लोकगायक : लोक गीतकार व गायक मेदू सकलानी विलुप्त हो रही लोक संस्कृति को बचाने में दे रहें अहम योगदान

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सुरभि न्यूज़

ख़ुशी राम ठाकुर, बरोट

आजकल ज्यादातर देखा गया है कि कुछ लोक गायक पारम्पारिक गीतों को भुलाकर नए तथा बेतुके गीतों को तब्बजो दे रहे है जिससे अपनी लोक संस्कृति को भुलाते जा रहे है। लेकिन तेजी से उभर रहे लोक गीतकार व गायक मेदू सकलानी विलुप्त हो रहे पारम्पारिक पहाड़ी गीतों को अपनी सुरीली आवाज देकर संगीत प्रेमियों तक पहुंचाने में दिन रात मेहनत कर रहे हैं।

चौहार घाटी की धमच्यान पंचायत के गाँव ग्रामण में नानक चंद के घर जन्मे मेदू सकलानी एक गरीब परिवार से सम्बन्ध रखते हैं। बरोट में मीडिया से रूबरू होकर मेदू सकलानी ने बताया कि वे गत लगभग बीस वर्षों से दर्जनों पहाड़ी लोक गीत लिखकर पारम्पारिक गीतों को अपनी मधुर आवाज देकर अपने युट्यूब चैनल साँझा कर दर्शकों तक पहुंचा रहे  है।

मेदू सकलानी ने चौहार घाटी के विलुप्त हो रहे कई पारम्पारिक पहाड़ी गीतों को अपनी सुरीली आवाज़ देकर यूट्यूब में साँझा किया है तथा जिन्हें संजोये रखने के लिए स्थानीय लोग तथा संगीत प्रेमी सुनने के साथ – साथ उनकी खूब प्रशंसा कर रहे हैं। मेदू सकलानी का कहना है कि वे अपनी पारम्पारिक संस्कृति को हर जगह पहुँचाना चाहते हैं।

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