साहित्य, लेखन एवं पत्रकारिता के क्षेत्र में कहानी लेखन महाविद्यालय अंबाला छावनी एक इतिहास रचने वाला संस्थान है जिसने अपनी पहचान देश – विदेश तक बनाई है। संस्थान से प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका शुभ तरीका 5 दशकों से ज्यादा समय से अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।
संस्थान के संस्थापक महाराज कृष्ण जैन खुद पत्रकारिता के क्षेत्र में संस्थान थे। इस विद्यालय से कोर्स करने वाले लोग आज अख़बारों के बड़े – बड़े संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे है जिनकी पहचान देश भर में है।
मैं कहानी लेखन महाविद्यालय अम्बाला से 1992-93 के आसपास एक पत्रिका में विज्ञापन के माध्यम से जुडा। इसी दौरान मेरा पत्र ब्यवहार सन्नी अशेष व रतन चंद निर्रझर से पत्राचार के माध्यम से हुई। उन्होंने मुझे संस्थान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। मैंने कृष्ण महाराज से पत्रब्यवहार किया। उन्होंने मुझे संस्थान से कोर्स करने के लिए कहा तथा लेखन के प्रति प्रोत्साहित किया।मैंने महाविद्यालय से पत्रकारिता, फीचर्स एजेंसी संचालन तथा लेखन के कोर्स किए। धीरे – धीरे मेरे समाचार व अन्य लेखन सामग्री प्रकाशित होने लगी। मैने 2001 के आस पास सुरभि न्यूज़ एंड फीचर एजेंसी का संचालन शुरू किया और 2005 में मेरी फीचर एजेंसी आर एन आई से पंजीकृत हो गई।
कोर्स के दौरान डॉक्टर महाराज कृष्ण जैन ने पत्र के माध्यम से जो कुछ सीखने प्रेरणा दी वह मेरे लिए सबसे अमूल्य थी ओर आज भी है।
नवंबर 1996 में हमारी डाक विभाग की कल्चरमीट टीम बंगलौर जा रही थी तो अम्बाला में ट्रेन पकड़ने से पहले अम्बाला के शास्त्री कॉलोनी में उनके निवास गृह में महाराज कृष्ण जैन और उर्मि कृष्ण से मिलने सौभग्य प्राप्त हुआ।
अपने सहयोगियों सहित जब उनके घर में पहुँचते तो उर्मि एवं कृष्ण महाराज ने जिस तरह से हमारा अतिथि सत्कार किया व साहित्यिक चर्चा की उससे मेरे साथ गए पांच छः सहयोगी बहुत प्रभावित हुए। सहयोगियों के बीच संस्थान की बजह से मुझे जो सम्मान मिला उससे आज भी मुझे लेखन के प्रति प्रेरणा मिलती है। यह उर्मि जी से मेरी पहली मुलाक़ात थी।
कहानी लेखन महाविद्यालय द्वारा हिमाचल के मनाली में आयोजित दो बार लेखक मिलन शिविरों में भी उर्मि जी से मुलाक़ात का सुनहरा अवसर प्राप्त हुआ जो अस्मरणीय है। 2023 में नेपाल लेखक मिलन शिविर में शामिल होने से पहले उर्मि जी के घर शास्त्री कॉलोनी अम्बाला में रत्न चंद निर्रझर, सूरत राम ठाकुर व रनजोध सिंह हम सभी दिन को कुछ घंटे रुकने का अवसर प्राप्त हुआ। घर में पहुँचते ही भाई विजय कुमार ने स्वागत करते हुए उर्मि जी से चाय पानी के साथ साहित्यिक चर्चा हुई।
जिस तरह उर्मि जी ने बड़े ही अपनेपन से हमारा स्वागत करके चाय नास्ता करवाया उन पलों को कभी भुलाया नहीं जा सकता। कुछ घंटे साथ बिताने के बाद उन्होंने हमें अपना आशीर्वाद देकर विदा किया। उनका ममतामाई स्नेह, आदर सत्कार व आशीर्वाद पाकर हम बहुत भग्यशाली है।
नेपाल से वापसी पर मैं और रत्न चंद निर्रझर दिल्ली से सीधे अम्बाला उर्मिजी के घर पहुंचे। फ्रेस होकर सारी थकान मिटाने के बाद उर्मि जी के साथ भाई विजय द्वारा परोसा दोपहर का लजीज खाने के सुनहरे पल कभी भुलाये नहीं जा सकते। उर्मि जी से हमारी यह आखरी मुलाक़ात थी। ईश्वर उस महान आत्मा को अपने चरणों मैं शरण दे यही प्रार्थना है।









