सुरभि न्यूज़ ब्यूरो
हेम सिंह ठाकुर
“मैं, एक योद्धा हूं, आम घर से निकला हुआ योद्धा, कुछ लोग राजनैतिक लाभ उठाने की कर रहे है कोशिश, वो सब नाकाम रहेंगे“ यह शब्द सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मौजूदा सियासी घटनाक्रम शुरू होने पर कहे थे।
तीस साल की कठिन तपस्या के बाद सत्ता के शिखर तक पहुंचे सुखविंदर सिंह सुक्खू मौजूदा सियासी संग्राम में योद्धा बनकर उभरे हैं। अपनो की दगाबाजी से राज्यसभा सीट गंवाने के बाद सूचना तंत्र की नाकामी को बेझिझक स्वीकारना, ऐसा एक साहसी योद्धा ही कर सकता है।
खराब माली हालत, प्राकृतिक आपदा से त्रस्त प्रदेश को उबारने में डटे मुख्यमंत्री के पीछे कुछ ताकतें उनके खिलाफ साज़िश रचते रहे। अवसर की ताक में बैठे इन षड़यंत्रकारियों ने राज्यसभा चुनाव में ’खेला’ करने का असफल प्रयास किया। संस्कृत में ट्वीट करने वाले विधायक ने भाजपा की शह पर बड़सर और गगरेट के पंडितों को बरगलाया। जिसमें उन्हें पहले से खार खाये राणा और भुट्टो को साथ लिया। लाहुल स्पीति के विधायक भी साजिश में शामिल हो गये।
चौतरफा घिरे मुख्यमंत्री ने सबसे पहले पूरे प्रकरण से प्रभारी शुक्ला को आउट किया। जिन्होंने प्रदेश में सत्ता के दो ध्रुव खड़े किए और आलाकमान को हमेशा ग़लत फीडबैक दी। आलाकमान ने कर्नाटक के डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार को स्ट्रांग मैसेज के साथ शिमला भेजा। डीके ने सभी विधायकों को सिसिल में तलब किया और बारी बारी सबको पूछा। पूरे घटनाक्रम के सूत्रधार ने सुबह सवेरे अपने घर पर मीडिया को बुलाया और इमोशनल कार्ड खेलकर इस्तीफे की घोषणा कर डाली। ऐसा लगने लगा था कि अब सरकार शायद ही बच पाए।
इसी बीच ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू आब्जर्वर के समक्ष अपना पक्ष रखने के बाद तारादेवी मंदिर में माथा टेकने चले गए। उनके पीछे-पीछे लगभग पूरी कैबिनेट वहां पहुंच गई। वहां पर ग्रुप फोटो खिंचवाकर उन्होंने कड़ा संदेश अपने राजनीतिक विरोधियों तक पहुंचा दिया। डीके ने इसकी तस्दीक करने के लिए नंबर बताने को कहा, तो मुख्यमंत्री ने विधायकों को ब्रेक फास्ट पर ओक ओवर बुलाया। सभी 32 के 32 विधायक वहां पहुंच गए और आलाकमान का वरदहस्त हासिल कर लिया। सुक्खू के इस वार से बागी पस्त पड़ गये और वह निर्विवाद योद्धा बनकर उभरे।
हालांकि भीषण संग्राम होना अभी बाकी है। जिसके लिए उन्हें सबको साथ लेकर चलना होगा। यह तय है कि हिमाचल में कांग्रेस की सियासत अब सुखविंदर सिंह सुक्खू के इर्द-गिर्द ही चलेगी और वही वर्तमान में कांग्रेसी राजनीति के धुरी हैं।
इस पूरे प्रकरण से विरोधियों को अब समझ लेना चाहिए कि सुखविंदर सिंह सुक्खू को राहुल गांधी का संरक्षण है और वहीं आलाकमान की पसंद भी है। साथ ही विक्रमादित्य सिंह को भी सीख लेनी चाहिए, कि उनको उकसाने वाले अब बाहर निकल चुके हैं। उनका वक्त भी आएगा, परंतु फिलहाल उनका राजनीतिक भविष्य भी सुखविंदर सिंह सुक्खू के साथ ज्यादा सुरक्षित है। भाजपा में शामिल होंगे, तो वहां भविष्य की गारंटी नहीं है। यूथ आइकन की इमेज भी तभी कायम रहेगी, जब वह सरकार में अपनी छाप छोड़ेंगे।
इसके साथ ही कांग्रेस आलाकमान को भी मौजूदा घटनाक्रम से सबक लेते हुए प्रदेशाध्यक्ष प्रतिभा सिंह को फौरन पद से हटा देना चाहिए। जिनके बयानों से सत्ता संगठन से लेकर कार्यकर्ता असहज महसूस कर रहे हैं। ताकि सत्ता और संगठन में सांमजस्य बन सके और कार्यकर्ताओं से जो संवाद टूट गया है, वह फिर से कायम हो सके। (लेखक पेशे से अधिवक्ता होने के साथ स्वतंत्र पत्रकार हैं।)









