सुरभि न्यूज़
जोगिंदर नगर, 15 जुलाई
प्राइवेट कंपनी और बिजली बोर्ड के कुछ कर्मचारियों द्वारा बिजली के स्मार्ट मीटर लगाने तथा उपभोक्ताओं को डराने व धमकाने के विरोध में आज चौंतड़ा में स्थानीय जिला परिषद् सदस्य कुशाल भरद्वाज के नेतृत्व में स्थानीय व्यापारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया।
इस अवसर पर व्यापार मंडल चौंतड़ा के अध्यक्ष अनिल ठाकुर, उपाध्यक्ष अनिल सूद, सचिव रविंदर कुमार, त्रिलोक चौहान, डॉक्टर प्रभात शर्मा, सुरेन्द्र राणा, पंकज सूद, लक्की, कपिल सूद, राम चंद, राज कुमार, अरुण, रणजीत, बिट्टू, रोशन लाल, गुर प्रसाद, शंभू, पंकज चौधरी, रंगीलू राम सहित बड़ी संख्या में व्यापारियों ने हिस्सा लिया।
प्राइवेट कंपनी के गुंडों की दादागिरी और बिजली बोर्ड के अधिकारियों की धमकियों के खिलाफ एकजुट विरोध करने तथा सभी उपभोक्ताओं को आंदोलन में शामिल करने बारे स्थानीय दुकानदारों ने कुशाल भारद्वाज के नेतृत्व में बैठक आयोजित कर एकजुट अगली रणनीति भी बनाई।
इस अवसर पर कुशाल भारद्वाज ने कहा कि स्मार्ट मीटर की यह योजना असल में बिजली के वितरण के निजीकरण करने, उपभोक्ताओं को मिलने वाली बिजली सबसीडी बंद करने, कर्मचारियों की छंटनी करने तथा पेंशन को बंद करने की दिशा में एक शुरूआत है।
उन्होंने कहा कि बिजली आपूर्ति अधिनियम-1948 और राज्य बिजली बोर्डों को नियंत्रित करने वाले समान अधिनियमों में जिस सामान्य सिद्धांत का पालन किया गया था वह सामजिक, आर्थिक विकास और सामाजिक टैरिफ की अवधारणा पर जोर देना हैं।
वर्तमान केंद्र सरकार व हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकार बिजली के निजीकरण के लिए तत्पर है, जिसमें बिजली के वितरण को प्राइवेट कम्पनियों के हवाले किया जाना है। राज्य बिजली बोर्ड को समाप्त कर अम्बानी-अदानी जैसे कॉर्पोरेट घरानों को बिजली वितरण का कार्य सौंप दिया जाएगा। इससे लाखों कर्मचारियों कि नौकरी चली जायेगी, पेंशनधारकों की पेंशन खतरे में पड़ जायेगी। बिजली बोर्ड में कोई नौकरी ही नहीं मिलेगी और सबसे बड़ी चोट यह कि उपभोक्ताओं को बहुत महँगी बिजली मिलेगी।
उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटर लगाने के कदम के तहत केंद्र सरकार ने देश भर में 22 करोड़, 22 लाख, 64 हजार से ज्यादा मीटर बदलने को मंजूरी दी है, जिनमें से लगभग 10 करोड़ मीटर की स्थापना का काम बड़े कॉर्पोरेट घरानों को सौंपा गया है। स्मार्ट मीटर लगाने की लागत जो कि 10 हजार रु के आस पास है को मासिक मीटर बिल में इस लागत को जोड़कर 7-8 वर्षों में उपभोक्ताओं से व्यवस्थित तरीके से वसूला जाएगा।
स्मार्ट मीटर का जीवन भी 7-8 साल का होता है उपभोक्ताओं को फिर से इसको बदलने के लिए पुनः भुगतान करना होगा,जबकि एक साधारण इलेक्ट्रॉनिक मीटर की कीमत मात्र 400 से 600 रु प्रति मीटर है, जोकि प्रदेश में पहले ही लगाए जा चुके हैं। ये मीटर स्मार्ट फ़ोन की तरह ही प्री पेड और पोस्ट पेड होंगे और जैसे ही रिचार्ज ख़त्म होगा तो उपभोक्ता के मकान की बिजली भी उसी वक्त काट दी जायेग। इन स्मार्ट मीटरों में अम्बानी की जियो कंपनी की चिप लगी है।
कुशाल भारद्वाज ने कहा कि केंद्र व हिमाचल प्रदेश की सरकार इसको तेजी से लागू कर रही हैं, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। स्मार्ट मीटर सीधे-सीधे उपभोक्ताओं को लूटने के लिए ही लग रहे हैं। यदि आज ही स्मार्ट मीटर योजना को रोकने के लिए एकजुट नहीं हुए तो फिर से गरीबों और मध्यम वर्ग के घरों में लैम्प और लालटेन जलाने की नौबत आ जायेगी।
कुशाल भारद्वाज ने राज्य सरकार से मांग की है कि स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए। उन्होंने कहा कि जो भी पुराने मीटरों को उखाड़ने व स्मार्ट मीटर लागाने आयेंगे उनका विरोध किया जाएगा। यदि कोई जबरदस्ती मीटर उखाड़ेंगे तो सभी उपभोक्ता उनके खिलाफ चोरी का केस दर्ज करेंगे।
व्यापारियों एवं आम उपभोक्ताओं की सहमति के बिना जिनके मीटर जबरन बदले गए हैं, वहां पुराने मीटर वहाल किये जाएँ। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक नहीं लगी तो जल्दी ही पूरे जोगिंदर नगर में स्मार्ट मीटर विरोधी सत्याग्रह शुरू कर दिया जाएगा।
इस अवसर पर वरिष्ठ व्यवसायी एवं पूर्व शिक्षक त्रिलोक चौहान, प्रभात शर्मा, अनिल ठाकुर, अनिल सूद व रवींद्र कुमार ने कहा कि कंपनी कर्मचारी व कुछ अधिकारी उपभोक्ताओं एवं व्यापारियों के साथ बदतमीजी कर रहे है। जबरदस्ती मीटर उखाड़ कर स्मार्ट मीटर जड़ रहे हैं। इस तरह की गुंडागर्दी को सहन नहीं किया जाएगा।












