सुरभि न्यूज़ ब्यूरो
शिमला, 23 जनवरी
राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक के राज्य क्रेडिट सेमिनार 2025-26 का आयोजन 23 जनवरी को शिमला में किया गया, जिसमें हिमाचल प्रदेश के लिए ₹42,243.83 करोड़ की क्रेडिट क्षमता का अनावरण किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य सचिव प्रभोध सक्सेना द्वारा किया गया, जिसमें नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक, डॉ. विवेक पठानियाँ, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के उप-महाप्रबंधक, पितांबर अग्रवाल और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के संयोजक, प्रदीप आनंद केसरी अधिकारी शामिल हुए।
डॉ. पठानियाँ ने संबोधित करते हुए राज्य के आर्थिक विकास में नाबार्ड की भूमिका पर प्रकाश डाला और बताया कि कृषि और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए नाबार्ड ने बैंकों और राज्य सरकार को ₹4,000 करोड़ का वित्तीय सहयोग दिया है। उन्होंने इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास और कांगड़ा जिले के डगवार में 1.5 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले दूध प्लांट की स्थापना जैसे नए प्रयासों का उल्लेख किया, जिसका उद्घाटन आज मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने किया।
डॉ. पठानियाँ ने सहकारी समितियों के आधुनिकीकरण में केंद्र सरकार के साथ नाबार्ड की साझेदारी के बारे में बताया, जिसमें पहले चरण में 870 प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों (PACS) का कंप्यूटरीकरण किया गया है और दूसरे चरण में 919 और समितियों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने वित्तीय साक्षरता की महत्ता को रेखांकित करते हुए बताया कि 5,500 से अधिक डिजिटल साक्षरता शिविर आयोजित किए गए हैं, साथ ही माइक्रो एटीएम और पीओएस मशीनों की स्थापना की गई है और वित्तीय समावेशन निधि के अन्तर्गत ब्लॉक स्तर पर 20 वित्तीय साक्षरता केंद्रों का समर्थन किया गया है।
मुख्य सचिव प्रभोध सक्सेना ने ग्रामीण विकास में बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए अधिक क्रेडिट प्रवाह की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश की 90% आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है और कृषि इसकी आर्थिक रीढ़ है। उन्होंने कृषि में “हरित क्रांति” जैसी एक बड़ी तकनीकी प्रगति की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि केसीसी (किसान क्रेडिट कार्ड) के बाद अब केवल आंशिक प्रगति ही देखी गई है। उन्होंने नाबार्ड से एमएसएमई क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करने का सुझाव दिया, जिसमें कुशलता विकास और सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना को प्राथमिकता दी जाए।
सक्सेना ने निजी निवेश को सार्वजनिक निवेश से अधिक महत्व देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बैंकों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नवाचार और उद्यमिता विकास को वित्तपोषित करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि नाबार्ड ग्रामीण नवाचार के साथ कृषि और एमएसएमई क्षेत्र में अनुसंधान और विकास (R&D) को भी वित्तीय सहायता प्रदान करे।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के उप-महाप्रबंधक पितांबर अग्रवाल और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति के संयोजक प्रदीप आनंद केसरी ने सेमिनार में अपने विचार साझा किए। दोनों अधिकारियों ने नाबार्ड द्वारा राज्य फोकस पेपर 2025-26 की तैयारी की सराहना की और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में नाबार्ड की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया।
कार्यक्रम में नाबार्ड ने ग्रामीण विकास में उत्कृष्ट योगदान देने वाले किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), बैंकों और PACS को सम्मानित भी किया।











