सुरभि न्यूज़
ख़ुशी राम ठाकुर, बरोट
जिला मण्डी के जोगिन्द्र नगर में पहली अप्रेल को आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय लघु शिवरात्रि में शरीक होने के लिए प्रतिवर्ष की भान्ति इस वर्ष भी चौहार घाटी के अराध्य देव गहरी गलू सजधज कर अपने लाव लाशकर तथा अपने पच्चास देवलुओं सहित अपने मूल स्थल गलू से निकल कर गाँव गलू, ढराँगण, लक्कड़ बाज़ार तथा बरोट बाज़ार से होते हुए पालाखुंडी गांव में रात्रि ठहराव किया।
देव गहरी गलू के मुख्य गुर विपतू राम ने बताया कि 30 मार्च को पालाखुंडी गाँव में रात्रि करने के बाद मंगलवार 31 मार्च को सुबह वहां से रवाना होकर जोगिन्द्र नगर के हराबाग में ग्रामीणों आशीर्वाद देते हुए रात्रि ठहराव करने के बाद पहली अप्रेल को मेला मैदान जोगिन्द्र नगर पहुंचकर लघु शिवरात्रि राज्य स्तरीय मेलें शरीक होंगे।
मेले की समाप्ति के बाद वापिस पर ग्रामीणों द्वारा आयोजित देव जातर स्वीकारते हुए लगभग डेढ़ माह बाद पूरे विधिविधान के साथ अपने मूल स्थल गलू में फिर से विराजमान हो जाएंगे। इस मौके पर देवा गहरी गलू के मुख्य गुर विपतू राम, दुमच बलदेव सिंह, पुजारी श्याम सिंह सहित पच्चास देवलु उपस्थित रह रहे हैं। इसके साथ छोटाभंगाल घाटी के अराध्य देव गहरी शंगरेहड़ भी पहली बार 31 मार्च को मंगलवार को अपने मूल स्थल शंगरेहड़ से सजधज कर अपने लाव लाशकर तीस देवलुओं सहित पहली अप्रेल राज्य स्तरीय लघु शिवरात्रि में शरीक होने के लिए रवाना हो गए हैं।
देव गहरी ट्रस्ट शंगरेहड़ के अध्यक्ष व मुख्य गुर भाग सिंह ने बताया कि देव गहरी शंगरेहड़ 31 मार्च को ही जोगिन्द्र नगर में पहुंचकर रात्रि ठहराव कंरेगे तथा पहली अप्रेल को जोगिन्द्र नगर में राज्य स्तरीय लघु शिवरात्रि मेले में भाग लेने के लिए उपस्थित हो होंगे। मेला समाप्ति के बाद देव गहरी शंगरेहड़ वापिसी के दौरान जोगिन्द्र नगर क्षेत्र के विभिन्न गाँवों में गाववासियो द्वारा आयोजित देव जातरों को स्वीकारेंगे। मुख्य गुर भाग सिंह ने बताया कि उस दौरान देव गहरी शंगरेहड़ जोगिन्द्र नगर के बालक रूपी, जिमजिमा, काथला आदि गाँववासियों द्वारा आयोजित देव जातर में भाग लेगे तथा उन्हें अपना आशिर्बाद देंगे। जिसके चलते देव गहरी शंगरेहड़ लगभग एक सप्ताह के बाद ही पूरे विधिविधान के साथ अपने मूल स्थल शंगरेहड़ में फिर से विराजमान हो जाएंगे। इस मौके पर मुख्य गुर भाग सिंह के साथ ट्रस्ट के उपाध्यक्ष रामधन मंदिर कमेटी के प्रधान राम सरन, उपप्रधान भीम सिंह, नम्बरदार महेश्वर सिंह सहित तीस देवलु उपस्थित हैं।












