प्रदेश के 26 महाविद्यालयों में चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम, 50 कॉलेजों में डिजिटल रूपांतरण की पहल – रोहित ठाकुर 

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सुरभि न्यूज़

प्रताप अरनोट, कुल्लू : 19 सितंबर

हिमाचल प्रदेश में उच्चतर शिक्षा को गुणवत्तापूर्ण, आधुनिक, कौशलयुक्त और रोजगारपरक बनाने पर जोर दिया जा रहा है। शिक्षा को केवल डिग्री तक सीमित रखने के बजाय इसे ज्ञान, कौशल, अनुसंधान, नवाचार, रोजगार और उद्यमिता से जोड़ना समय की आवश्यकता है। यह बात शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने शनिवार को कुल्लू के देव लोक रिसोर्ट बड़ाग्रां में उच्चतर शिक्षा विभाग एवं राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय प्राचार्य सम्मेलन के शुभारंभ अवसर पर कही। मनाली के विधायक भुवनेश्वर गौड़ इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 उच्चतर शिक्षा में व्यापक बदलाव की आधारशिला है। प्रदेश के 26 राजकीय महाविद्यालयों में चार वर्षीय स्नातक डिग्री कार्यक्रम शुरू किया गया है। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को शोध और उच्च अध्ययन के नए अवसर मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में प्रश्न पूछने, अनुसंधान, नवाचार और समस्याओं के समाधान की क्षमता विकसित करना उच्चतर शिक्षा का प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए।

रोहित ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में वर्तमान में 142 राजकीय महाविद्यालय हैं। विभिन्न श्रेणियों में 5,071 नियुक्तियां, पदोन्नतियां एवं नियमितीकरण किए गए हैं, जिनमें 144 प्राचार्य तथा 534 एसोसिएट प्रोफेसर/सहायक प्रोफेसर के पद शामिल हैं। उन्होंने कहा कि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है और हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग ने सहायक आचार्य के 373 पदों का विज्ञापन जारी किया है।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 में 50 राजकीय महाविद्यालयों में डिजिटल रूपांतरण की पहल की गई है। इनमें डिजिटल पुस्तकालय, अध्ययन केंद्र, वर्चुअल एवं लाइव कक्षाएं, आईसीटी प्रयोगशालाएं और सीसीटीवी जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। उन्होंने प्राचार्यों से डिजिटल संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल के साथ शिक्षकों की क्षमता विकास और विद्यार्थियों की डिजिटल साक्षरता पर ध्यान देने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में डिग्री के साथ कौशल और व्यावहारिक अनुभव भी जरूरी है। वर्ष 2017-18 में 12 महाविद्यालयों से शुरू हुआ व्यावसायिक स्नातक पाठ्यक्रम अब 20 राजकीय महाविद्यालयों तक पहुंच चुका है। पिछले पांच वर्षों में इससे 1,914 विद्यार्थियों को रोजगार मिला है। इसके अलावा 19 और राजकीय महाविद्यालयों में यह पाठ्यक्रम शुरू करने तथा शिक्षुता आधारित डिग्री कार्यक्रम के विस्तार पर कार्य किया जा रहा है।

रोहित ठाकुर ने कहा कि महाविद्यालयों में कौशल प्रयोगशालाओं, इंटर्नशिप केंद्रों, रोजगार प्रकोष्ठों तथा नवाचार एवं उद्यमिता केंद्रों को मजबूत किया जा रहा है। भविष्य की तकनीक एवं नवाचार प्रयोगशालाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और डिजिटल स्वचालन जैसी तकनीकों से जोड़ा जाएगा।

शिक्षा मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री उच्चतर शिक्षा अभियान (पीएम-उषा) के तहत हिमाचल प्रदेश के लिए 179.75 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इससे विश्वविद्यालयों और चयनित महाविद्यालयों में आधारभूत ढांचे एवं संस्थागत विकास को मजबूत किया जा रहा है। चयनित जिलों में छात्राओं के लिए छात्रावास निर्माण को भी उच्चतर शिक्षा को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

उन्होंने कहा कि आर्थिक कठिनाई किसी योग्य विद्यार्थी की उच्चतर शिक्षा में बाधा नहीं बननी चाहिए। वाईएस परमार विद्यार्थी ऋण योजना के तहत अब तक 147 जरूरतमंद विद्यार्थियों को लाभ प्रदान किया गया है।

शिक्षा मंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 से राजकीय महाविद्यालयों में रैंकिंग एवं पुस्तकालय श्रेणी निर्धारण व्यवस्था शुरू की गई है। इसका उद्देश्य केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि स्व-मूल्यांकन, गुणवत्ता सुधार और संस्थागत विकास को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री ने अंतर-महाविद्यालय रैंकिंग पुस्तिका का विमोचन किया तथा विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले महाविद्यालयों को सम्मानित किया।

टीआर-1 श्रेणी में राजकीय महाविद्यालय हमीरपुर प्रथम, आरकेएमबी शिमला द्वितीय और संजौली तृतीय रहे। टीआर-2 में ठियोग प्रथम, भोरंज द्वितीय और सुन्नी तृतीय तथा टीआर-3 में दाड़लाघाट प्रथम, धनेटा द्वितीय और संगड़ाह तृतीय स्थान पर रहे। पुस्तकालय रैंकिंग में हमीरपुर, रामपुर, जोगिन्दरनगर और धर्मशाला महाविद्यालय समान स्थान पर रहे।

रोहित ठाकुर ने कहा कि वर्ष 2025 से राजकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों एवं प्राचार्यों के लिए राज्य शिक्षक पुरस्कार शुरू किया गया है। इसका उद्देश्य शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों एवं प्राचार्यों के योगदान को पहचान और सम्मान देना है।

उन्होंने कहा कि सरकार नीतियां और संसाधन उपलब्ध करा सकती है, लेकिन इन्हें धरातल पर प्रभावी परिणामों में बदलने में प्राचार्यों और शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। लक्ष्य केवल महाविद्यालयों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि ऐसे संस्थान विकसित करना है जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन, नवाचार, कौशल, अनुसंधान और मानवीय मूल्यों का वातावरण हो।

इससे पहले उच्चतर शिक्षा निदेशक डॉ. सुनीता सिंह ने मुख्यातिथि का स्वागत किया और प्रदेश में उच्चतर शिक्षा के विस्तार एवं उपलब्धियों की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि दो दिवसीय सम्मेलन में उच्चतर शिक्षा से जुड़े विभिन्न विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श होगा तथा सम्मेलन से तैयार होने वाली कार्ययोजना उच्चतर शिक्षा को नई दिशा देगी।

इस अवसर पर कांग्रेस जिला अध्यक्ष सेस राम आजाद, कांग्रेस सचिव देवेंद्र नेगी, अतिरिक्त निदेशक राकेश कुमार, संयुक्त निदेशक प्रदीप कुमार, सुशील बस्सी सहित उच्चतर शिक्षा विभाग के अधिकारी और प्रदेशभर के विभिन्न महाविद्यालयों के प्राचार्य उपस्थित रहे।

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