सुरभि न्यूज़
शिमला, 01 अप्रैल
मोहिंद्र प्रताप सिंह राणा/ग्राम परिवेश
वित्तीय वर्ष 2025–26 में ऊर्जा क्षेत्र में अपनी सुदृढ़ उपस्थिति दर्ज कराते हुए एसजेवीएन ने विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में एक नया स्वर्णिम अध्याय रच दिया है। अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भूपेंद्र गुप्ता के अनुसार, कंपनी के प्रचालनरत विद्युत स्टेशनों ने सामूहिक रूप से 13,302 मिलियन यूनिट विद्युत उत्पादन कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है, जो संगठन की तकनीकी दक्षता और प्रचालन कुशलता का प्रत्यक्ष प्रमाण है।
इस उपलब्धि के केंद्र में 1500 मेगावाट का नाथपा झाकड़ी जलविद्युत स्टेशन रहा, जिसने 7,506.617 मिलियन यूनिट उत्पादन के साथ अपने इतिहास का दूसरा सर्वाधिक वार्षिक उत्पादन दर्ज किया। यही नहीं, मार्च 2026 में इस स्टेशन ने 150 बिलियन यूनिट के कुल उत्पादन का ऐतिहासिक आंकड़ा पार कर दीर्घकालिक विश्वसनीयता और स्थायित्व की नई मिसाल कायम की।
412 मेगावाट का रामपुर जलविद्युत स्टेशन भी इस उपलब्धि में पीछे नहीं रहा। इसने 2,108.034 मिलियन यूनिट का अब तक का सर्वाधिक वार्षिक उत्पादन दर्ज करते हुए अपने 11 वर्षों के इतिहास में पहली बार 2100 मिलियन यूनिट के आंकड़े को पार किया—जो इसके प्रचालन उत्कृष्टता का प्रतीक है।
वहीं, 60 मेगावाट का नैटवार मोरी जलविद्युत स्टेशन, अपने ओएंडएम के दूसरे वर्ष में ही 310.37 मिलियन यूनिट उत्पादन कर अपनी डिज़ाइन क्षमता से 17 प्रतिशत अधिक प्रदर्शन करते हुए उभरती संभावनाओं का सशक्त संकेत दे रहा है।
नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी एसजेवीएन ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई है। 1000 मेगावाट का बीकानेर सौर ऊर्जा स्टेशन 19 मार्च 2026 को एक बिलियन यूनिट उत्पादन का आंकड़ा पार कर हरित ऊर्जा की दिशा में कंपनी की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।
भूपेंद्र गुप्ता ने इस सफलता के लिए कर्मचारियों के समर्पण की सराहना करते हुए भारत सरकार, विद्युत मंत्रालय, संबंधित राज्य सरकारों एवं सभी हितधारकों के सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पहली परियोजना के कमीशनिंग के बाद से ही कंपनी निरंतर राष्ट्र की ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति करते हुए विकास के नए आयाम स्थापित कर रही है।
निदेशक (कार्मिक) अजय कुमार शर्मा ने इस उपलब्धि का श्रेय कर्मचारियों की प्रतिबद्धता को देते हुए कहा कि इन परियोजनाओं ने न केवल ऊर्जा उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि परियोजना क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
निदेशक (वित्त) पार्थजित डे ने भी इन उपलब्धियों को संगठन की सुदृढ़ प्रचालन क्षमता और देश के ऊर्जा क्षेत्र में उसके बढ़ते योगदान का परिचायक बताया।
नवरत्न सीपीएसई के रूप में एसजेवीएन, वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करने के भारत सरकार के लक्ष्य में सक्रिय और प्रतिबद्ध भागीदारी निभाने की दिशा में निरंतर अग्रसर है।













