सुरभि न्यूज़
प्रताप अरनोट, कुल्लू
अखिल भारतीय साहित्य परिषद हिमाचल प्रदेश इकाई के ऊना, बिलासपुर व चंबा तीन जिला इकाइयों ने रामनवमी एवं नव संवत्सर के पावन के अवसर पर कुटुंब प्रबोधन, मातृशक्ति एवं कवि सम्मेलन का आयोजन किया। अखिल भारतीय परिषद की प्रदेशाघ्यक्ष डॉ रीता सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश की सभी जिला इकाइयां रामनवमी एवं नव संवत्सर पर साहित्यिक आयोजन आयोजित कर रही है।
ऊना : प्रदेश सचिव हिमाचल प्रदेश डॉ. इंदु बाला ने बताया कि अखिल भारतीय साहित्य परिषद ऊना इकाई द्वारा नव संवत्सर को आयोजन दो सत्रों में में आयोजित किय गया, जिसमें प्रथम सत्र बच्चों द्वारा मंत्र उच्चारण से प्रारंभ किया गया। तत्पश्चात कविता पाठ, भजन गायन और समूह गान किया गया। द्वितीय सत्र में प्रधान अनीता जसवाल ने मुख्य अतिथि शिरकत की। मुख्य अतिथि ने कुटुंब प्रबोधन पर अपना वक्तव्य रखा जबकि प्रदेश सचिव डॉ इंदु बाला ने मातृशक्ति के बारे में अपने विचार रखे। अतं में सभी ने खड़े होकर हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया गया। सपना जसवाल ने सभी का धन्यवाद किया।
घुमारवीं (बिलासपुर) : घुमारवीं के पेलियो म्यूजियम में भारतीय नव संवत्सर के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय साहित्य परिषद बिलासपुर इकाई की विशेष बैठक और कवि गोष्ठी हुई। आयोजन की अध्यक्षता प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. अनेक राम संख्यान ने की जबकि बृजलाल लखनपाल ने मुख्यातिथि और सुषमा खजुरिया ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की। सर्वप्रथम कुटुंब प्रबंधन विषय पर केशव शर्मा, सुषमा खजुरिया, कैप्टन सुरेंद्र शर्मा, शीला सिंह, बृजलाल लखनपाल, डॉ. अनेक राम संख्यान सहित विभिन्न वक्ताओं ने विस्तार पूर्वक चर्चा की गई।
कुटुंब प्रबंधन चर्चा कहा कि कुटुंब केवल एक शब्द नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा है। यह वह आधारशिला है, जिस पर समाज, संस्कार और सभ्यता का भव्य भवन खड़ा होता है। भारतीय परंपरा में परिवार को संस्कारों की प्रथम पाठशाला कहा गया है। यही वह स्थान है, जहां मनुष्य अपने जीवन के मूल्यों, प्रेम, त्याग, सहयोग, अनुशासन और सम्मान को सीखता है। जब परिवार सुदृढ़ होता है, तब समाज सशक्त बनता है और राष्ट्र उन्नति के पथ पर अग्रसर होता है।
कवि गोष्ठी में शमशेर सिंह चंदेल, सुनील शर्मा, वीणा वर्धन, कैप्टन सुरेंद्र शर्मा, शीला सिंह, केशव शर्मा, बृजलाल लखनपाल, सुषमा खजुरिया व डॉ. अनेक राम संख्यान कवियों ने रचनाएं प्रंस्तूत की। जिला सचिव शीला सिंह ने मंच संचालन का कुशल परिचय देते हुए सभी का धन्यवाद किया।
चंबा : अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला चंबा इकाई ने रामनवमी एवं नव संवत्सर के पावन अवसर पर सलूनी उपमंडल के अंतर्गत प्रसिद्ध धार्मिक एवं रमणीय पर्यटन स्थल सारोला नाग मंदिर में जिला स्तरीय कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। यह आयोजन केवल एक साहित्यिक कार्यक्रम न होकर भारतीय संस्कृति, परंपरा और नव चेतना का एक जीवंत उत्सव बनकर उभरा। आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के कोने-कोने से आए 16 प्रख्यात कवियों एवं दो प्रतिभाशाली बाल कवियों ने अपनी ओजस्वी, भावपूर्ण और संवेदनशील कविताओं के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का मूल उद्देश्य भारतीय नव वर्ष के वैज्ञानिक आधार, सांस्कृतिक महत्व एवं पारंपरिक मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाना था। इस अवसर पर समारोह की मुख्य अतिथि डॉ. कविता बिजलवान ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में सामाजिक समरसता कुटुंब प्रबोधन एवं सनातन संस्कृति के महत्व को अत्यंत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनके विचारों ने उपस्थित जनसमूह के हृदय में सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक एकता का भाव जागृत किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार सुभाष साहिल ने की जबकि मंच संचालन किरण कुमार वशिष्ठ ने अत्यंत कुशलता, सहजता और प्रभावशाली शैली में किया। इस आयोजन को गढ़ माता साहित्य मंच, सलूनी के सहयोग से संयुक्त तत्वावधान में संपन्न किया गया, जिससे स्थानीय स्तर पर साहित्यिक गतिविधियों को व्यापक स्वरूप देने में सफलता मिली।
कवि गोष्ठी में हिंगराज श्चिरागश्, रोशन लाल, महाराज सिंह परदेसी, श्याम अजनबी, बालम सिंह, किशोर कालिया, सुभाष चंद कसाव, करे सिंह राजोरिया, फिरोज कुमार रोज तथा सोनी चिरही प्रतिष्ठित कवियांे ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। विशेष रूप से बाल कवि अभिनव सूर्य एवं वीरांशी टंडन की प्रस्तुतियों ने यह सिद्ध कर दिया कि साहित्य की ज्योति नई पीढ़ी में भी समान रूप से प्रज्वलित है।
दोपहर 12 बजे प्रारंभ होकर लगभग 3 बजे तक साहित्यिक आयोजन में लगभग 200 से अधिक मातृ शक्ति की गरिमामयी उपस्थिति तथा 500 से अधिक श्रोताओं की सहभागिता ने जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान कर दिया। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों एवं युवाओं की सक्रिय भागीदारी ने यह प्रमाणित किया कि साहित्य आज भी समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम है। समारोह के समापन पर सभी प्रतिभागी कवियों को स्मृति चिन्ह प्रदान कर किया। जिला चंबा की दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों, सीमित संसाधनों एवं आपसी दूरियों (50 से 100 किलोमीटर तक) के बावजूद परिषद के सभी सदस्यों ने जिस समर्पण, एकजुटता और साहित्यिक निष्ठा का परिचय दिया, वह अत्यंत प्रेरणादायक है।









