प्रदेश में अत्यधिक खतरनाक कीटनाशक दवाईयों पर पूर्ण  प्रतिबन्ध लगाने के लिए मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन  

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सुरभि न्यूज़

बंजार, कुल्लू : 18 जुलाई

हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू, मुख्य सचिव हिमाचल प्रदेश सरकार, प्रमुख सचिव कृषि तथा निदेशक, कृषि एवं बागवानी विभाग को हिमाचल प्रदेश सरकार से केंद्र सरकार के पैराक्वाट पर प्रतिबंध के मसौदे (S.O. 3800(E)) का समर्थन करने और राज्य के सार्वजनिक स्वास्थ्य पर बोझ डाल रहे अत्यधिक खतरनाक कीटनाशकों दवाइयों पर प्रतिबन्ध लगाने के  लिए ज्ञापन भेजा है।

उन्होंने ज्ञापन में हिमाचल प्रदेश सरकार से अनुरोध किया है कि वह अत्यधिक खतरनाक कीटनाशकों (HHPs)* से हमारे किसानों, नागरिकों और पर्यावरण की रक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाए। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने 10 जुलाई 2026 को मसौदा राजपत्र अधिसूचना *(S.O. 3800(E))* जारी कर *पैराक्वाट डाइक्लोराइड* पर पूर्ण प्रतिबंध का प्रस्ताव दिया है। इसका कारण इसकी अत्यधिक तीव्र विषाक्तता और बार-बार होने वाली घातक जहर की घटनाएं हैं।

उन्होंने लिखा है कि बागवानी निदेशालय (HP) द्वारा हाल ही में स्पष्टता दी है कि सेब के स्प्रे शेड्यूल में अत्यधिक जहरीले रसायनों की सिफारिश नहीं की गई है। लेकिन एक बड़ी कमी अभी भी बनी हुई है: *पैराक्वाट और अन्य घातक HHPs जैसे मोनोक्रोटोफॉस, क्लोरपाइरीफॉस, कार्बोफ्यूरान, जिंक फॉस्फाइड और ग्लाइफोसेट राज्य भर में फल-सब्जी की खेती, चाय बागानों और खरपतवार नियंत्रण के लिए अभी भी बेचे और इस्तेमाल किए जा रहे हैं।

जून 2026 की शुरुआत में आपके कार्यालय को सौंपे गए अवधारणा पत्र में बताया था कि हिमाचल में कीटनाशक विषाक्तता के तीव्र मामले, गुर्दे की बीमारी, कैंसर और तंत्रिका संबंधी विकार जैसे दीर्घकालिक प्रभाव जन स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। इससे नाजुक जल स्रोतों का दूषित होने के साथ पर्यावरण और जैवविविधता पर दुशप्रभाव स्पष्ट रूप से दिख रहे हैं।

उन्होंने केंद्र सरकार के मसौदा प्रतिबंध के मद्देनजर, हिमाचल प्रदेश सरकार से विनम्रतापूर्वक आग्रह करते लिखा है कि केंद्र द्वारा अधिसूचित *S.O. 3800(E) का औपचारिक समर्थन* करें और 30 दिन सार्वजनिक टिप्पणी अवधि के भीतर कृषि मंत्रालय को HP का समर्थन पत्र भेजें।

कीटनाशक अधिनियम, 1968 की धारा 27* के तहत पैराक्वाट, मोनोक्रोटोफॉस, क्लोरपाइरीफॉस, कार्बोफ्यूरान, जिंक फॉस्फाइड और ग्लाइफोसेट पर *राज्य-स्तरीय प्रतिबंध* तुरंत अधिसूचित करें।

प्रवर्तन को मजबूत* करें – कृषि और बागवानी विभागों के माध्यम से HHPs की बिक्री और उपयोग रोकें और पंचायत स्तर पर जागरूकता अभियान चलाएं।

प्रकृतिक खेती खुशहाल किसान योजना* को बढ़ावा दें ताकि किसानों को गैर-रासायनिक विकल्प, जैविक इनपुट और सुनिश्चित बाजार लिंकेज मिल सके।

उन्होंने कहा कि कीटनाशक दवाइयों पर प्रतिबन्ध लगने से हिमाचल प्रदेश अत्यधिक खतरनाक कीटनाशकों से मुक्त घोषित होने वाला पहला हिमालयी राज्य बन सकता है। इससे 9 लाख किसान परिवार सुरक्षित होंगे, पानी, जनस्वास्थ्य, पर्यावरण और जैव विविधता की रक्षा होगी और “स्वच्छ एवं हरित हिमाचल” का ब्रांड मजबूत होगा।

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