सुरभि न्यूज़
प्रताप अरनोट, केलांग : 12 जुलाई
जीवन में माता-पिता का ऋण कभी चुकाया नहीं जा सकता, लेकिन उनकी तपस्या, त्याग और संघर्ष को सम्मान देकर उनके प्रति कृतज्ञता अवश्य व्यक्त की जा सकती है। लाहौल-स्पीति की पट्टन घाटी के ठोलंग गांव से ऐसी ही एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है, जिसने हर किसी के दिल को छू लिया।
ठोलंग स्थित सुखलॉज होमस्टे में वरिष्ठ पत्रकार, ट्राइबल टुडे पत्रिका के संस्थापक एवं संपादक श्याम आज़ाद ने अपने 77 वर्षीय पिता सुखदयाल सेन के संघर्षपूर्ण जीवन, अथक परिश्रम और बुनकर कला के प्रति आजीवन समर्पण को तस्वीरों के माध्यम से एक विशेष फोटो गैलरी के रूप में सहेजा है। यह गैलरी केवल तस्वीरों का संग्रह नहीं बल्कि माता-पिता के प्रति सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता का जीवंत दस्तावेज़ बनकर उभरी है।
इस भावनात्मक चित्रशाला यानी फोटो गेलैरी का उद्घाटन लाहौल-स्पीति की पहली महिला उपायुक्त किरण भड़ाना ने अपने करकमलों से किया। उन्होंने गैलरी का अवलोकन करते हुए इस पहल को परिवार, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को सहेजने वाला अत्यंत प्रेरणादायक प्रयास बताया। इस मौके पर उपायुक्त ने कहा कि ऐसी पहल नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, परिवार और परंपराओं से जोड़ने का सशक्त माध्यम बन सकती है।
श्याम आज़ाद के पिता सुखदयाल सेन पिछले 77 वर्षों से बुनकर के रूप में कार्य कर रहे हैं और आज भी उसी जज़्बे के साथ इस पारंपरिक बुनाई कला की विरासत को सहेजने में निरंतर प्रयासरत हैं। वर्षों की मेहनत, संघर्ष और आत्मसम्मान से भरे इस सफर को तस्वीरों में संजोकर उन्होंने अपने माता-पिता के प्रति अपनी भावनाओं को एक स्थायी स्वरूप दिया है।
इस प्रेरणादायक पहल में उनके बड़े भाई, जो पेशे से अध्यापक हैं, ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। दोनों भाइयों का मानना है कि जिस समर्पण और प्रेम से माता-पिता अपने बच्चों का भविष्य संवारते हैं, उसी समर्पण के साथ बच्चों का भी यह दायित्व है कि वे अपने माता-पिता के सम्मान, खुशी और सपनों को संजोएं।
इस उद्घाटन समारोह में जिला परिषद सदस्य एवं ठोलंग गांव के पूर्व प्रधान सुरेश कुमार, पूर्व जिला परिषद उपाध्यक्ष संसार चंद शर्मा सहित बहुत से गणमान्य अतिथि एवं ग्रामीणों ने अपनी उपस्थिति दर्ज़ की। उपस्थित सभी लोगों ने इस पहल को माता-पिता के सम्मान का एक अनुकरणीय उदाहरण बताते हुए इसकी मुक्त कंठ से सराहना की।
यह फोटो गैलरी केवल एक परिवार की कहानी नहीं, बल्कि उस हर माता-पिता को समर्पित एक भावनात्मक श्रद्धांजलि है, जिनके संघर्ष की बदौलत उनके बच्चों के सपनों को उड़ान मिलती है। यह पहल समाज को यह संदेश देती है कि माता-पिता के त्याग का सबसे बड़ा सम्मान उन्हें प्रेम, आदर और अपनापन देना ।














