सुरभि न्यूज़ ब्यूरो
कुल्लू, 7 नवम्बर
अंतर्राष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव में इस बार दशहरा समिति के अध्यक्ष द्वारा किया गए व्यवस्था परिवर्तन न केवल आम लोगों को परेशानी झेलनी पड़ी बल्कि दशहरा उत्सव में आए व्यापारियों पर भी यह व्यवस्था परिवर्तन बुरी तरह से भारी पड़ा है।
व्यापारियों की माने तो इस बार दशहरा उत्सव में जिस तरह से व्यवस्था परिवर्तन किया गया है, वह उनके लिए पूरी तरह नुकसानदायक साबित हो रहा है।
इतना ही नहीं बल्कि दशहरा समिति द्वारा किए गए व्यवस्था परिवर्तन के कारण यह पहली बार हुआ है कि दशहरा उत्सव आयोजन स्थल के मुख्य बाजार मीना मार्केट में अभी भी कई कनोपी टेंट खाली पड़े हुए हैं। जिन्हें व्यापारी लेने से गुरेज कर रहे हैं जिसका सीधा नुकसान दशहरा समिति को हुआ है।
जबकि मीना मार्केट में दुकानें लगाने वाले व्यापारियों को इस बार व्यवस्था परिवर्तन के चलते उनकी दुकानों में बदलाव करके उन्हें अन्य ऐसे स्थान पर दुकान लगाने के लिए कनोपी टेंट दिए गए, जहां पर उनका धंधा पूरी तरह से चौपट होने की कगार पर पहुंच गया है। ऐसे में व्यापारियों को मजबूरन मीना मार्केट में खाली पड़े कनोपी टेंट भारी भरकम किराया देकर लेने पड़े।
कुछ व्यापारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि उन्हें मीना मार्केट की बजाय प्रदर्शनी मैदान में दुकान लगाने के लिए कनोपी टेंट दिए गए, जिससे वहां पर उनका कारोबार पूरी तरह से चौपट हो रहा था। ऐसे में उन्हें मजबूरन मीना मार्केट में खाली पड़े कनोपी टेंट लेने पड़े। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनी मैदान में उन्होंने एक टेंट का किराया 36000 हजार दशहरा समिति को दिया। उसके बाद मीना मार्केट में खाली कनोपी टेंट लेने के लिए उन्हें लगभग एक लाख रुपए और किराया अदा करना पड़ा ताकि उन्हें दशहरा में आने का कुछ लाभ हो सके। लेकिन जिस तरह से दशहरा समिति द्वारा उनकी दुकानों में फेरबदल किया गया है, उसको देखते हुए व्यापारियों का कहना है कि अगर यही व्यवस्था अगले बरस भी रही तो वह दशहरा उत्सव में व्यापार करने के लिए किसी भी सूरत में नहीं आएंगे।
उल्लेखनीय है कि इस बार दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष सुंदर सिंह ठाकुर द्वारा व्यवस्था परिवर्तन के बहाने पूरे दशहरा उत्सव का उलट फेर करके रख दिया है। हर वर्ष मीना मार्किट में दुकान लगाने वाले दुकानदारों को वहां पर टेंट न देकर उन्हें दूसरी जगह टेंट लेने के लिए विवश कर दिया गया। जिसकी वजह से देश भर से आने वाले व्यापारियों में भारी आक्रोश है।
इस बार दशहरा उत्सव में लगने वाली रेड़ीफड़ी मार्केट को दशहरा उत्सव के समापन के बाद लगाने की इजाजत दी गई। जिससे जहां दशहरा कमेटी को नुकसान उठाना पड़ा, वहीं रेड़ीफड़ी लगाकर गुजर बसर करने वाले व्यापारियों को भी नुकसान झेलना पड़ रहा है। इतना ही नहीं बल्कि अधिकतर रेड़ीफड़ी वालों ने दशहरा उत्सव में अपना सामान सजाने से भी गुरेज कर लिया है।










