साहित्य : अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला सोलन इकाई ने कुटुंब प्रबोधन एवं वंदे मातरम् शताब्दी पर साहित्यिक आयोजन किया आयोजित 

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सुरभि न्यूज़

प्रताप अरनोट, सोलन : 01 अप्रैल

अखिल भारतीय साहित्य परिषद जिला सोलन इकाई ने कुटुंब प्रबोधन विमर्श एवं वंदे मातरम् शताब्दी पर एक साहित्यिक आयोजन  आयोजित किया गया। साहित्यिक आयोजन की अध्यक्षता जिला परिषद अध्यक्ष ज्ञान शर्मा ने शिरकत की जबकि मीरा तनवर ने मंच संचालन का कार्य कुशलता का परिचय दिया।

कार्यक्रम का आयोजन दो सत्रों में आयोजित किया जिसके पहले सत्र में कुटुंब प्रबोधन एवं वंदे मातरम् शताब्दी विषय पर विमर्श किया जबकि दूसरे सत्र में काब्य गोष्ठी आयोजित की गई जिसमें जिला भर से आए कवियों ने भाग लिया। आयोजन में मुख्य अतिथि गोपाल शर्मा तथा विशिष्ट अतिथि पुरुषोत्तम ने मुख्य रूप से शिरकत की।

प्रथम सत्र में कुटुंब प्रबोधन एवं वंदे मातरम् शताब्दी विषय पर विमर्श किया गया जिसमें मुख्य वक्ता डा. अजय शर्मा ने कुटुंब प्रबोधन तथा वंदे मातरम् के 100 वर्ष विषय पर अत्यंत सारगर्भित एवं विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में कहा कि कुटुंब केवल सामाजिक इकाई नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति का मूल आधार है। परिवार के माध्यम से ही संस्कार, नैतिकता और राष्ट्रभक्ति का बीजारोपण होता है।

उन्होंने वंदे मातरम् के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रवादी महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन की प्रेरणा और राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा कि आज के परिवर्तित सामाजिक परिवेश में कुटुंब प्रबोधन की आवश्यकता और भी अधिक बढ़ गई है, ताकि समाज में नैतिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ किया जा सके।

मुख्य अतिथि गोपाल शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि ऐसे कार्यक्रम समाज को दिशा देने का कार्य करते हैं और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ते हैं। विशिष्ट अतिथि पुरुषोत्तम ने परिषद के इस प्रयास को राष्ट्रहित में एक सशक्त पहल बताते हुए इसकी सराहना की।

द्वितीय सत्र में कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित सभी साहित्यकारों ने अपनी-अपनी रचनाओं का प्रभावशाली पाठ किया। देशभक्ति, संस्कृति, परिवार और सामाजिक सरोकारों से ओतप्रोत कविताओं ने श्रोताओं को भावविभोर किया।

इस अवसर पर मुख्य रूप से दीनानाथ शर्मा, अजय, हीरा दत्त, शीला, राजीव, मोनिका एवं मीरा सहित अनेक साहित्यकार उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित श्रोताओं एवं अतिथियों ने इस आयोजन की भूरी-भूरी प्रशंसा करते हुए इसे राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सशक्त कड़ी बताया।

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