उत्तरकाशी के सिल्क्यारा सुरंग हादसे से सबक सीखना होगा, हर साल हादसों में मारे जाते है सेंकडों मजदूर

Listen to this article

 

सुरभि न्यूज़ 

नरेंदर भारती, भंगरोटू 

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में सिल्क्यारा-बड़कोट सुरंग में फंसे 41 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल दिया गया जो ख़ुशी की बात है परन्तु    इस सुरंग हादसे से सबक सीखना होगा। देश में कई ऐसे मर्मातंक हादसे होते है मगर सभी की जिंदगियों को बचाया नहीं जा सकता।।

केन्द्र सरकार को इन हादसों के संदर्भ में छानबीन करवानी चाहिए तथा दोषियों को सजा देनी चाहिए। किसी न किसी कि गलती की बजह यह  हादसे होते है जिनमें दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा न देकर फिर से ऐसे हादसों का सामना करना पड़ता है। अगर बीते हादसों से सबक सिखा जाये और दोषियों पर सजा निर्धारित कि जाये तो आने वाले हादसों क़ो रोका जा सकता है लेकिन सबक न सीखना और फिर हादसा हो जाना एक बहुत ही त्रासदी है।

यह कोई पहला हादसा नहीं है इससे पहले बहुत दुख़द व दर्दनाक हादसे हो चुके हैं। कुछ साल पहले हिमाचल में भी  किरतपुर मनाली फोरलेन सुरंग में भी तीन मजदूर सुरंग में फंस गए थे। काफ़ी मशकत क़े बाद दो मजदूरों क़ो बचा लिया था लेकिन तीसरे मजदूर की लाश कई महीने बाद मिली थी।

बीते वर्ष राजधानी दिल्ली के बाहरी जिले में स्थित बवाना औद्योगिक क्षेत्र में एक पटाखें की फैक्टरी के गोदाम में भीषण आग लगनें के कारण 17 लोगों मारे गए और तीस लोग बुरी तरह झुलस गए थे। मरने वालों में 10 महिलाएं तथा 7 पुरुष थे। मजदूरों ने सपने में भी नही सोचा होगा कि यह पटाखा गोदाम शमशान बन जाएगा और पल भर में जिन्दा लोग राख में बदल जायेंगे, यह बहुत बड़ी त्रासदी थी। लगभग तीन घंटे की मश्क्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका था, तब तक सब कुछ राख हो चुका था। आग के कारणो का पता नहीं चल पाया था। सरकार व प्रशासन को चाहिए था कि लापरवाही बरतने वालों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए थी ताकि फिर एसे हादसे न हो सके।

बीते वर्ष में रायबरेली के उंचाहार में एटीपीसी संयत्र का बायलर फटने से 30 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई थी जबकि 100 के लगभग घायल हो गए थे। 500 मैगावाट इकाई के बायलर में यह हादसा हुआ था जिसमें उस समय 200 कामगार मौजूद थे। सरकार ने मृतकों को कर परिवार वालों को मुआवजा दे दिया मगर मुआवजा इसका सही हल नहीं है।

एक ऐसा ही हादसा जयपुर के पास खातोलाई गांव में घटित हुआ था जहां बिजली का ट्रांसफरमर फटने से 14 लोगों की मौत हो गई थी। इन हादसों ने औद्याोगिक क्षेत्रों में मजदूरों की सुरक्षा पर प्रशनचिन्ह लगा दिया।

गत वर्ष जम्मू के उधमपूर से 80 किलोमीटर दूर रामबन जिले के चंद्रकोट में जम्मू-कश्मीर हाईवे पर टनल कर्मचारियों की बैरक में आग लगने से दस श्रमिक जिंदा जल गए थे। यह बैरक लोहे व फाईबर की बनी थी। यह बहुत ही दुखद हादसा था। आग लगने का कारण बिजली का शार्टसर्किट बताया गया था। इस बैरक में 100 से अधिक लोग रहते थे। मगर छुटटी होने के कारण आसपास के लोग अपने घर चले गए थे। गनीमत रही कि बैरक में मात्र 10 ही लोग थे वरना मृतको की संख्या 100 के लगभग होती। नया वर्ष इन मजदूरों के लिए यमराज बन कर आया था और बेचारे टनल में ही जिन्दा जलकर राख हो गए थे। मारे गए मजदूरों में एक मजदूर हिमाचल के कांगड़ा जिला का था तथा एक पंजाब का था बाकि बनिहाल-रामबन क्षेत्र के निवासी थे।सुरगं में घटित इस दर्दनाक हादसे ने कई प्रशन खड़े कर दिए परन्तु कोई हल नहीं निकला।

हिमाचल के जिला किन्नौर में एक निर्माणाधिन प्रोजेक्ट की दीवार गिरने से चार मजदूर बेमौत मारे गए थे। यहां पर 11 मजदूर काम कर रहे थे कि अचानक दीवार गिर गई। सात मजदूर तो भागकर बच गए मगर बेचारे चार मजदूर जिन्दा दफन हो गए। इन मजदूरों पर 42 मीटर लंबी दीवार गिर गई थी।

गत वर्ष महाराष्ट्र में एक इमारत के गिरने से 75 मजदूरों की असमय मौत गई थी और 60 मजदूर घायल हो गए थे। आखिर कब तक मजदूर इमारतों में जमीदोज होते रहगें। यह बहुत ही दर्दनाक हादसा था जिसने एक साथ इतने लोगों को लील लिया था। भले ही प्रशासन मुआवजे का मरहम लगाकर शोक संपत संत कर देते है मगर जो बेमौत मारे गये क्या वे लौट आएगें। यह एक यक्ष प्रशन बनता जा रहा है। ऐसे हादसे पहले भी हो चुके है जिसमें सैंकड़ों लोग लापरवाही के कारण मारे जा चुके हैं।

आंकडे़ बताते है कि 2001 से नवंबर 2023 तक हजारों मजदूर मारे जा चुके हैं। उत्तरकाशी की इस घटना ने सवाल खड़े कर दिये हैं कि बार-बार हो रहे इन हादसों के कारण क्या है। इस घटना ने यह प्रमाणित कर दिया है कि बीती घटनाओं से न तो सरकार ने सबक सिखा और न ही लापरवाही बरतने पर हो रहे हादसों के दोषियों को सख्ती से कटघरे में खड़ा किया।

पिछले कई सालों से ऐसे दर्दनाक हादसे हो रहे हैं। सरकारें ऐसी घटनाओ के बाद मुआवजा दे कर तथा आदेश देकर जांच कमेटी बिठा कर अपना पलू झाड देती है। जांच कमेटी का फैसला कब आता है किसी को कोई पता नहीं और हादसों में लापरवाही बरतने वाले दोषी सरेआम खुले घूम कर आराम से जी रहे है।

इन हादसों में सैंकड़ों बच्चे अनाथ हो जाते है, कई मां-बहनों का सिदूर मिट जाता है और बहनों के भाई मारे जाते है। केन्द्र सरकार को इन हादसों के संदर्भ में छानबीन करवानी चाहिए तथा दोषियों को सजा देनी चाहिए ताकि समय रहते इन घटनाओं को रोकने के लिए कारगर कदम उठाये जा सके। भविष्य में ऐसे दर्दनाक हादसों पर विराम लग सके। अगर अब भी सरकार लापरवाही बरती रही तो निर्दोष मजदूर बेमौत मरते रहेगें। ऐसे हादसो पर रोक के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाए ताकि भविष्य में ऐसे दर्दनाक की पुनरावृति न हो सके।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *