एकल विद्यालय अभियान प्रदेश में समाज सुधार में अपना दे रहा है महत्वपूर्ण योगदान – प्रियंका

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सुरभि न्यूज़

ख़ुशी राम ठाकुर, बरोट

एकला विधालय अभियान के अंचल जोगिन्द्र नगर के बरोट की संच प्रमुख प्रियंका ने कहा कि एकल विद्यालय अभियान प्रदेश में समाज सुधार में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है और वर्तमान में समाज सुधार व निर्माण की गतिविधियों को बढ़ाने की सख्त आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि जिला मंडी में स्थित एकल विद्यालय अभियान के अंचल जोगिन्द्र नगर के तहत तीन सौ एक विद्यालयों को स्थापित किया गया है । जिनमें से पांच गतिविधियाँ बाल शिक्षा, आरोग्य शिक्षा, ग्राम विकास व संस्कार शिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एकल विद्यालय अभियान के संच बरोट के तहत छोटा भंगाल व चौहार घाटी में 30 विद्यालय केंद्र स्थापित किए गए हैं।इन एकल विद्यालय केन्द्रों में कार्यरत सभी आचार्य मेहनत, लग्न व इमानदारी के साथ कार्य कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इन पांचो शिक्षा के बिना समाज को चलाना बेहद मुशिकल है और एकल विद्यालय के आचार्य विद्यालय केन्द्रों में तथा लोगों के घर – घर जाकर उनके अधिकारों के प्रति भी जागरुक कर रहे हैं।

प्रियंका ने बताया कि कुछ लोग अशिक्षित है और वे अपने बच्चों को स्कूल जाने के बाद अपने घरों में अध्यापन नहीं करवा सकते हैं, उन्हें एकल विद्यालय के आचार्य प्रतिदिन शाम को दो से तीन घंटे संस्कारों की शिक्षा देने के साथ – साथ पढ़ाई भी करवा रहे हैं।

छोटाभंगाल घाटी में स्थित बच्चों को पढ़ाते हुए एकल विद्यालय के आचार्य का फोटो भी भेज दिया गया है । (2) छोटाभंगाल तथा चौहार घाटी जैसी दुर्गम घाटियों में छुपी हुई कई प्रतिभाओं को उभरने तथा सांस्कृतिक अदान- प्रदान के लिए दोनों घाटियों के केंद्र स्थल बरोट में एक बार फिर से जिला स्तरीय कवि सम्मेलन आयोजित करने की मांग की गई है। घाटियों के सुभाष ठाकुर , राजकुमार , बलदेव सिंह , काजू राम , दीपू रिस्की , सुनील कुमार , अविषेक कुमार , विजय कुमार , श्याम सिंह ,मेद सकलानी , सुरेश कुमार आदि का कहना है कि इन दुर्गम घाटियों में रह रहे सैंकड़ों युवक युवतियों में अनेक प्रतिभाएं छिपी हुई है मगर उन्हें अपनी प्रतिभाओं को उजागर करने के लिए कोई सार्वजनिक मंच ही नहीं मिल पता है । इन युवाओं ने मंडी तथा धर्मशाला में स्थित लोक सम्पर्क विभाग के अधिकारियों व् जिला भाषा अधिकारियों से आग्रह किया है कि बारोट में जिला स्तरीय कवि सम्मेलन का आयोजन कर दुरागम घाटियों के युवक – युवतियों को अपनी प्रतिबाओं को उजागर करने का मौक़ा दिया जा

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