सुरभि न्यूज़
खुशी राम ठाकुर, बरोट
जीवन में बेशक कितनी भी कठिनाईंयां क्यों न हो लेकिन चौहार घाटी व छोटाभंगाल के दुर्गम गाँवों के लोग अपने पारम्परिक त्योहारों को मनाना नहीं भूलते हैं। दोनों क्षेत्र में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी सावन माह की पहले प्रविष्टे को शारनू का पारम्परिक त्यौहार धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
दोनों क्षेत्र में शारनू का त्यौहार 15 जुलाई की शाम से आरम्भ हो जाएगा। बुजुर्गों में मियोट के मखौली राम, झरवाड़ के जहरीया व थूजी गाँव के वजिन्द्र सिंह का कहना है कि 15 जुलाई की शाम को शारनू के उपलक्ष्य पर लोग अपने – अपने घरों में कई तरह के स्वादिष्ट पकवान बनाकर अपने परिवार जनों, पड़ोसियों व सगे- संबंधियों के साथ मिल बैठकर खाने का भरपूर आन्नद उठाएंगे।
वहीँ सावन माह की एक प्रविष्टे को 16 जुलाई को लोग सुबह नहा – धोकर अपने – अपने इष्ट देवी – देवताओं की पूजा – अर्चना करने के बाद स्वादिष्ट भोजन खाने का आनंद भी लेगें। शारनू के इस पारम्परिक त्यौहार पर मेहमानबाजी भी खूब चलती है तथा लोग मिल बैठकर त्यौहार के रंग में रंग जाते हैं। त्यौहारों में आपस में बैठकर एक तो आपसी भाईचारे को बढ़ावा मिलता है वहीं समाज में आपसी रिश्ते भी प्रगाढ़ रूप लेते हैं।
उल्लेखनीय है कि कुछ वर्ष पूर्व दुर्गम गांव में शारनू का यह पांरम्परिक त्यौहार चार से पांच दिनों तक चलता था मगर अब आधुनिकता के इस दौर में यह दो से तीन दिन तक ही मनाया जाने लगा है। इतना जरूर है कि प्राचीन त्यौहारों को लेकर यहां लोगों में काफी उत्साह देखने को मिलता है। शारनू त्यौहार के उपलक्ष्य पर क्षेत्र के कई दुर्गम गाँवों में ग्रामीणों द्वारा ग्रामीण मेलों का आयोजन भी किया जाएगा। इन ग्रामीण मेलों में स्थानीय देवी – देवता की रथ यात्रा निकाल कर शिरकत करेगें।











