शिमला जिला में पिछले पांच वर्षों में एनडीपीएस एक्ट के तहत 26 तथा पोक्सो अधिनियम में 35 फीसदी रही दोषसिद्धि दर 

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सुरभि न्यूज़ 

प्रताप अरनोट, शिमला 

जिला प्रशासन शिमला द्वारा एनडीपीएस एक्ट 1985, एससी एसटी एक्ट 1989 और पॉक्सो एक्ट 2012 को लेकर विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। शिमला जिला में यह पहली बार इस तरह की समावेशी कार्यशाला आयोजित की गई जिसमें जिला न्यायवादी सुधीर शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि पोक्सो अधिनियम (POCSO Act), जिसका पूरा नाम ‘यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012’ (Protection of Children from Sexual Offences Act, 2012) है। इस एक्ट के तहत जिला में 2021 में कुल चार मामले थे और चारों में आरोपी दोषमुक्त हो गए जबकि वर्ष 2022 में 18 मामलो में दोषमुक्त और 15 मामलों में सजा हुई। ऐसे में 83 फीसदी दर दोषसिद्धि रही है।

वर्ष 2023 में 13 मामलों में दोषमुक्त और 12 मामलों में दोषसिद्धि हुई है। ऐसे में दर 92 फीसदी रही। वर्ष 2024 में 32 मामलों में दोषमुक्ति और 16 मामलों में दोषसिद्धि हो पाई। वर्ष 2025 में 22 मामलों में दोषमुक्ति और 6 मामलों में दोषसिद्धि हो पाई। ऐसे में दर 27 फीसदी दर्ज की गई। वर्ष 2021 से 2025 तक कुल 138 मामले कोर्ट पहुंचे। इनमें 49 मामलों में ही दोषसिद्धि हुई जबकि 89 मामलों में दोषमुक्त हो गए। पिछले पांच वर्षों की दोषसिद्धि दर 35 फीसदी पाई गई है।

जिला न्यायवादी ने कहा कि 2021 से 2025 तक 391 मामले एनडीपीएस एक्ट के तहत दर्ज हुए है। इनमें से 98 मामलों में दोषसिद्धि हो पाई है जबकि 293 मामलों में दोषमुक्ति हो चुकी है। ऐसे में दोषसिद्धि दर 26 फीसदी रही है। वर्ष 2021 में 15 मामलों में दोषमुक्ति और पांच मामलों में दोषसिद्धि हुई। वर्ष 2022 में 20 मामलों में दोषमुक्ति और 9 मामलों में दोषसिद्धि हुई। वर्ष 2023 में 70 मामलों में दोषमुक्ति और 21 मामलों में दोषसिद्धि हुई। वर्ष 2024 में 82 मामलों में दोषमुक्ति और 25 मामलों में दोषसिद्धि हुई। वर्ष 2025 में 106 मामलों में दोषमुक्ति और 38 मामलों  दोषसिद्धि हुई है।

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