओर जाऊं तो मनन छूटे। समय पर बहुत सुंदर प्रस्तुति दी
मीना जागलान ने ‘मैं कोई बड़ा शब्द नहीं, बस एक सच्ची भावना हूँ’ अपनी रचना प्रस्तुत कर सबको मन्त्रमुग्ध किया जबकि सिरसा से विशेष अतिथि के रूप में पधारी कवयित्री कोमल स्वामी ने वतन चाहे मेरा हो किसी ओर का, कोई किसी के विरुद्ध युद्ध न हो देशभक्ति पर अपनी रचना व्यक्त की।
इस अवसर पर पाल अजनबी, नीरजा शर्मा, राकेश सिंह, नवनीत सिंह बक्शी, ममता ग्रोवर आदि अन्य कवियों ने भी अपनी रचनाओं से खूब शमां बांधा। संस्था के प्रदेश प्रवक्ता राम कुमार वर्मा ‘राम’ और पूर्व कोषाध्यक्ष राज गुणपाल ‘बालकिया’ ने सम्मेलन की सफलता पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दीं। अंत में, रचनाकार अतिथियों, टी. एस. लाइब्रेरी की अध्यक्षा नीजा सिंह और अन्य साहित्यकारों को सम्मानित किया गया। श्रोताओं ने साहित्य रसास्वादन का खूब आनंद उठाया।











