सुरभि न्यूज़
चांदपुर /बिलासपुर, 07 अप्रैल
एशिया में विख्यात कंदरौर पुल पर गत दिन कल्याण कला मंच बिलासपुर के कला और कलमकारों के तराने कुछ ऐसे गूंजे कि समूचा क्षेत्र सोचने पर मजबूर हो गया।
ब्राइट फ्यूचर पब्लिक स्कूल के सभागार में आयोजित हुई संगोष्ठी में तीस से अधिक कला कलम कारों ने अपनी रचनाओं से भाव विभोर कर दिया। मंच की अध्यक्षा तृप्ता कौर मुसाफिर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की जबकि महासचिव बाबू राम धीमान ने दिलकश अंदाज में मंच की कार्यवाही को संचालित किया। विशिष्ट अतिथियों में डा लेख राम शर्मा, गोदावरी ठाकुर, हमीद खान, और डा अनेक राम संख्यान शोभायमान रहे।
कार्यक्रम का आगाज करते हुए बुद्धि सिंह चंदेल ने याद आता है वो गुजरा हुआ जमाना अपनी रचना से कार्यक्रम का आगाज किया जबकि से आचार्य जगदीश सहोता ने मैं नहीं मेरा नहीं ये जग है कविता सुनाई। कर्मवीर कंडेरा ने तू छड़्या कहदा मुंडे ने फेहर ला लया, लश्करी राम ने महलां दे थाले थाले जानदेया ओ जवाना, रविंद्र शर्मा ने बहादुरपुर धार के भाई क्या कहने, तेज राम तेजस ने मुझसे काफिर को तेरे, श्याम सुंदर सहगल ने कभी हंसी आए तो कभी रोना, जीतराम सुमन ने छड़ी दे सौना टाइम माडा आया ओ पई या, हमीद खान ने जिनके होंठों पे हंसी का पैगाम नहीं, धर्म चंद धीमान ने मशाल की लौ है करता, बृज लाल लखनपाल ने हु नी से दो चार गल्ला, शिव नाथ सहगल ने सुंदर गीत सुहानी रात ढल चुकी न जाने तुम कब आओगे सुना कर सभी को भाव विभोर कर दिया।
रामपाल डोगरा ने आंखों का चित्रण करती कविता, पूजा कुमारी ने गीत सावन आया बादल छाए, सुशील पुंडीर परिंदा ने कविता मौसम हुआ बेमौसम जनाब, राकेश मनहास ने गीत सोचेंगे तुम्हें प्यार करें या ना करें, स्कूली छात्र मनीष ने सुंदर गीत साथिया _बेलिया _तेरे बिन, कैप्टन सुरेन्द्र शर्मा ने कविता में कला कल्याण हूं मैं बाबा जी का मंच हूं, अमरनाथ धीमान ने बीता जमाना याद रहा सह लिया सब जो तुमने कहा, मंच के महासचिव बाबू राम धीमान ने पहाड़ी में दामीं घाटी की सुरीली बोली में कविता, मंच की प्रधान तृप्ता कौर मुसाफिर ने पंजाबी में मैंनों भेज देवो धरम साल उत्ते भजां गा सत करतार, मंच के निदेशक सुरेन्द्र मिन्हास ने कविता क्या मेरा शहर फिर से मुस्कुराएगा सुना कर श्रोताओं को बांध कर रख दिया।
मंचासीन विशिष्ट अतिथियों में सर्वप्रथम डा अनेक राम संख्यान ने हम यूं ही तेरी तस्वीर बनाते रहेंगे गा कर विभोर कर दिया। तत्पश्चात गोदावरी ठाकुर ने मंच की गतिविधियों की तारीफ करते हुए उन्हें सम्मानित करने के लिए धन्यवाद किया, डा लेख राम शर्मा जी ने कहलूरी शब्दों के विलुप्त होने की आशंका व्यक्त करते हुए बुद्धिजीवियों से अनुरोध किया कि अपने बच्चों से आम बोल चाल में पहाड़ी में बात करें, साथ ही इन्होंने कहलूर की बोली पर मंच के प्रयासों की प्रशंसा की और अपनी रचना भी कहलूरी में यूं कही दादे रा किरडू बाबे जो सुना कर खूब तालियां बटोरी। अंत में ब्राइट फ्यूचर पब्लिक स्कूल के एम डी सुरेन्द्र ठाकुर ने उपस्थित सभी बुद्धिजीवियों का स्कूल परिसर में पधारने का धन्यवाद किया।














