साहित्य : मध्य  प्रदेश के रीवा में अखिल भारतीय साहित्य परिषद का 17वां त्रैवार्षिक अधिवेशन 07 से 09 नवम्बर तक आयोजित – भाग-1  

Listen to this article

सुरभि न्यूज़, कुल्लू : डॉक्टर रीता सिंह

मध्य  प्रदेश के रीवा में अखिल भारतीय साहित्य परिषद का 17वां त्रैवार्षिक अधिवेशन 07 से 09 नवम्बर तक आयोजित किया गया। कार्यक्रम कृष्णा राज कपूर ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ। इस अधिवेशन का केंद्रीय विषय आत्मबोध से विश्वबोध था। कार्यक्रम में देशभर से लगभग 1000+ अखिल भारतीय साहित्य परिषद के कार्यकर्ताओं, विद्वत साहित्यिक हस्तियों, प्रांत प्रचारक बृजकांत  सांसद जनार्दन मिश्रा, विधायक प्रदीप, साहित्य क्षेत्र की कई पद्मश्री हस्तियां व देशभर के साहित्य साधकों और प्रेमियों ने इस साहित्यिक यज्ञ में सम्मिलित हुए। अखिल भारतीय साहित्य परिषद हिमाचल प्रदेश का प्रतिनिधित्व, प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर रीता सिंह, प्रदेश महामंत्री डॉक्टर इंदुबाला पराशर, प्रदेश प्रचार मंत्री हेमराज ठाकुर, केशव शर्मा, धर्मेंद्र कुमार, सुषमा खजूरिया, मनोहर लाल द्वारा किया गया।

दिनांक 07-11-2025 को प्रातः प्रांतश:/ गटशः बैठकें आयोजित की गई, जिसमें अखिल भारतीय साहित्य परिषद की आगामी कार्ययोजनाओं व वर्तमान में विविध प्रांतों में हो रही गतिविधियों पर विस्तारपूर्वक चर्चा व समीक्षा की गई। विशेषत: मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर केंद्रित साहित्यिक कार्यक्रमों, संघ साहित्य पर प्रदेश एवं प्रांत में बैठक करने, प्रांत वार वार्षिक पंचांग बनाकर तद्नुसार कार्यक्रमों की सूची तय करने व संगठन के कार्यों को विस्तार हेतु आवश्यक निर्देश दिए गए।

अपराह्न 1:00 बजे विशिष्ट अतिथि अतुल लिमये, सह सरकार्यवाह द्वारा अ भा सा प की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया गया। प्रदर्शनी में विभिन्न प्रांतों के माध्यम से परिषद के कार्यों की सुन्दर झलकी देखने को मिली, हिमाचल प्रदेश में आयोजित विभिन्न राष्ट्रीय एवं प्रांतीय संगोष्ठियों के महत्वपूर्ण चित्र भी प्रदर्शनी में उपलब्ध थे।
भोजन के उपरांत भारत गणराज्य के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि के रुप में सहभागिता की, इस दौरान मध्य प्रदेश सरकार के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल व वरिष्ठ साहित्यकार विश्वास पाटिल, समाजसेवी एवं शिक्षाविद डाॅ ब्रह्मानंद भी विशिष्ट अतिथि के रुप में उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र का संचालन पवनपुत्र बादल ,राष्ट्रीय संयुक्त महामंत्री द्वारा किया गया। सभी मंचा सीन अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर मंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम की विधिवत् शुरुआत की एवं अंजू श्रीवास्तव, अ भा सा प उत्तराखण्ड द्वारा मां सरस्वती की वंदना की। इसी क्रम में बाबू गीतेश्वर मध्यप्रदेश ने परिषद गीत की सुंदर प्रस्तुति दी। सभी अतिथियों को शाल ओढ़ाकर, श्रीफल व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री डॉ ऋषि कुमार मिश्र द्वारा अ भा सा परिषद के कार्यों, 2021 में हरदोई में आयोजित 16वें अधिवेशन से लेकर रीवा तक किए गए प्रमुख कार्यों पर अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत किया और राष्ट्र के सभी राज्यों के परिषद के सभी महत्वपूर्ण कार्यों को रेखांकित किया। तत्पश्चात उप-मुख्यमंत्री द्वारा अपने संबोधन में मैहर माता की स्थली रीवा की धरती, माता विंध्यवासिनी की विंध्य भूमि पर सभी साहित्यप्रेमियों व बेहतरीन आयोजन के लिए स्वागत व आभार व्यक्त किया।

वन्देमातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने को सम्मान पूर्वक याद किया। ‘पानीपत’ जैसी उत्तम रचना के साहित्यकार पाटिल द्वारा अपने जीवन अनुभवों को सबके समक्ष रखा, तदुपरांत महाकौशल प्रांत की ‘पुण्यक्षेत्रे रेवाखंडे’ पुस्तक का विमोचन किया गया। अपने संबोधन में कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कोविंद ने रीवा क्षेत्र की प्रमुख साहित्यिक विभूतियों को याद किया। केंद्रीय विषय “आत्मबोध से विश्वबोध” पर अपने विचार विस्तारपूर्वक रखे व साहित्य परिषद के कार्यों की प्रशंसा की। उनहोंने साहित्य के माध्यम से राष्ट्रचेतना को पुनः जाग्रत करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने रीवा के सैनिक स्कूल से पढ़कर निकले देश के वर्तमान थलसेनाध्यक्ष व नौसेनाध्यक्ष को भी याद किया व नौसेनाध्यक्ष को रीवा में प्राप्त विशिष्ट वन्यजीव सफेद बाघ (white tiger) कहकर संबोधित किया। उद्घाटन सत्र के अंत में परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील चंद्र त्रिवेदी ‘मधुपेश’ द्वारा मुख्य अतिथि पूर्व राष्ट्रपति के जीवन पर अपनी पंक्तियां प्रस्तुत की।

सायंकाल में अखिल भारतीय साहित्य परिषद की भव्य शोभायात्रा विधिवत पूजा-अर्चना के उपरांत नगर परिक्रमा पर निकली, शोभायात्रा में राष्ट्र के सभी प्रदेश के साहित्य साधकों, साहित्य प्रेमियों ने अपनी-अपनी प्रांतीय वेशभूषा में सहभागिता की। पूरा रीवा नगर ‘भारत माता की जय’ व ‘वंदेमातरम्’ के जयघोष से गुंजायमान रहा। 5-6 किमी की पदयात्रा के दौरान जगह-जगह पर साहित्य साधकों पर पुष्पवर्षा की गई।

रात्रि भोजन के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, सर्वप्रथम कार्यकर्ताओं ने राष्ट्रगीत ‘वंदेमातरम’ का मधुर गायन किया, तत्पश्चात स्थानीय लोककलाकारों द्वारा मध्यप्रदेश के लोकगीतों की सुंदर प्रस्तुति दी गई। लोकगीतों में रामचरितमानस, भगवान श्रीराम व माता सीता की स्तुति के गीत थे, एक- दो उल्लासपूर्ण होलीगीत भी शामिल थे। उसके बाद बघेलखंड के प्रसिद्ध लोकनृत्य ‘अहिराई’ की सजीव प्रस्तुति ने सबका मन को छू लिया। उसके बाद सर्वभाषा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। देशभर से पहुँचे कवियों ने अपनी प्रतिनिधि पंक्तियां मंच से प्रस्तुत की।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *